ऋषिराज जायसवाल

नईदुनिया न्यूज। देश आजादी के अमृत महोत्सव से शताब्दी महोत्सव की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन आज भी नौनिहाल दम तोड़ चुकी व्यवस्थाओं के कारण खुले आसमान के नीचे भविष्य गढ़ने को मजबूर हैं। धार जिले के नालछा विकासखड के गांव दुकनी खालसा में प्राथमिक विद्यालय के ऐसे हालात सरकार के आदिवासी क्षेत्रों के विकास के दावों की पोल खोलते नजर आते हैं। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी पिछले एक महीने से भवन के बाहर सड़क किनारे तिरपाल पर बैठकर अध्ययन कर रहे हैं।

आदिवासी बहुल दुकनी खालसा गांव के विद्यालय में 32 विद्यार्थी हैं। विद्यालय की शिक्षिका के साथ ग्रामीण अपने गांव के बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई पत्र और पंचनामे भी बनाए गए। बावजूद इसके अधिकारी यहां फटकने को तैयार नहीं हैं। सबकुछ जानते समझते भी स्थिति को सुधारने के लिए अब तक कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं।

लगातार गिर रहा छतों से मलबा

दुकनी खालसा का दशकों पुराना प्राथमिक विद्यालय का भवन बेहद जर्जर और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। छत से प्लास्टर लगातार गिर रहा है। छत पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं और दीवारें कमजोर हो गई हैं। खिड़की व दरवाजों की हालत खराब है। 32 विद्यार्थियों के भविष्य के साथ उनका जीवन भी यहां दांव पर लगा हुआ है। भवन की हालत जर्जर होने से यहां आसपास क्षेत्र से विषैले जीव का प्रवेश भी होता है। इससे विद्यार्थी सहमे हुए हैं।

घर से बनाकर ला रहे मध्यान्ह भोजन

शासन की गाइड लाइन के अनुसार विद्यार्थियों का मध्यान्ह भोजन यहां लाखों की लागत से बने रसोई घर में ही बनना चाहिए, लेकिन अध्ययन व्यवस्था के साथ यहां की मध्यान्ह भोजन व्यवस्था भी खराब है। यहां जवाबदार घरों से मध्यान्ह भोजन बनाकर लाते हैं और उसके बाद विद्यार्थियों को परोसा जाता है। भवन की हालत खराब होने के कारण मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

तिरपाल पर बैठना मजबूरी, वर्षा होने पर छुट्टी

नईदुनिया की टीम जब यहां पहुंची तो देखा कि शिक्षिका अनुसुइया विद्यार्थियों को अध्यापन करवा रही हैं। भवन जर्जर होने के कारण विद्यार्थी स्कूल के बाहर सड़क के किनारे एक पेड़ के पास तिरपाल पर खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। मौसम ने करवट बदली और विद्यार्थियों को छुट्टी देनी पड़ी। शिक्षिका ने बताया कि पिछले एक माह से यही चल रहा है। भवन जर्जर होने से अध्यापन कार्य बाहर करवाया जाता है और वर्षा शुरू होते ही छुट्टी करनी पड़ती है।

पंचनामा बनाया, शिकायत के बाद भी नहीं सुधरे हालात

शिक्षिका अनुसूइया पांडक ने बताया कि जर्जर भवन और यहां अध्यापन की स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियों को पत्रों के माध्यम से अवगत करा दिया है। यह भी बता दिया गया है कि वर्षा के दिनों में विद्यालय खुले आसमान के नीचे लग रहा है और वर्षा होते ही छुट्टी करनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि अधिकारी शीघ्र ही व्यवस्था ठीक करने की बात कर रहे हैं। सरपंच दिनेश ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा कई बार पंचनामा बनाकर भेजा गया है, लेकिन अधिकारी शिक्षण से जुड़ी इतनी गंभीर व्यवस्था को लेकर सचेत नहीं है। यहां विद्यालय होना या न होना एक जैसा ही है। तत्काल व्यवस्थाओं में सुधार होना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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