धार। यह तस्वीर उज्जैन निवासी 74 साल के बुजुर्ग रमेशचंद्र केलवा की है। जो सीने पर अपनी मांगों का पोस्टर चिपकाए कलेक्टर ऑफिस की सीढ़ियों पर धरना दे रहा है। परिवार के मना करने के बाद भी अपने हक के लिए उज्जैन से सुबह 10.30 बजे धार पहुंचे और कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर धरने पर बैठ गए। केलवा ने बताया कि कलेक्टर से कारण मुलाकात नहीं हुई। बताया गया कि वे मीटिंग में थे। करीब 1 बजे मुलाकात के बाद धरना खत्म हुआ। केलवा ने बताया कि मुझे आठ दिन का समय दिया है। वे 2006 में मानचित्रकार के पद से सेवानिवृत्त हो गए हैं, लेकिन अब उन्हें समयमान वेतनमान का लाभ नहीं मिला है। ऑफिसों के चक्कर काटकर थक गए। कलेक्टर को भी शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ। जिसके लिए उन्होंने एक माह पहले भी धरना दिया था। जिस पर सिटी मिजिस्ट्रेट ने 10 दिन में मदद का आश्वासन दिया था। मैंने उन्हें हक नहीं मिलने पर 14 नवंबर को धरने पर बैठने की चेतावनी दी। इसलिए गुरुवार सुबह धरने पर आकर बैठ गया।

हक के लिए लडूंगा

केलवा का कहना था कि उन्होंने अब तक किसी को रिश्वत नहीं दी है। मैं अपने काम के लिए कुछ नहीं दूंगा। कई सालों से चक्कर काट रहा हूंं। अपने हक के लिए अकेला ही लड़ूंगा। मेरे परिजन ने मना किया। वे मुझे रोकते हैं, लेकिन मेरे हक का पैसा क्यों नहीं दिया जा रहा है। जब तक काम नहीं होगा धरना दूंगा।

बुजुर्ग रिटायर्ड कर्मचारी ने सीने पर एक पोस्टर चिपकाया। इसमें लिखा है धरना... धरना...धरना। साथ ही अपना पद और मोबाइल नंबर के साथ ही समयमान वेतनमान का लाभ देने की मांग की है। बुजुर्ग हाथों में एक थैली लेकर पहुंचा था। इसमें सिर्फ पीने के लिए पानी था। केलवा ने बताया कि मैंने 40 विभाग में काम किया है, लेकिन अब अपनी मांग के लिए विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हूं। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की, लेकिन अधिकारी समस्या का निराकरण होने की बात कर शिकायत बंद करवा देते थे।

Posted By: Lav Gadkari

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