- शिकायतों के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का किया निरीक्षण, आई सामने कई गंभीर अनियमितताएं बदनावर। नईदुनिया न्यूज

सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र में एंटी रैबीज वेक्सिन उपलब्ध होने के बावजूद इन दिनों बंदरों द्वारा काटने से उपचार के लिए अस्पताल आने वाले लोगों को नहीं लगाए जा रहे हैं। वेक्सिन बाजार से बुलवाए जा रहे हैं या लोगों को अन्यत्र रैफर कि या जा रहा है। इससे लोग हैं। परेशान लोगों द्वारा इस बारे में बार-बार शिकायत की गई। मंगलवार को ही आक्रोशित लोगों ने फोरलेन पर चक्काजाम कर दिया था। घटना के बाद कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम नेहा साहू ने अस्पताल का आकस्मिक निरीक्षण कि या। इस दौरान अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई। एसडीएम को देख स्टाफ भी घबरा गया। उनके साथ आए नायब तहसीलदार मनीष जैन को कहना पड़ा कि 'यहां तो सब गोलमाल है।' निरीक्षण के बाद उन्होंने निजी लैब का पंचनामा बनाकर सील कि या।

एसडीएम ने सीबीएमओ डॉ. एसएल मुजाल्दा व अन्य चिकि त्सकों तथा ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों से पूछताछ कर सवाल-जवाब कि ए, कि ंतु वे कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे सके । एसडीएम ने अस्पताल की दवाई स्टोर का भी निरीक्षण कि या, जहां एंटी रैबीज वेक्सीन व एंटी स्नेक वेक्सीन पर्याप्त मात्रा में रखे हुए थे, कि ंतु पिछले 15 दिनों में यहां बंदर काटने से प्रभावित हुए लोगों को उपलब्ध नहीं कराते हुए उन्हें बाहर से लाने के लिए विवश कि या जा रहा था। लोग महंगे वेक्सिन को अन्य नगरों से खरीदकर लाए। एसडीएम ने स्टोर के रिकॉर्ड से अस्पताल में दवाई कक्ष में रखे स्टाक से मिलान कि या, कि ंतु उसमें भी गंभीर अनियमितता पाई गई। न तो स्टॉक रजिस्टर उपलब्ध था और न ही वितरण रजिस्टर। स्टोर से कि तनी दवाई कब दी जाती है, उसका भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिल सका। एसडीएम को अवगत कराया गया कि एक्सपायरी डेट की दवाइयों को डिस्ट्रॉय करने के लिए इनसीनेटर की सुविधा भी उपलब्ध नहीं होने से यह दवाइयां परिसर स्थित कु एं में लापरवाहीपूर्वक फेंकी जाती हैं, इससे जब भी कु एं में मौजूद कचरे में आग लगाई जाती है, तब काफी देर तक विस्फोट होने व जहरीला धुआं फै लने से लोंगों को सांस लेने में काफी परेशानी होती है। एसडीएम ने खुद मौके पर जाकर इस स्थिति को देखा।

डॉक्टर अनुपस्थित, रजिस्टर में मिले हस्ताक्षर

निरीक्षण के दौरान चिकि त्सकों की अनुपस्थिति के बावजूद उपस्थिति रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर पाए गए। उनके नाम डॉ. राज चौधरी व डॉ. सोनाली बिलोनिया बताए गए। सीबीएमओ से अस्पताल की अन्य सुविधाओं एवं अव्यवस्थाओं के बारे में पूछताछ की गई, लेकि न वे कोई जवाब नहीं दे पाए। अधिकांश समय कर्मचारियों से पूछकर ही बताते रहे। इससे पूर्व शिकायत मिलने पर एसडीएम ने गत 29 अप्रैल को सीबीएमओ को मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए थे। इस बारे में उन्हें समय सीमा में नोटिस का जवाब देने का कहा गया था, कि ंतु उन्होंने जवाब देना भी उचित नहीं समझा। निरीक्षण के दौरान कई लोगों ने सीबीएमओ के साथ ही अन्य चिकि त्सकों द्वारा बिना मरीज को छुए व जांच कि ए के वल पूछताछ कर ही उपचार करने की शिकायत की।

800 रुपए शुल्क देकर जांच करवाई

अस्पताल परिसर में ही ग्राम झींझारण की एक वर्षीय बालिका खुशी पिता शिवराम को लेकर उसके परिजन सोमवार से आए हुए थे। डॉक्टर ने बालिका की जांच निजी लैब में करवाने का कहा था। इस पर परिजन ने 800 रुपए शुल्क देकर जांच करवाई। डॉक्टर ने जांच रिपोर्ट देखने के बाद ही भर्ती करने का कहा था। इस पर एसडीएम ने बच्ची को तत्काल भर्ती करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के समय एसडीएम रीडर संदीप द्विवेदी, पटवारी प्रवीण रघुवंशी, मोहनसिंह बुंदेला आदि मौजूद थे। एसडीएम नेहा साहू ने बताया कि निरीक्षण व जांच का प्रतिवेदन बनाकर अग्रिम कार्रवाई के लिए कलेक्टर को प्रेषित कि या जाएगा। उन्होंने जल्द ही फिर से अस्पताल का निरीक्षण करने का आश्वासन दिया।

संलग्न चित्र 21 बीडीएन 05-अस्तपाल परिसर में एसडीएम चर्चा करते हुए।

21 बीडीएन 06-दवाई के स्टोर रूम का अवलोकन करते हुए।

Posted By: Nai Dunia News Network