सुसारी/निसरपुर (नईदुनिया न्यूज)। नर्मदा नदी से महज एक किमी की दूरी पर बसे नया चिखल्दा पुनर्वास स्थल पर लोग पेयजल के लिए तरस रहे हैं। दो साल बीतने के बाद भी विभाग यहां पेयजल टंकी का कार्य पूर्ण नहीं कर पाया है। पेयजल की जिस मुख्य पाइप लाइन से पानी दिया जा रहा है, वह दो-चार दिन में हर बार फूट जाती है। ऐसे में करोड़ों की राशि खर्च करने के बाद भी डूब से पुनर्वास में आए लोगों को नर्मदा नदी के पास होते हुए भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

धार जिले के अंतिम छोर का गांव चिखल्दा सरदार सरोवर बैक वाटर में डूब गया है। यहां के 400 परिवारों को बसाने के लिए शासन ने नया पुनर्वास स्थल डूब के गांव से दो किमी दूर बनाया है। इसके लिए जमीन व मूलभूत सुविधाओं के लिए शासन ने साढ़े 12 करोड़ की राशि दी है, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी लोगों को पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में यहां 200 से अधिक परिवार रहने आ गए हैं।

दो-दो माह के अंतराल में चल रहा काम

पुनर्वास स्थल पर नर्मदा घाटी विकास विभाग का लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी डिवीजन एक पेयजल टंकी का निर्माण कर रहा है, जो दो साल बाद भी पूर्ण नहीं हो पाई है। रहवासी राजेंद्र पांडे ने बताया कि टंकी का काम दो माह चलता है, फिर दो माह बंद रहता है। यह हम दो साल से देख रहे हैं। ऐसे में पेयजल टंकी की गुणवत्ता सही रहने पर संदेह है। कार्य करने वाली एजेंसी दो से तीन बार बदली जा चुकी है। पेयजल टंकी के पास एक संपवेल है, वही आधा भर पाता है। जिस पाइप लाइन से इसे भरा जा रहा है, उसमें उचित दबाव से पानी नहीं आता है। ऐसे में टंकी में ऊपर तक पानी कैसे जाएगा।

बार-बार फूटती है मुख्य पेयजल लाइन

पुनर्वास स्थल के पेयजल के लिए विभाग ने समीप के नर्मदानगर के फिल्टर प्लांट से पांच किमी लंबी पाइप लाइन बिछाई है, जो दो से चार दिन में हर बार फूट जाती है। ऐसे में पेयजल को लेकर परेशानी आ जाती है। जो पाइप डाले गए हैं, उसकी गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। विभाग के अधिकारी का कहना है कि अगर टूट-फूट होती है, तो निर्माण एजेंसी सुधार करती है, जो यह बताता है कि काम की गुणवत्ता से कहीं न कहीं समझौता किया गया है।

एक हजार मवेशी पर एक भी पशु होज नहीं

पुनर्वास स्थल पर बड़ी संख्या में पशु पालक रहते है। यहां एक हजार से अधिक पशु हैं, लेकिन पुनर्वास स्थल पर एक भी होज नहीं है। ऐसे में पशुओं के पेयजल को लेकर भी काफी दिक्कत आती है। पशुओं को एक किमी दूर नर्मदा नदी किनारे पानी पिलाने ले जाना पड़ता है। जैसे-जैसे जलस्तर कम होता जा रहा है, किनारों पर कीचड़ व दलदल होने से पशुओं के पैर फंस रहे हैं। इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पाइप लाइन में दिक्कत आने पर दूर करते हैं

मुख्य पेयजल पाइप लाइन में दिक्कत आती है, तो उसे निर्माण एजेंसी दूर कर देती है। पेयजल टंकी का कार्य चल रहा है। यदि टुकड़ों में भी कार्य किया जाए, तो गुणवत्ता को लेकर दिक्कत नहीं आएगी।

मुकेश जैन, उपयंत्री, पीएचई एनवीडीए बड़वानी

एक-दो माह में कार्य पूर्ण कर लेंगे

चिखल्दा पुनर्वास में पानी की टंकी का कार्य एक या दो माह में पूर्ण हो जाएगा। पाइप लाइन में कहां दिक्कत आ रही है, उसे दिखवाते हैं।

आरके नवीन, कार्यपालन यंत्री, एनवीडीए क्रमांक 30 बड़वानी

Posted By: Nai Dunia News Network

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