Ekveera Mata Mandir Badnawar: बदनावर (धार)। बदनावर स्थित प्राचीन एकवीरा देवी का मंदिर इन दिनों श्रद्धा, भक्ति एवं आराधना का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर 108 गुप्त शक्तिपीठों में से एक है। एकवीरा माता पांडवों की कुलदेवी हैं। इनके देशभर में दो ही मंदिर हैं। एक बदनावर तथा दूसरा धुलिया (महाराष्ट्र) में। मूर्ति एक दिन में अपने तीन स्वरूपों में दर्शन देती है। दशहरे के दिन मंदिर की छटा निराली हो जाती है, जब नौ दिवसीय आराधना के पश्चात विजयी भाव से श्रद्धालु देवी दर्शन के लिए उमड़ते हैं।

108 गुप्त शक्तिपीठों में से एक, देशभर में दो ही मंदिर

नवरात्र के दौरान सप्तमी तिथि को एकवीरा देवी का प्रार्दुभाव हुआ है, उस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर के पुजारी मनीष शर्मा बताते हैं कि वे वंशानुगत रूप से मंदिर की पूजा-अर्चना करते चले आ रहे हैं। एकवीरा देवी सुबह बाल्यकाल, दोपहर में युवा अवस्था और शाम को वृद्धावस्था के रूप में दर्शन देती हैं।

विशेषता

किवदंतियों के अनुसार पांडव यहां अज्ञातवास के दौरान देवी-दर्शन के लिए आया करते थे। बदनावर के निकटवर्ती अर्जुनखेड़ी, भीमपुरा, भीमपाला आदि स्थानों के नाम से पता चलता है कि पांडवों का यहां से जरूर कोई संबंध रहा होगा। मंदिर के जीर्णोद्धार के दौरान खोदाई में कई भित्ती चित्र एवं पत्थर की अनेक छोटी-बड़ी मूर्तियां मिली हैं, जो मंदिर परिसर में आज भी मौजूद हैं। इनमें शिवलिंग, गणेश, राधा-कृष्ण, काल भैरव, बटुक भैरव एवं बालकनाथ की मूर्तियां शामिल है।

इतिहास

एकवीरा देवी का उल्लेख हरिवंश पुराण, देवी महापुराण एवं दुर्गा सप्तशती में मिलता है। कुछ इतिहासकार एवं पुरातत्ववेत्ता इस मंदिर को परमारकालीन मानते हैं। एकवीरा देवी की मूर्ति लगभग दो हजार साल से अधिक पुरानी है। जीर्णोद्धार से मंदिर का स्वरूप तो बदल गया है, किंतु मूर्ति आज भी ज्यों की त्यों है।

Posted By: Prashant Pandey

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