सुसारी (नईदुनिया न्यूज)। क्षेत्र में इस बार मिर्च उतपादक किसानों को एक माह से हरी मिर्च के भावों में कमी के चलते लागत मूल्य नहीं मिल रहा है। वहीं अब जब लाल मिर्च की फसल आने लगी है तो लगातार बारिश में भीगने से सड़न व वाइरस नामक बीमारी आ रही। मिर्च उत्पादक किसानों को अब मिर्च की हरी व लाल दोनों तरह की फसलों में आर्थिक नुकसानी झेलना पड़ रही है। इसके चलते किसान परेशान हो रहा है।

कुक्षी तहसील में मिर्च दूसरी मुख्य फसल है। इसका इस साल रकबा 8 हजार हेक्टेयर है। यहां पर लगभग 18 से 20 तरह की अलग-अलग मिर्च की वेरायटी की फसल किसान लेता है। इसके चलते यहां की मिर्च पूरे देश में जानी जाती है। यहां की हरी के साथ लाल मिर्च देश के अलग-अलग राज्यो में भेजी जाती है। मिर्च की फसल के लिए किसान मेहनत भी बहुत करता है। मिर्च का हाईब्रिड बीज का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी लागत ही 18 से 50 हजार रुपये प्रति किलो होती है। वहीं फसल पर एक एकड़ पर 60 से डेढ़ लाख रुपए का खर्च किसान फसल के लिए करता है।

क्षेत्र में किसान अप्रैल व मई माह में ही मिर्च की फसल को खेतों में इस उम्मीद के साथ लगा देता है कि अगस्त व सितंबर माह में कच्ची फसल यानी हरी मिर्च आ जाती है। वह एक से दो माह के बाद लाल मिर्च आने लगती है। इस साल एक माह से हरी मिर्च के भाव ही नहीं हैं। किसान प्रदीप पाटीदार कहते है एक माह से हरी मिर्च 3 से 7 रुपये किलो बिक रही है। ऐसे में तुड़ाई की लागत ही 3 रुपये प्रति किलो लग जाती है। ऐसे में लागत ही नहीं निकल रही है। वहीं लगातार बारिश फसल को खराब कर रही है। ऐसे में अब कई किसान खेतों में हरी मिर्च तोड़ ही नहीं रहे हैं।

लाल मिर्च की फसल बिगड़ने लगी

हरी मिर्च की फसल के दाम नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में अब किसान लाल मिर्च की फसल से उम्मीद लगा कर बैठे हैं। लाल मिर्च आएगी उसे सुखा कर फसल से कुछ आय अर्जित कर लेंगे। पर अब बारिश ने उस फसल को भी बिगाड़ दिया है। जो लाल मिर्च की फसल को अब तोड़कर सुखाने की कोशिश की जा रही है तो बारिश अब फसल को खराब कर रही है। सुसारी के किसान अनिल पाटीदार ने बताया कि मैंने अभी कुछ दिनों पूर्व 6 क्विंटल लाल मिर्च तोड़ कर सुखाई थी। बारिश ने फसल को धो दिया है। अब वह सड़ने लगी है। ऐसे में अब मुझे 50 किलो सूखी लाल मिर्च आ जाए। यह उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। ऐसे में पहले हरी मिर्च से नुकसान हुआ अब लाल मिर्च में हो रहा है।

वाइरस का भी अटैक

एक तो भाव नहीं मिल रहे, वहीं बारिश में फसल खराब होने से किसान पहले से ही परेशान हैं। ऐसे में अब मिर्च की इस फसल में वाइरस नामक बीमारी ने भी अटैक कर दिया है। इससे फसल व पौधा समय से पहले ही सूखने लगे है। ऐसे में हर साल फरवरी व मार्च माह तक जो मिर्च की फसल खेतों में रहकर किसानों को उत्पादन देती थी। वह अब एक या दो माह में ही खेतों से निकालने के लिए किसानों को मजबूर होना पड़ेगा। इससे इस साल फसल से आय की उम्मीद तो दूर लागत भी नहीं निकल पाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local