राजगढ़ (नईदुनिया न्यूज)। इन दिनों क्षेत्र में गेहूं कटाई का दौर चल रहा है। हालांकि अधिकांश स्थानों पर अब भी खेतों पर गेहूं की फसल खड़ी है। अंतिम दौर में भी फसलों को खेतों में सुरक्षित रखना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। हाल ही में ओलावृष्टि के कारण फसलों में नुकसान हुआ है, लेकिन अब नीलगायें फसलों को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। नीलगायों के रौंदने कारण कई स्थानों पर पौधे नष्ट हो गए हैं। नीलगायों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

किसानों का कहना है कि नीलागये जितनी मात्रा में फसल खाती नहीं हैं, उससे कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचा रही हैं। ग्राम छड़ावद निवासी किसान दिनेश राठौर ने बताया कि क्षेत्रभर में नीलगायों को आतंक मचा हुआ है। दोपहर के समय किसान खेतों पर रखवाली कर लेते हैं, लेकिन रात के समय फसलों की रखवाली करना किसी चुनौती से कम नहीं है। फसलों को जितना नुकसान मौसम से नहीं होता है, उससे कहीं ज्यादा नीलगाय पहुंचा रही हैं। इधर, वन विभाग का रवैया इस मामले में सुस्त नजर आ रहा है। नतीजतन, दिन-प्रतिदिन गायों की संख्या बढ़ती जा रही है।

नष्ट हो जाते है पौधें

पिपरनी में भी कई स्थानों पर नीलगाय फसलों को नष्ट कर रही है। गायें झुंड बनाकर खेतों पर आती हैं। इस वजह से खेतों की खड़ी गेहूं की फसलें आड़ी पड़ जाती हैं। पौधे एक बार नष्ट होने के बाद दोबारा पनपते भी नहीं हैं, जिससे किसानों को काफी नुकसान होता है। यदि वन विभाग सक्रिय होकर गायों को पकड़ने के लिए रेक्स्यू चलाए, तो निश्चित ही किसानों को नुकसानी से बचाया जा सकता है।

50-50 के झुंड में आती हैं

नीलगायों का सबसे ज्यादा आतंक रिंगनोद, छड़ावद, पिपरनी, तिरला और गुमानरा क्षेत्र में है। छड़ावद क्षेत्र में चुनारबांध और मानगढ़ तालाब होने के कारण कुछ वर्षों से सिचाई का रकबा बढ़ा है। इसके चलते अधिकांश किसानों द्वारा गेहूं की खेती की जा रही है। दूसरी ओर क्षेत्र में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था होने के कारण नीलगायों को रुझान भी इस क्षेत्र में ज्यादा है। पिपरनी के किसान रमेश भायल ने बताया कि 50-50 के झुंड में नीलगायें खेतों पर आती हैं। इतनी अधिक संख्या होने के कारण कुछ ही समय में फसलों को चटकर जाती है। फसलों को नुकसान भी पहुचांती हैं।

पकड़ने के लिए रणनीति बनाएंगे

नीलगायों का मुद्दा शासन स्तर पर चल रहा है। इन्हें पकड़ने के लिए विभाग द्वारा जल्द ही रणनीति बनाई जाएगी। यदि किसानों की फसलों में नुकसान हुआ है, तो उन्हें मुआवजा दिलवाया जाएगा।

संतोषकुमार रणसौरे, एसडीओ, वन विभाग सरदारपुर

23 आरडीएच 06ः- रिंगनोद क्षेत्र में गेहूं की फसलों से होकर भागती हुईं नीलगायें।

नीलगाय से पीड़ित किसान सैकड़ों, मुआवजा एक को भी नहीं

बदनावर। नईदुनिया न्यूज। नीलगाय के बढ़ते कुनबे से किसान की परेशानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। पीड़ित किसानों की न तो उचित सुनवाई हो पा रही है और न ही नुकसानी का मुआवजा मिल रहा है। हालांकि मुआवजे का प्रावधान तो प्रशासन बता रहा है, लेकिन इसकी प्रक्रिया ही इतनी पेचीदा है कि फसलों की बोवनी करने से लेकर उसक कट जाने तक भी मुआवजा प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है और किसान कभी तहसील कार्यालय, तो कभी वन मंडल कार्यालय के चक्कर काटता रहता है, लेकिन समय पर समाधान नहीं मिल पा रहा है। जब तक सर्वे रिपोर्ट तैयार कर प्रतिवेदन बनाया जाता है, तब तक किसान दूसरी फसल बोवनी कर देता है। कई बार तो फसल कट जाने के बाद सर्वे करने लिए अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं। यही कारण है कि करीब छह-सात साल से नीलगाय के रौंदने के बाद खराब हुई फसलों की नुकसानी का मुआवजा एक भी किसान को नहीं मिल पाया है। जबकि इनसे पीड़ित किसानों की संख्या सैकड़ों में हैं।

नीलगाय की रोकथाम के लिए सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों का अंबार लगा हुआ है, लेकिन समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। पिछले दिनों धार के एक किसान ने प्रधानमंत्री से सीधे संवाद में नीलगाय से फसलों की बर्बादी का जिक्र कर मुआवजा देने की बात कही थी। हालांकि प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह चौहान ने पिछले दिनों जंगली जानवरों से होने वाली फसलों की नुकसानी का मुआवजा देने की घोषणा की है।

सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की है

तहसीलदार अजमेरसिंह गौड़ ने बताया कि नीलगाय से जिन क्षेत्रों में फसलों की नुकसानी हुई है, वहां पटवारियों ने सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर ली है। जांच उपरांत प्रकरण तैयार कर स्वीकृति की प्रक्रिया की जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags