महेश सोलंकी देवास(नईदुनिया)

वैक्सीनेशन के बाद रक्तदान की समय सीमा होने से कई जगहों पर ब्लड का संकट सामने आ रहा है। कोविड काल होने से भी अस्पतालों में ब्लड का संकट की बात सामने आ रही है, लेकिन जिला अस्पताल में ब्लड को लेकर अभी भी राहत है। यहां लोगों को ब्लड चढ़ना कम हो गया है। एक्सीडेंटल केस और सर्जरी के साथ ही ऐसे मरीजों की संख्या कम हो गई है जिन्हें ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता पड़े। इसलिए ब्लड का संकट नहीं हैं। सबसे बड़ा कारण है कि एनीमिक गर्भवती महिलाएं भी कोविड के कारण अस्पताल नहीं पहुंच रही है। वहीं बच्चों के एसएनसीयू में भी बच्चों को ब्लड की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। एक माह पहले की बात करें तो रोजाना अस्पताल में 10 से 12 यूनिट ब्लड लोगों को लगाया जाता है, लेकिन वर्तमान में एक से दो यूनिट ही ब्लड चढ़ रहा है। कभी-कभी तो एक भी यूनिट खर्च नहीं होता है। बीते तीन दिनों में कुछ संस्थाओं ने भी जिला अस्पताल के लिए रक्तदान किया है। इससे ब्लड की कम नहीं हैं। जरूरत के मुताबिक पर्याप्त हैं।

एनीमिक गर्भवती अस्पताल नहीं पहुंच रही है

जिला अस्पताल में अभी कोविड काल की वजह से गर्भवती एनीमिक महिलाएं कम संख्या में पहुंच रही है। पहले एक माह में करीब 40 से ज्यादा महिलाएं पहुंचती थी। जिन्हें ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता होती है, लेकिन अभी एक माह में सिर्फ 10 से 12 महिलाएं ही पहुंची है। इससे राहत होने से साथ ही चिंता की भी बात कही जाती है कि कोविड काल के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं के अस्पताल में पहुंचने की संभावनाएं बढ़ सकती है। जिन्हें ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी।

मरीजों को ब्लड चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ रही

जिले में वर्तमान में लाकडाउन चल रहा है। इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो गई है। लोग सीमित संख्या में वाहन लेकर बाहर निकलते हैं। ऐसी स्थिति में एक्सीडेंट की संख्या बहुत कम हो गई। गंभीर हालत वाले मरीज कम ही पहुंच रहे हैं। इससे मरीजों को ब्लड चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ रही है।

वर्तमान में 57 यूनिट, संस्थाएं रक्तदान कर रही हैं

जिला अस्पताल में वर्तमान में 57 यूनिट ब्लड हैं जो आवश्यकता के मुताबिक पर्याप्त कहा जा सकता है। वहीं शहर की कई संस्थाएं भी ब्लड डोनेशन कर रही है। तीन दिन पहले ही कुछ संस्थाओं में ब्लड दान किया है। वहीं युवा भी समझदारी दिखा रहे हैं। वे भी वैक्सीनेशन से पहले रक्तदान कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में अस्पताल में आगे भी रक्तसंकट नहीं होने की संभावना है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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