किसानों का हंगामा,

- अच्छे कपास में कमी दिखाकर खरीदी नहीं करने का लगाया आरोप, विवाद बढ़ने पर पहुंची पुलिस

- मंडी प्रांगण में किसानों ने दिया धरना, सुलह के बाद शुरू हुई खरीदी

धामनोद (नईदुनिया न्यूज)। भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा दो दिन पहले ही कृषि उपज मंडी में कपास की खरीदी शुरू की गई है। दूसरे दिन गुरुवार सुबह 10 बजे विवाद के बाद किसानों ने हंगामा कर दिया। सैकड़ों किसानों ने लामबंद होकर खरीदी रुकवा दी। सीसीआई अधिकारी पर अच्छे कपास में कमी दिखाकर खरीदी नहीं करने का आरोप लगाया। गुस्साए किसान मंडी प्रांगण में ही धरने पर बैठ गए। मामला बिगड़ता देख पुलिस बल मौके पर पहुंचा। इस दौरान चार घंटे खरीदी बंद रही। सुलह के बाद खरीदी शुरू करवाई गई।

मंडी में हर साल सीसीआई के मापदंडों के कारण विवाद की स्थिति बनती है। बुधवार को भी विवाद की स्थिति बनी थी। गुरुवार को भी अच्छे कपास की जानबूझकर खरीदी नहीं करने का आरोप लगाते हुए किसानों ने हंगामा कर दिया। मंडी प्रांगण में मौजूद किसानों ने जय जवान जय किसान, मंडी प्रशासन मुर्दाबाद और सीसीआई मुर्दाबाद के नारे लगाकर विरोध दर्ज करवाया। किसानों ने बताया कि सीसीआई नगर के कुछ व्यापारियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों से खरीदी नहीं कर रही है। हालांकि अधिकारी ने इन सब बातों का आधारहीन बताया।

17 प्रतिशत नमी का कपास खरीदें

भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी दिनेश पटेल सहित मौजूद किसानों ने बताया कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार 12 प्रतिशत नमी का कपास लिया रहा है। जबकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए 17 प्रतिशत नमी का कपास खरीदा जाना चाहिए। किसानों का मानना है कि अतिवृष्टि, वायरस और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए नमी में छूट दी जानी चाहिए। इस वर्ष पहले ही कपास का उत्पादन बहुत कम हुआ है। कई किसान अपनी उपज बेच चुके हैं। जो थोड़े बहुत किसान बचे हैं, उन्हें लाभ मिलना चाहिए। गुरुवार को हुए विवाद के बाद सीसीआई ने सहयोग की बात कही है।

खरगोन मंडी में हुई खरीदी की तुलना

किसानों ने आरोप लगाया कि आसपास की मंडियों में सभी सीसीआई केंद्र की खरीदी की नियमावली एक है। धामनोद मंडी में अधिकारी हठधर्मिता दिखाकर व जानबूझकर कपास नहीं खरीद रहा है, जो गलत है। किसानों को सीसीआई की खरीदी का लाभ मिलना चाहिए। किसानों का आरोप है कि नीलामी शुरू होने पर दो वाहनों में नमी की जांच नहीं की गई और सीधे ही किसी अधिकारी ने उसे खरीदने से मना कर दिया। इसी कारण विवाद की स्थिति निर्मित हुई।

गुणवत्ताहीन कपास नहीं खरीद सकते

सीसीआई अधिकारी हर्षल शिंदे ने बताया कि बिना मानक मापदंड के कपास की खरीदी नहीं की जा सकती है। नियमानुसार 8 से लेकर 12 प्रतिशत तक हम लोग वैरायटी अनुसार कपास का खरीदी कर मूल्य तय करते हैं, किंतु किसान अपना गुणवत्ताहीन कपास का भी अच्छा मूल्य मांग रहे थे, जो कहीं से कहीं तक संभव नहीं। शासन की निर्धारित गाइडलाइन के मुताबिक भाव दिए जा रहे हैं, लेकिन कुछ किसान अपनी गुठली और पीला कपास की सीसीआई मूल्य पर खरीदी की मांग कर रहे थे, जो संभव नहीं है।

घंटों बहस के बाद नीलामी आरंभ

मौजूद किसान जनप्रतिनिधि, प्रशासन, व्यापारियों और अधिकारियों पर आरोप लगाते रहे। स्थिति बिगड़ती देख सीसीआई अधिकारी व मंडी सचिव लक्ष्‌मणदास सुखवानी एक कमरे में जाकर बैठ गए। सुलह के बाद कपास नीलामी स्थल पहुंचे एवं खरीदी शुरू की।

नकद भुगतान के लिए कम भाव में देना पड़ रहा है कपास

इस दौरान एक बात और सामने आई है कि कई किसान जरूरत के हिसाब से अपनी उपज को नकद में बेचने का प्रयास करते हैं। उनका मानना है कि भले ही 10 रुपये कम में कपास बिके, लेकिन उन्हें तुरंत भुगतान मिल सके। ज्ञात हो कि किसानों को सीसीआई द्वारा दिया गया भुगतान नियमानुसार तीसरे दिन मिल पाता है। ऐसे में जरूरतमंद किसान खुले बाजार में उपज बेचने को तैयार हो जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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