मोहनखेड़ा, धनंजय प्रताप सिंह। मोहनखेड़ा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अभा प्रचारकों के चौथे दिन हुए मंथन में तय किया गया कि विद्या भारती व वनवासी परिषद की तरह सरकारी स्कूलों में भी संघ विचारधारा और संस्कारों की शिक्षा दी जाए। देश भक्ति व राष्ट्रवाद के विषय जोड़े जाएं। '' विचारधारा, शिक्षा और संस्कृति '' विषय के सत्र में संघ विचारकों ने कहा कि शिक्षा के व्यवसायीकरण के बजाय शिक्षा का भारतीयकरण करने की जरुरत है।

संघ प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में हो रही बैठक में सभी अनुषांगिक संगठनों के अ.भा. स्तर के संगठन महामंत्री शामिल हुए। शनिवार को विद्या भारती, सेवा भारती, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले संघ के अन्य संगठनों के प्रचारकों ने शिक्षा की भावी रणनीति पर विचार किया। सर कार्यवाह भैयाजी जोशी की उपस्थिति में प्रचारकों ने जोर दिया कि अब देश में भाजपा की सरकार बन गई है। इसलिए बदलाव की शुरुआत शिक्षा के क्षेत्र से होनी चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि मैकाले की शिक्षा पद्धति को बदलकर भारतीय शिक्षा पद्धति को लागू किया जाना चाहिए। एबीवीपी की ओर से प्रस्ताव रखा गया कि शिक्षा का व्यावसायीकरण तत्काल रोककर शिक्षा का भारतीयकरण किया जाए। एबीवीपी की तरफ से राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सुनील अम्बेकर सत्र में शामिल थे।

प्राथमिकता में हिन्दी

संघ प्रचारकों ने सुझाव दिया कि शिक्षा के साथ-साथ विभागीय कामकाज में भी हिंदी को बढ़ावा दिया जाए। उच्च शिक्षा और तकनीकि शिक्षा को भारत केंद्रित बनाया जाना चाहिए। इसी तरह संस्कृति के विषयों को भी अनुसंधान के साथ पाठ्यक्रम में जोड़े जाने पर विचार विमर्श किया गया। संघ की चिंतन बैठक में अंग्रेजी स्कूल और बोर्डिंग स्कूलों के विकल्प के रूप में उसी स्तर के हिंदी भाषी सरकारी स्कूल खोले जाने का विचार भी बैठक में रखा गया।

अब मिशन जम्मू-कश्मीर

बैठक में गैर राजनीतिक विषयों के साथ राजनीतिक सत्र भी हुआ। जिसमें कुछ राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई। खासतौर से महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे कांग्रेस शासित राज्यों की चुनावी रणनीति को लेकर मंथन किया गया। दोनों ही राज्यों में मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी की घोषणा करने को लेकर चर्चा हुई।

राजनीतिक सत्र में 'मिशन जम्मू-कश्मीर' का लक्ष्य भी तय किया गया। दिग्गजों ने हाल के लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर की छह में से तीन लोकसभा सीटे मिलने पर खासी प्रसन्नता जाहिर की। ये भी तय किया गया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में यहां हर हाल में भाजपा की सरकार बनाना है।

कश्मीर की ऐतिहासिक सफलता के लिए पूर्व में वहां काम करने वाले प्रचारकों खासतौर से इंद्रेशकुमार, सुरेश सोनी और वर्तमान में पदस्थ रमेश पप्पाजी की सेवाओं की सराहना भी की गई। राज्य के विषय में पेश रिपोर्ट में बताया गया कि 87 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा के पास सिर्फ 11 सीटें हैं, लेकिन जिन तीन लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा को विजयी मिली है। उनसे जुड़ी 37 सीटों पर पार्टी जीतने की स्थिति में है। संघ ने माना कि कश्मीर में भाजपा सरकार के बनने से धारा 370 को खत्म किए जाने का रास्ता आसान हो सकता है।

Posted By: