सुसारी/निसरपुर (धार)। डूब में आने वाली सबसे बड़ी आबादी वाले गांव निसरपुर में बसाए गए पांच गांवों के लोगों के घरों तक सालभर में भी बिजली नहीं पहुंच पाई। सरकारी महकमे से गुहार लगाते हुए थक गए तो लोगों ने खुद के केबल डाल लिए, लेकिन डूब ने उसे भी डुबो दिया। अब पूरे इलाके में महीने भर से अंधेरा है।

निसरपुर पुनर्वास स्थल पर गैबीनाथ मठ व कटनेरा टीन शेड के समीप पुनर्वास स्थल बनाया गया है, जहां डूब में आए 5 गांव निसरपुर, करोंदिया, कोठड़ा, मलवाड़ी और मोलखड़ के 70 से अधिक परिवारों को बसाया गया है। 30 बाय 50 के प्लॉट व पुनर्वास पैकेज की राशि का आवंटन 2017 में ही कर दिया गया था। प्रभावितों ने 2018 में मकान बना लिए थे और रहने भी लगे, लेकिन वहां अब तक बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई है, जबकि यह बसाहट निसरपुर जनपद पंचायत भवन से महज एक किमी की दूरी पर है।

...तो कैसे आएगी बिजली

सरदार सरोवर बांध से निसपुर डूब क्षेत्र से यहां लाकर बसाए गए मंशाराम प्रजापत बताते हैं कि साल 2017 में ही मकान का निर्माण कर लिया। बिजली नहीं है। विभाग ने बिजली के पोल लगा दिए, पोल पर केबल भी डाल दी है, लेकिन ट्रांसफॉर्मर नहीं लगाए। ऐसे में बिजली कहां से मिलेगी।

मोबाइल की रोशनी में खाना और पढ़ना

कोठड़ा गांव से लाकर बसाए गए जालिम पिता फूल सिंह कहते हैं कि हम मोबाइल की लाइट में खाना खा रहे हैं। बच्चे भी मोबाइल की लाइट में ही पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ लोगों ने बस्ती से 300 से 400 फीट की केबल खरीदकर निजी रूप से बिजली की व्यवस्था की थी, लेकिन कुछ दिन बाद बारिश में केबल जल गई। अब फिल एक माह से अंधेरा है। पांच दिन में एक बार नल से पानी मिलता है। लिहाजा अब निसरपुर जाकर मोबाइल चार्ज करते हैं और उससे काम चल रहा है।

संभावित खर्च का ब्योरा (एस्टीमेट) दे दिया है

आप जहां की बात कर रहे हो, वहां का एस्टीमेट हमने एनवीडीए के बिजली विभाग को दे दिया है। पुनर्वास में बिजली की व्यवस्था उनकी है।

-जीपी साहू, कार्यपालन यंत्री, विद्युत कंपनी कुक्षी

5 फीसदी राशि मांगी

बस्ती में पोल व केबल लग गई है। ट्रांसफॉर्मर नहीं लगे हैं। उसके लिए विद्युत वितरण कंपनी को 5 प्रतिशत राशि देने का प्रस्ताव भेज रखा है। हमने पुनर्वास स्थल की व्यवस्था विद्युत वितरण कंपनी को हैंडओवर कर दी है। - वीके पारदी, उपयंत्री, एनवीडीए विद्युत व्यवहार प्रभारी