धार(नईदुनिया प्रतिनिधि)। एनआरएलएम स्थित कॉविड केयर सेंटर में कोरोना पॉजिटिव लैब टेक्नीशियन भर्ती है। कोरोना है, लेकिन सोच पॉजिटिव है। वजह है परिवार से बात कर सकारात्मक सोच रखना। सुबह की शुरुआत योग और संगीत से करना। सकारात्मक सोच जल्दी स्वस्थ होने में सबसे अहम रोल निभा रही है।

लैब टेक्नीशियन खाली वक्त में संगीत को दोस्त बनाकर अपना दिन गुजारता है जो उसे सकारात्मक सोच के साथ ही मानसिक रूप से मजबूत और मन को शांत करता है। पांच दिन से ज्यादा हो गए हैं। चेहरे पर हमेशा कोरोना महामारी को हराने वाली मुस्कान है। इस मुस्कान के पीछे परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों की बातें हैं जो चेहरे की मुस्कुराहट को हमेशा बनाए रखती हैं। कुछ दिन कोविड केयर सेंटर में भर्ती रहने के बाद स्वास्थ्य बेहतर होने पर अब सोमवार से होम आइसोलेशन में चला गए हैं। उम्मीद है कि कुछ दिनों में स्वस्थ होकर अपने काम पर लौट जाएंगे। यह कहानी मनावर क्षेत्र के रहने वाले 25 साल के लैब टेक्नीशियन की है, जो जिला अस्पताल में अपनी ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए थे।

उनके साथ भर्ती आयुष डॉक्टर भी स्वस्थ हो रहे हैं और खाली समय होने पर वह संगीत को अपना साथी बनाते हैं। अपना मनपसंद गीत सुन कर खुद को सकारात्मक सोच के साथ खुश रखते हैं। संगीत और पॉजिटिव सोच की यह जोड़ी उन्हें स्वस्थ कर रही है।

एकलव्य कोविड केयर सेंटर में ज्यादातर मरीज मोबाइल पर संगीत सुनकर और योग कर अपना दिन बिताते हैं। हमेशा मन को शांत और सकारात्मक रखते हैं। साथ ही मोबाइल उनका साथ निभाता है और अपने परिवारों से जब बात करते हैं तो उनके चेहरे पर कोरोना का तनाव दूर हो जाता है। वह मुस्कुरा उठते हैं।

योग भी मददगार

कोविड केयर सेंटर में सुबह योग भी लोगों के लिए मददगार साबित हो रहा है। कई लोग योग कर अपने आपको दिन भर ऊर्जावान रख रहे हैं। हालांकि कुछ बुजुर्ग योग से दूर हैं, लेकिन ज्यादातर युवा योग को अपना रहे हैं।

अनजान हो जाते हैं दोस्त

सेंटर में संक्रमित मरीज अकेला भर्ती होता है। यहां इनके संक्रमित साथी एक दूसरे से बात कर अपना समय बिताते हैं। कई बार इन बीच उनकी दोस्ती हो जाती है और लोग स्वस्थ होकर साथ-साथ घर जाते हैं।

डॉक्टरों की सलाह

कॉविड केयर सेंटर के डॉ. शोएब खान ने बताया कि सेंटर में करीब 50 से ज्यादा कोरोना संक्रमित भर्ती हैं। इसमें ज्यादातर लोग सुबह उठकर योग का सहारा लेते हैं। योग से स्वास्थ्य को फायदा होता है। उसे जीवन में स्वस्थ होने के बाद भी लगातार आगे बढ़ाना चाहिए।

आयुष के नोडल अधिकारी डॉक्टर नरेंद्र नागर ने बताया कि मुख्य रूप से अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी सहित अन्य योग सुबह के समय मरीज केयर सेंटर में कर रहे हैं। उन्हें रोज योगासनों के बारे में बताया जाता है। योग से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। ऑक्सीजन सैचुरेशन बढ़ता है। रक्त का प्रवाह भी सही रहता है। आदमी तनाव से मुक्त होकर स्वस्थ जीवन की तरफ बढ़ता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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