कपिल पारिख

मांडू।

देशभर के विद्यार्थी आने वाले दिनों में मांडू आकर यहां की संस्कृति, इतिहास और स्थापत्य कला को बारीकी से निहारेंगे और प्राचीन वैभव से परिचित होंगे। इसे लेकर यहां विशेष तौर पर तैयारियों की बात सामने आ रही है कि जब देश के कोने-कोने से विद्यार्थी यहां आए, तो सुविधाओं के साथ सही इतिहास से रूबरू हो सके। इसे लेकर प्रशासन ने भी कार्य योजना बनाने की बात कही है। नई शिक्षा नीति लागू होते ही देशभर के विद्यार्थियों का मांडू दर्शन के लिए आना शुरू हो जाएगा।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को पर्यटन से जोड़कर देश की प्राचीन कला, संस्कृति, धर्म व इतिहास के साथ समृद्घता से भरे कई छुए-अनछुए पहलुओं से रूबरू कराना है। देश में शिक्षा विभाग और पर्यटन विभाग ने 100 प्राचीन पर्यटन स्थलों का चयन किया है। इसमें मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल मांडू को भी शामिल होने का गौरव प्राप्त हुआ है। ऐसे में अब यहां सुविधा और व्यवस्थाओं को लेकर तत्परता दिखाने की जरूरत शासन-प्रशासन को है। मध्यप्रदेश का यह ऐतिहासिक पर्यटन स्थल विश्व विरासत स्थल बनने की दहलीज पर खड़ा है। यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत की संभावित सूची में मांडू को शामिल कर लिया गया है। इसके पहले देश के 25 आदर्श स्मारकों में मांडू के ऐतिहासिक जहाज महल को शामिल किया गया है। अब सौ चयनित स्थानों में नाम आने से मांडू में पर्यटन को लेकर संभावनाएं बढ़ गई हैं। कोरोना काल में यहां पर्यटन का ग्राफ भी औंधे मुंह गिरा है। उससे भी कुछ राहत मिलने की उम्मीद बंधी है।

शोध केंद्र है मांडू

मांडू आज भी शोध केंद्र के रूप में माना जाता है। यहां का इतिहास, जल संरचना, संस्कृति और वास्तु कला पर भारत के साथ विदेशी विज्ञानी शोध कर चुके हैं। इस निर्णय के पहले भी देशभर के विद्यार्थी यहां आते रहे हैं। यह एक ऐसा पर्यटन स्थल है, जहां इतिहास, धर्म, संस्कृति, वास्तु कला, नैसर्गिक सौंदर्य और युद्घों के इतिहास का बिरला संगम देखने को मिलता है। लगभग पांचवीं शताब्दी से मांडू के इतिहास की जानकारी मिलती है। यहां परमार, खिलजी, सुल्तान, बादशाह, मराठा, मुगलों और अंग्रेजों ने वर्षों राज किया है, जिनके प्रामाणिक इतिहास यहां मौजूद थे।

घरेलू पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

राष्ट्रीय स्तर पर मांडू को लेकर मिली इस उपलब्धि से यहां घरेलू पर्यटन को बढावा मिलेगा। वर्ष में लगभग छह से आठ लाख पर्यटक आते हैं। अगर देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों का यहां वर्षभर आवागमन लगा रहा, तो पर्यटन के ग्राफ में बढोतरी होगी। साथ ही पर्यटन से जुडे व्यावसायियों को भी काफी फायदा मिलने की उम्मीद है। मांडू का नाम और यहां की संस्कृति दूसरे राज्यों में भी शीघ्रता के साथ पहुंचेगी। इससे भारत सरकार के एक भारत, श्रेष्ठ भारत अभियान को सहयोग मिलेगा।

एजुकेशन थिएटर खोल एक्सपोर्ट नियुक्त करें प्रशासन

इस विषय में नईदुनिया से विशेष चर्चा करते शोधकर्ता विनायक साकले ने कहा कि अब इस निर्णय के बाद देशभर के विद्यार्थी यहां पहुंचेंगे। प्रशासन को यहां एक सर्वसुविधायुक्त एजुकेशन थिएटर खोलना चाहिए, जहां मांडू के इतिहास के सभी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के साथ यहां की कला संस्कृति की जानकारी विद्यार्थियों को मिल सके। इतनी ऊंचाइयों पर बिना नींव की पत्थरों से बनी ऐतिहासिक इमारतों की प्राचीन इंजीनियरिंग यहां अलग-अलग कालों की वास्तुकला, अद्भुत जल संरचनाएं, धार्मिक इतिहास की जानकारी के साथ वाइल्ड लाइफ से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी विद्यार्थियों को दी जानी चाहिए।

मांडू के लिए उपलब्धि, कार्ययोजना बनाएंगे

यह मांडू के लिए उपलब्धि है। जब देशभर के विद्यार्थियों पहुंचे, तो उन्हें सही दिशा में जानकारियां मिले और वह संतुष्ट होकर यहां से जाए। इस विषय में पूरी कार्ययोजना बनाकर काम किया जाएगा। -डा. पंकज जैन, कलेक्टर धार

Posted By: Nai Dunia News Network

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