- कोरोना इफेक्टः स्कूल संचालकों से लेकर शिक्षक तक परेशान, शासन नहीं कर पा रहा कोई समाधान

राजगढ़ (नईदुनिया न्यूज)। कोरोना महामारी भले ही देश में अब धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है, लेकिन इसका व्यापक असर शिक्षा व्यवस्था पर हुआ है। सरकार की अनदेखी के चलते निजी विद्यालयों के हजारों शिक्षकों ने अब नौकरी से मुंह मोड़ लिया है। इसका असर वर्तमान में तो नजर नहीं आ रहा है, लेकिन स्कूल खुलने के बाद स्कूल संचालकों सहित विद्यार्थियों को शिक्षक नहीं होने की वजह से मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक धार जिले के ही कई निजी स्कूलों से करीब 250 से अधिक शिक्षकों ने मुंह मोड़ लिया है। मार्च के बाद से ही स्कूलों के लगातार बंद रहने की वजह से कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। राजगढ़ की ही बात की जाए, तो यहां से कई शिक्षक परिवारों को पलायन करना पड़ गया है। कोई अपने गांव वापस जा चुका है, तो कोई दूसरे शहर में नौकरी की तलाश में यहां-वहां भटक रहा है। विडंबना यह है कि बार-बार आग्रह करने के बाद भी शासन स्तर से किसी भी तरह की मदद निजी विद्यालय के शिक्षकों को नहीं मिल पाई थी।

कई शिक्षक नहीं भर पाए तीन महीने का किराया

लॉकडाउन और कोरोना की वजह से अधिकांश शिक्षकों को वेतन नहीं मिल पाया है। ऐसे में वे पिछले तीन महीने का किराया नहीं भर पाए। यहां तक कई परिवारों के सामने राशन का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में शिक्षकों के सामने सिर्फ और सिर्फ शहर और स्कूल छोड़कर अन्यत्र जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा।

स्कूल प्रबंधन भी नहीं कर पा रहे मदद

शिक्षक बताते हैं कि स्कूल प्रंबधन ऐसे गंभीर समय में मदद नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि यह बात अलग है कि शिक्षकों को स्कूल प्रबंधन से किसी प्रकार की शिकायत नहीं है, क्योंकि स्कूलों में भी पालक शुल्क जमा नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उनके पास भी शिक्षकों को वेतन देने के लिए रुपया नहीं है।

...तो करना पड़ेगा तकलीफों का सामना

गौरतलब है कि शिक्षकों की कमी से पहले ही कई स्कूलों में परेशानी होती है। अब कोरोना काल की वजह से कई शिक्षक अन्य स्थानों पर चले गए हैं। ऐसे में जब भी स्कूल खुलेंगे, तो शिक्षकों की कमी का सामना हर स्कूल को करना पड़ सकता है। फिर से शिक्षकों की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगी। संचालकों का कहना है कि जब लॉकडाउन में हर किसी को आजादी दी जा चुकी है, तो फिर शासन स्कूलों से पाबंदी क्यों नहीं हटाता है।

हर कोई ढूंढने में जुटा है विकल्प

एक शिक्षक ने कहा कि अधिकांश निजी विद्यालय के शिक्षक अब विकल्प ढूंढने में लगे हैं। कई शिक्षकों का कहना है कि कोरोना ने यह सिखा दिया है कि जब तक आप काम करेंगे, तब तक ही आपको पैसा मिलेगा। ऐसे में अब कोई ऐसा विकल्प जरूर तलाशना होगा, जिससे काम भी चलता रहे और पैसा भी मिलता रहे।

यह बात सही है कि शिक्षक परेशान हैं, लेकिन उनके साथ ही स्कूल संचालक भी त्रस्त हैं। शासन किसी प्रकार से स्कूल खुलने की स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है। हमने शिक्षक साथियों के लिए कई बार शासन को पत्र लिखे है कि पैकेज दिया जाए, ताकि उनकी थोड़ी ही सही, लेकिन मदद हो सके। शासन की तरफ से कुछ भी स्पष्ट नहीं होने से तकलीफें बढ़ने लगी हैं।

-सुशील कुमार जैन, तहसील अध्यक्ष, मप्र प्रांतीय अशसकीय शिक्षण संस्था संघ, सरदारपुर

हमारे शिक्षक साथियों के सामने इस तरह का वक्त कभी नहीं आया था। अब कई शिक्षक मजबूरी में स्कूल छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। हमारा संगठन लगातार प्रयास कर रहा है कि शासन से शिक्षकों को कोई मदद मिल सके। यह सही है कि कई शिक्षकों ने स्कूल बंद होने की वजह से नौकरी छोड़ी है।

-राहुल व्यास, जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय अशासकीय शिक्षक संगठन, धार

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Posted By: Nai Dunia News Network

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