धार (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नर्मदा साहित्य मंथन-भोजपर्व का शुभारंभ रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर की उपस्थिति में मां नर्मदा के जल कलश के पूजन के साथ हुआ। इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह भी वक्ता के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने कहा कि चीन एक ऐसा देश है जिस पर कभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता। चीन ने हमेशा धोखा ही दिया है। जो भी संधियां भारत और चीन के बीच में हुई, उसको लेकर विश्वास पर ही आगे बढ़ा जा सकता है। लेकिन चीन ने हमेशा भरोसा तोड़ा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष हर्ष चौहान सहित अन्य वक्ताओं ने यहां पर अपनी बात रखी।

राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करना महान

साहित्य मंथन के प्रथम सत्र में उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने आंतरिक सुरक्षा, चुनौतियों एवं समाधान विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करना एक महान कार्य है। आज जहां लोग अपने परिवार से बाहर नहीं सोच पा रहे ऐसी स्थिति में जब युवा, साहित्यकार और विचारक साहित्य मंथन जैसे आयोजनों के माध्यम से राष्ट्र की सुरक्षा जैसे विषयों से जुड़ता है तो मुझे विश्वास हैं उस देश का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

भारत के लोगों को शक्ति पहचानना है

गलवान घाटी हमले के बाद जिस प्रकार पूरे देश ने एकजुटता दिखाई है, वह प्रशंसा और गर्व करने लायक़ है। भारत का बार्डर को लेकर क्लियर कॉन्सेप्ट हैं कि मेकमोहन रेखा तक देश हमारा है। भारत के लोगों को अपनी शक्ति को पहचानना होगा। पूरा विश्व जानता है कि हम आत्मविश्वास से भरी शक्ति हैं परन्तु दुर्भाग्य है कि हम अपने ऊपर ही विश्वास नहीं करते।

समाज के सामने चुनौतियां बहुत

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से बार्डर एरिया में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है। वह हमारी सेना के मनोबल को और ऊंचा उठाने का कार्य कर रहा है। अंत में उन्होंने कहा कि समाज के सामने चुनौतियां बहुत हैं और उसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सैनिक बनना होगा। वर्तमान में हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन है। उन्होंने उपस्थित सभी विचारकों से इस विषय में अध्ययन करने और उसके बारे में चिंतन करने का आग्रह किया।

राजा भोज की शासन व्यवस्था सीखने की आवश्यकता

इस अवसर पर नर्मदा साहित्य मंथन के संयोजक डा. मुकेश मोढ़ एवं मध्य प्रदेश शासन की संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर भी उपस्थित रही। सुनील आम्बेकर ने कहा कि राजा भोज के सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्वावलंबन और स्व के लिए गौरव समाज में स्थापित हुआ है। राजा भोज के वास्तुशिल्प पर स्थापित किए गए मानक आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि राज्य व्यवस्था के संचालन के लिए राजा भोज की शासन व्यवस्था से सीखने की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि के लिए उन्नत तकनीक विकास का भी कार्य किया। उन्होंने कहा कि हमारा अतीत गौरवशाली रहा है परंतु हमें उसे षड्यंत्रपूर्वक नहीं पढ़ाया गया। हमें उसे पढ़ने और उस पर अभिमान करने के साथ- साथ भविष्य का भारत गढ़ने में उसका उपयोग करना चाहिए। वेदों में राष्ट्र की आराधना का उल्लेख मिलता है।

लंदन में मां वाग्देवी की प्रतिमा

राष्ट्र हम सब के लिए प्रथम होना चाहिए। राजा भोज पर आधारित जागृत मालवा मासिक पत्रिका के विशेषांक का विमोचन किया गया। उद्घाटन सत्र में संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि पुराने ग़लत साहित्य को उखाड़ फेंकने और वास्तविक साहित्य को स्थापित करने में साहित्य मंथन जैसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। साहित्य अकादमी और मध्यप्रदेश शासन वास्तविक और गौरवशाली इतिहास को स्थापित करने और मां वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन से वापस भारत लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

230 से अधिक स्कूलों के नाम क्रांतिकारियों के नाम पर

उन्होंने कहा कि मैंने स्वयं 6 माह भोजशाला आंदोलन के दौरान गांव- गांव जाकर कार्य किया था। महू के 230 से अधिक विद्यालयों के नाम क्रांतिकारियों के नाम पर रखे जा चुके हैं। हम प्रयास कर रहे हैं कि विद्यालयों में प्रतिदिन 5 मिनट विद्यार्थियों के बीच क्रांतिकारियों एवं महापुरुषों का जीवन परिचय रखा जाएगा।

मतांतरण करने वालों को आरक्षण का लाभ न मिले

तृतीय सत्र के वक्ता राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष हर्ष चौहान रहे। उन्होंने मालवा प्रांत के जनजातीय विमर्श विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हम आदिवासियों के बारे में सिर्फ उतना जानते हैं जो हमें किताबों के माध्यम से पढाया गया है। यदि उनके बारे में गहन अध्ययन करना हो तो ये उनके बीच जाकर काम करने से ही समझा जा सकता हैं। अब तक आदिवासियों के बारे में जो रिसर्च किए गए हैं वो अंगेजों द्वारा ही किए गए हैं। शोध की आवश्यकता को देखते हुए आयोग ने इस बार 104 यूनिवर्सिटी में जनजातीय रिसर्च को लेकर कार्यक्रम किए हैं , जिससे आदिवासी समाज को निकट से जानने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि मतांतरण करने वाले लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यह इसलिए आवश्यक हैं क्योंकि धर्मं बदलने पर संस्कृति का संरक्षण नहीं हो पाता एवं आरक्षण सिर्फ संस्कृति के संरक्षण के लिए हैं। सत्र संचालन डा. उत्तम मीना ने किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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