Vasant Panchami 2023: प्रेम विजय पाटिल, धार। मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में राजा भोज ने सरस्वती की आराधना के साथ ही ज्ञान के प्रसार के लिए बड़े स्तर पर सोच के साथ कार्य किया था। उन्होंने भोजशाला में पत्थरों पर महत्वपूर्ण ज्ञान और जानकारियां अंकित करवाई थीं। यह कम लोगों को पता है कि बच्चों को पत्थर पर लिखी संस्कृत की पांडुलिपि के माध्यम से पढ़ाई करवाई जाती थी। इसे वे कंठस्थ करते थे। मानवीयता के ज्ञान के लिए जो भी शिक्षण आवश्यक होता था, वह ऐतिहासिक भोजशाला में दिया जाता था। अहम बात यह है कि आज मां सरस्वती की मूर्ति लंदन में कैद है। उसे यहां लाया जाना चाहिए।

मूर्ति को अंग्रेज अपने साथ ले गए

राजा भोज के काल में भोजशाला में स्थापित मूर्ति अंग्रेज अपने साथ ले गए। भोजशाला की सार्थकता तभी है, जब यहां मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित हो। हम इस दिशा में हम काम कर रहे हैं। यह बात पुरातत्वविद एवं भारतीय पुरातत्व संस्थान के पूर्व निदेशक डा. धर्मवीर शर्मा ने ’नईदुनिया‘ से चर्चा में कही। उन्होंने कहा कि हमारा शब्द ही ब्रह्म है। वाणी ईश्वर का स्वरूप है। इसे चेतन करने के लिए मां सरस्वती की उपासना की जाती है। भोजशाला वास्तव में विश्वविद्यालय हुआ करती थी। इस स्थान की लोकप्रियता देश और दुनिया में थी। यहां पर 64 कलाओं का शिक्षण दिया जाता था। इसमें वास्तु, अर्थशास्त्र, विमान शास्त्र से लेकर कई महत्वपूर्ण विषयों पर बच्चे अध्ययन करते थे।

मां सरस्वती के उपासक थे राजा भोज

राजा भोज मां सरस्वती के उपासक थे। उन्होंने इस बात को समझ लिया था कि मां सरस्वती की उपासना के माध्यम से ही हजारों ऐसे बच्चे तैयार किए जा सकते हैं, जो देश के निर्माण में महत्वपूर्ण साबित होंगे। आज से भोज महोत्सव महाराजा भोज स्मृति बसंत उत्सव समिति द्वारा तीन दिवसीय भोज महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत गुरुवार सुबह 11 बजे शोभायात्रा निकाली जाएगी। दोपहर 12:30 बजे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचार के मुख्य आतिथ्य में धर्म सभा होगी। विशेष अतिथि राज्य सभा सदस्य डा. सुमेर सिंह सोलंकी हैं।

28 जनवरी को होगा कवि सम्मेलन

दोपहर में आरती की जाएगी। शुक्रवार को दोपहर में भोजशाला में नमाज अदा की जाएगी। इस दिन कड़ी सुरक्षा रहेगी। दोपहर तीन बजे संत सिया भारती के मुख्य अतिथि में मातृशक्ति सम्मेलन का होगा। साथ ही इस दिन रात में बाबा खाटू श्याम की भजन निशा होगी। 28 जनवरी को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन होगा। 31 जनवरी को नियमित सत्याग्रह का आयोजन कर कन्या पूजन के साथ में भोज महोत्सव का समापन होगा।

Posted By: Prashant Pandey

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