वीडियो वायरल होने पर मामला आया सामने, 25 जून को हुए पंचायत चुनाव में पिछड़ने पर पूर्व सरपंच ग्रामीणों से रुपये वापस मांगने पहुंचा, मतदाताओं ने उसके कार्यकाल की गलतियां गिना दीं

जय तापड़िया, बाग। धार जिले के बाग विकासखंड की ग्राम पंचायत पीपरी में मतदाता जागरूकता का उदाहरण सामने आया है। ग्रामीणों ने मत का महत्व समझते हुए सकारात्मक सोच के साथ पंचायत चुनाव में भागीदारी की। इस आदिवासी क्षेत्र में सरपंच पद के एक प्रत्याशी से मतदाताओं ने नोट तो ले लिए, लेकिन वोट अपनी मर्जी से ही डाला। उक्त प्रत्याशी पूर्व में सरपंच रह चुका है। 25 जून को मतगणना में जब वह प्रतिद्वंद्वी से पिछड़ गया तो अपने रुपये वापस मांगने ग्रामीणों के बीच पहुंच गया। इस पर जागरूक मतदाताओं ने उसके कार्यकाल में लोगों की उपेक्षा का आरोप लगाया और विभिन्न गलतियां गिनाईं।

यह पूरा मामला एक वीडियो के इंटरनेट मीडिया पर देखे जाने के बाद सामने आया है। इसमें पंचायत चुनाव में पिछड़ा प्रत्याशी मतदाताओं से अपने नोट वापस मांगने पहुंचा। गांव में चौपाल लगी, जिसका किसी ने वीडियो बना लिया। इसमें कई मुद्दों पर चर्चा हकीकत के ईर्द-गिर्द रही। चौपाल पर आदिवासी युवा मतदाताओं के साथ बुजुर्गों ने पंचायत चुनाव में पिछड़े पूर्व सरपंच को खरी-खोटी सुनाई। गांव की सरकार को लेकर भीली बोली और हिंदी में रोचक बातचीत ग्रामीणों की स्थिति दर्शाता है।

वोट के बदले नोट नहीं लिए, खर्च के लिए दिए थे

मतदाताओं का कहना था कि हमने वोट के बदले नोट नहीं लिए, हमें खर्च करने के लिए 500-500 रुपये दिए गए थे, जो हमने खर्च कर दिए। इस पर पूर्व सरपंच बोला कि मैंने इधर वोट, इधर नोट करके दिए, ऐसे खाने के लिए नहीं दिए। तब आदिवासी युवक बोल पड़ा कि निर्वाचन में कोई वोट नहीं खरीद सकता। साथ ही हिदायत दी कि समझदार होकर वोट के लिए नोट क्यों बांटते हो।

पांच साल सरपंच रहे, हमें पांच दिन मजदूरी नहीं मिली

ग्रामीणों ने प्रत्याशी से कहा कि तुम्हें सरपंच इसलिए बनाया गया था कि गांव में काम आएगा तो हमें मजदूरी मिलेगी। लाकडाउन में मेड़ बंधान के लिए काम आया था, वह तुमने गायब कर दिया। तुम पांच साल सरपंच रहे, हमें पांच दिन मजदूरी नहीं मिली। एक ग्रामीण बोला- जेसीबी से आपने काम करवाया है। तब मैंने काम मांगा था तो आपने कहा कि पूरी दुनिया में जेसीबी से काम हो रहा है। युवा आक्रोशित होकर बोलता है कि फिर आज हमारी क्या जरूरत, मशीन से वोटिंग करवा लो।

अपने बारे में सोचता है, गांव का विकास नहीं करता

ग्रामीण पूछ बैठे कि सरपंच को सैलरी क्या मिलती है। इस पर पूर्व सरपंच यह नहीं बताता है बल्कि उन्हीं से प्रश्न करता है कि तुम बताओ। ग्रामीण बोलते हैं कि तुम सरपंच रहे हो तो तुम बताओ। इस बीच एक ग्रामीण ने कहा कि किसी को भी सरपंच बनाओ, वह अपना मकान बनाता है, ट्रैक्टर खरीदता है, पहले परिवार की सोचता है। कोई जनता और गांव का विकास नहीं करता है। पैसे तो नहीं मिलेंगे, आपने खर्चा करने दिया, खर्चा हो गया। अब पुलिस थाने जाओ और शिकायत करो कि मैंने नोट दिए और वोट नहीं मिले।

लोकतंत्र के लिए अच्छी बात

इस बाबद कोई शिकायत नहीं मिली। अच्छी बात तो यह है कि लोकतंत्र में मतदाता पैसे से नहीं बिकता है। चूंकि वीडियो निर्वाचन के बाद आया और इसे लेकर कोई नामजद शिकायत भी नहीं की गई है।

-जागरसिंह रावत, रिटर्निंग आफिसर, जनपद पंचायत, बाग

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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