डिंडौरी/गोरखजपुर (नईदुनिया न्यूज)। विकासखंड करंजिया अंतर्गत कस्बा गोरखपुर समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में पिछले दो दिन से आसमान पर काले बादलों की आमद ने एक बार फिर अन्नदाताओं को चिंतित कर दिया हैं। बुधवार की देर शाम कस्बा सहित आसपास के हिस्सों में बूंदाबांदी और गुरुवार को दिन भर बारिश के आसार बनते रहें हैं। किसान लगातार मौसम में परिवर्तन तथा कोरोना वायरस के कारण मजदूर नहीं मिलने से फसलों की कटाई को लेकर अधिक चिंता कर रहे हैं। फिलहाल उनके ऊपर दोहरी मार पड़ रही है। आलम यह है कि फसलें खेतों में पककर कटने के लिए तैयार खड़ी है, लेकिन कोरोना के कहर से डरे ग्रामीण घरों से बाहर नहीं निकल रहे। जबकि खेत मालिकों ने अधिक राशि देने के लिए कहा है। बावजूद श्रमिक घर में सुरक्षित रहना पसंद कर रहे हैं। इस लिहाज से खेती पिछड़ रही है और अन्नदाता परेशान होने मजबूर हैं। आमतौर पर किसानों की फसलों की कटाई की समस्या आम दिनों में नहीं होती थी क्योंकि इस सीजन में पंजाब से हार्वेस्टर आ जाते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते वो भी नहीं आ पा रहे हैं। यही कारण है कि दिन-रात एक कर कृषक वर्ग खेती के काम से छुटकारा पाना चाहता है, लेकिन आए दिन मौसम की बेरुखी के चलते किसान बेबस हैं। खासकर क्षेत्र के बडे किसान पशोपेश में हैं।

परिवार के साथ काट रहे फसल : बंजर टोला के किसान धनीराम परस्ते ने बताया कि उसने अपनी फसलों को काटने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ी है। ज्यादा पैसा देने पर भी फसल की कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। सभी कोरोना वायरस नामक बीमारी से डरे हुए हैं। वे तो स्वयं के परिवार के साथ रात दिन एककर फसलों की कटाई किए हैं। अब तो धूप तेज होती जा रही है। दूसरे इस बीमारी का भय इस बार खेती को काफी प्रभावित किया हैं। किसान श्याम सुंदर तेकाम ने बताया कि लॉकडाउन के कारण गेहूं फसल की कटाई के लिए भटक रहे हैं। फसल पककर खेतों में तैयार खड़ी है। गर्मी बढ़ने तथा तेज हवा चलने से गेहूं की बालियों के दाने में चटकने लगे हैं। इसलिए समय पर फसल कटना जरूरी है, लेकिन लॉकडाउन के कारण मजदूरों के कमी और हार्वेस्ट मशीन नहीं आने की वजह से गंभीर समस्या बन गई हैं।

फसल सूखकर झड़ने लगी : किसान श्याम सुंदर ने बताया कि खेत का गेहूं दस दिन पहले कट जाना था, लेकिन अभी तक शुरुआत नहीं कर पाया हूं। फसल सूख कर झड़ने लगी है। बालियों को भी नुकसान पहुंच रहा है। घर में ज्यादा सदस्य होते तो फसल को खुद काट लेते, लेकिन सीमित परिवार के कारण कटाई कार्य प्रभावित हैं। मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं और आगामी दिनों में जो सबसे परेशानी वाली बात सामने आने वाली है वह यह हैं कि जिन किसानों की फसल कटाई के बाद दाना घर पहुंच जाएगा, वे अपने अपने पशुओं को आवारा छोड़ देंगे। ये आवारा जानवर खेत की फसल चट कर जाएंगे। ये सब सोच-सोच के किसानों का बुरा हाल है। मेरी तरह कई किसान फसलों की कटाई के लिए मजदूरों की तलाश में भटक रहे हैं।

मौसम बना दगाबाज : समूचे क्षेत्र में किसान गेहूं की खेती बडे पैमाने पर करते हैं। माना जाता हैं कि गेहूं के पैदावार के लिए यहां की जमीन उपजाऊ हैं, इसलिए हजारों हेक्टेयर में गेहूं फसल बोई गई हैं। ताजा स्थिति में खेतों में गेहूं की फसल पककर तैयार खड़ी हैं, लेकिन उसे काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि पिछले दिनों हुई बेमौसम बरसात से पहले ही फसल को काफी नुकसान पहुंचा। अब समय से कटाई नहीं होने से फसल को और नुकसान पहुंचने की आशंका है। पंजाब से हर साल गेहूं कटाई के लिए काफी संख्या में मशीनें आती थी, लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण नहीं आ पाई। इन हालात में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल के अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक भी कटने के आसार नहीं दिख रहे हैं। इसे लेकर किसान खासे परेशान हैं, जबकि हर साल मार्च के अंतिम सप्ताह में गेहूं कटाई का कार्य प्रारंभ हो जाता था, लेकिन कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन लगने से कटाई शुरू नहीं हो सकी हैं। किसानों ने बताया कि 15 अप्रैल तक खेती का कार्य समापन पर आ जाता हैं

मवेशियों के लिए भूसा भी बनाना है

मजूदर नहीं मिलने कारण अब किसान गेहूं की फसल की कटाई स्वंय कर रहें हैं, लेकिन समय पर कृषि कार्य नहीं हो पा रहा हैं। फसल कटने के बाद बचे अवशेषों से मवेशियों के चारा भूसा को भी बनवाना है। किसान मौसम की बेरुखी के असर से चारों तरफ से परेशान हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान होते दिखाई नहीं दे रहा हैं। कस्बा के किसानों की मानें तो फिलहाल कृषि कार्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। रबी सीजन की फसल खेतों में कटने के लिए लगभग तैयार खडी हैं, लेकिन आए दिन मौसम में बदलाव के कारण किसान वर्ग समय पर कटाई मिसाई नहीं कर पा रहा हैं। कुल मिलाकर पूर्ण रूप से कृषि कार्य प्रभावित हो रहा हैं। अभी बीतें दिनों की बारिश से भीगी फसल को मुश्किल से सुखाया था। अब फिर बारिश के असर बन रहे हैं। फसलों को व्यस्थित करें या कटाई करें, इस बात से किसान दुविधा में हैं। किसान दीपक तेकाम ने बताया कि उसने चने की फसल को काटकर खलिहान में रखा है, लेकिन काले बादलों और कोरोना के डर से मिसाई नहीं कर पा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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