डिंडौरी गोरखपुर (नईदुनिया न्यूज)। विकासखंड करंजिया अंतर्गत कस्बा गोरखपुर से तीन किमी दूर नर्मदा सिवनी नदी संगम तट पर श्रीराधाकृष्ण मंदिर के प्रांगण में चल रही श्रीमद् भागवत कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंगलवार की कथा में कथावाचक अवनीश महराज ने बताया कि गज का पैर ग्राह ने जैसे ही पकडा उसने तुरंत सहायता के लिए भगवान को पुकारा। भगवान भी अपने भक्त की पुकार सुनकर बिना एक पल गंवाए सहायता करने को दौडे चले आए। यानि स्वच्छ हृदय से पुकारने पर भगवान फौरन सहायता प्रदान करतें हैं। भक्तों को पुकारने में देरी हो सकती है, लेकिन भगवान को आने में देरी नहीं होती। इसलिए कहा जाता है कि ईश्वर की कृपादृष्टि हमेशा बनी रहें। इसके लिए हमेशा प्रभु का स्मरण करते रहें। उन्होंने वामन भगवान के प्रसंग के माध्यम से दान के महत्त्‌व को बताया। जब राजा बलि का पाप और अत्याचार बढ गया तो भगवान ने प्रतिज्ञा अनुसार वामन अवतार लिया और भगवान राजा बलि के यहां पर पहुंचकर तीन पग भूमि मांगी। राजा ने भगवान को तीन पग जमीन देने का संकल्प लें लिया। प्रभु ने एक पग में जमीन से आसमान नाप लिया और दूसरे पग में पूरा ब्रह्मांड नाप लिया। फिर भी तीन पग पूरा नहीं हो पाया। तब भगवान ने राजा से कहा कि तीसरा पग कहां रखूं तो राजा ने अपना सिर आगे बढा दिया, अर्थात देने वाला दाता हमेशा बडा होता है व मांगने वाला हमेशा छोटा होता। कथावाचन ने कहा कि यदि आपके दरवाजे पर कोई गरीब, असहाय, लाचार आपसे याचना करने आता है कुछ मांगता हैं तो उसे खाली हाथ वापस न करें, बल्कि यथाशक्ति उसकी मदद करें। मंगलवार की कथा को श्रवण करने आसपास के गांवों से सैकडों लोग कथा स्थल पहुंचे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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