डिंडौरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले के प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्यटन स्थल उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। आलम यह है कि लाखों खर्च होने के बाद भी न तो देवनाला की तस्वीर बदली है और न ही नेवसा फाल की। दीपावली पर्व के दौरान बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने पर्यटन स्थल तो पहुंचे, लेकिन उन्हें यहां तक पहुंचने में भी कई चुनौती का सामना करना पड़ा। तत्कालीन कलेक्टर मदन कुमार द्वारा नेवसा फाल और देवनाला के स्थान को विकसित करने की पहल की गई थी। आरईएस विभाग के माध्यम से पर्यटन स्थल तक पहुंच मार्ग सहित अन्य व्यवस्था करने के लिए लाखों रुपये खर्च भी किए गए, लेकिन निर्माण कार्यों में बरती गई मनमानी के चलते स्थित यह है कि लगभग पांच वर्ष बाद ही इन स्थानों में हुए कार्यों के हाल बेहाल हो गए हैं।

मार्ग के हाल-बेहाल : समनापुर विकासखंड अंतर्गत हल्दी करेली के साथ डिंडौरी जनपद के नेवसा फाल व अमरपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बरगा खैरदा में स्थति देवनाला पहुंच मार्ग के भी हाल बेहाल हैं। देवनाला में बनाई गई सीढ़ियां जर्जर हो गई हैं। इसी तरह यहां तक पहुंच मार्ग में जहां बड़े-बड़े गड्ढे हैं, वहीं नीचे भी बुरे हाल हैं। यहां लाखों की लागत से बनाया गया कुआं भी अधूरा पड़ा है। डेम के भी बुरे हाल हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति नेवसा फाल की है। यहां लाखों की लागत से बनाई गई सड़क जहां बदहाल हो गई है, वहीं मंदिर के आसपास की जगह भी बदहाल है।

सामुदायिक भवन की खिड़कियां गायब : पर्यटन स्थल देवनाला के पास लाखों की लागत से बनाया गया सामुदायिक भवन के हाल बेहाल हैं। सामुदायिक भवन की स्थिति यह है कि यहां लगे दरवाजे जहां जर्जर हो गए हैं, वहीं कुछ खिड़कियां भी गायब हो गई हैं। भवन के अंदर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। यहां आने वाले पर्यटकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि इन दिनों पर्यटन स्थल आने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में सामुदायिक भवन सहित अन्य स्थानों की ऐसी स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।

लंबे समय से विकसित करने की मांग : जिले में दर्जनों प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थान हैं लेकिन शासन प्रशासन की उपेक्षा के चलते यह स्थान विकसित नहीं हो पा रहे हैं। लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए यह बेहतर पहल हो सकती है, लेकिन लोगों का आरोप है कि इस ओर कोई पहल नहीं हो पा रही है। देवनाला, नेवसा फाल में आकर्षक झरने होने के साथ हल्दी करेली में भी नक्काशीदार पत्थर नदी में हैं। यहां आवागमन मार्ग के साथ अन्य व्यवस्था करने से जहां पर्यटक बढ़ेंगे, वहीं ग्रामीणों को भी स्वरोजगार से जोड़ने का मौका मिल सकेगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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