शहपुरा (नईदुनिया न्यूज)। जिले के शहपुरा विकासखंड अंतर्गत मानिकपुर गांव में श्रद्घालुओं ने कांवड यात्रा निकाली। यात्रा में मानिकपुर से 30 लोग कन्हैया संगम मालपुर के लिए रवाना हुए। सभी ने नर्मदा नदी में स्नान पूजन कर फिर से मानिकपुर गांव के लिए कांवड यात्रा शुरू की। कांवड यात्रा की शुरुआत मानिकपुर में लक्ष्मी नारायण राय ने की। समाजसेवियों ने केला देकर कावड़ियों का स्वागत किया। ग्राम के लोग कांवड यात्रा में शामिल हुए और धर्म का लाभ लिया। स्वागत के दौरान मुकेश असाटी, रघुनाथ ठाकुर, मानस असाटी, दिलीप यादव, गोलू मरावी, मनोज पांडे, प्रदीप कुमार झारिया, अमजत खान, हप्पू असाटी, मुकेश झारिया, खगेंद्र ठाकुर, राजा राय, कालू असाटी सहित श्रद्घालु उपस्थित रहे।

प्राकृतिक खेती में नहीं होगा रसायनिक उर्वरकों का उपयोग

सब मिशन आन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन आत्मा परियोजना अंतर्गत विकासखंड अमरपुर के ग्राम कचनारी मे उपसंचालक सह परियोजना संचालक आत्मा अश्विनी झारिया के मार्गदर्शन में प्राकृतिक खेती कृषक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कृषकों को प्राकृतिक खेती करने के लिए उन्हें कम बजट में ज्यादा उत्पादन वाली फसलों को लेने की जानकारी दी गई। आत्मा परियोजना के उप परियोजना संचालक आत्मा एएस उइके व विकासखंड तकनीकी प्रबंधक विकास चौधरी ने कहा कि जीरो बजट प्राकृतिक खेती देशी गाय के गोबर व गोमूत्र पर आधारित है। इस पद्घति में महंगे रसायनिक उर्वरक, कीटनाशक, खरपतवार नाशक व फफूंद नाशक की आवश्यकता नहीं होती, जिससे कृषि लागत में कमी आती है। बताया गया कि देश में प्राकृतिक खेती की शुरुआत आंध्रप्रदेश से हुई है। इसके बाद कर्नाटक, हिमाचल और वर्तमान में मध्यप्रदेश खेती में की जा रही है। कार्यक्रम में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एमसी बछेल, ग्राम के किसान मित्र राधेश्याम बनवासी, एलआरपी जयकुमार सहित ग्राम के लगभग तीन दर्जन कृषक उपस्थित रहे। कृषकों के बीच में जीवामृत निर्माण करके दिखाया गया। बताया गया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए जिले के चयनित कृषकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्राकृतिक खेती पूर्णतः रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक व खरपतवार नाशक से मुक्त है। प्राकृतिक खेती में जीवामृत, घन जीवामृत, वीजामृत का उपयोग किया जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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