आशीष शुक्ला, डिंडौरी। कौमी एकता का प्रतीक छह दशक पुराने रामलीला समारोह का मंचन फिर शुरू हो गया है, यह समारोह जिले के लिए सांप्रदायिक एकता का प्रतीक है। रामलीला के मंचन में रजाकत अली मुनि विश्वामित्र सहित अन्य किरदार निभा रहे हैं, वहीं आसिफ खान भगवान परशुराम की भूमिका में खूब तालियां बटोर रहे हैं। इनायत अली बाणासुर और बाली की भूमिका भी निभाते हैं।

रामलीला का मंचन हिंदू-मुस्लिम मिलकर वर्षों से जिले के करंजिया विकासखंड अंतर्गत गोरखपुर कस्बा में करते आ रहे हैं। वर्ष 2018 में मामूली मतभेद के चलते मंचन बंद हो गया था, इस वर्ष समिति के सदस्यों ने आपसी मतभेद को दूर कर मंचन फिर से शुरू करने की पहल की है। इस रामलीला के मंचन की खास बात यह है कि हिंदू के साथ मुस्लिम भी बिना कोई पारिश्रमिक लिए निशुल्क अभिनय छह दशक से करते आ रहे हैं।

कलाकारों के साथ दर्शक भी थे मायूस

रामलीला का मंचन बंद होने से कलाकारों के साथ दर्शक भी मायूस थे। समिति के सदस्य कृष्णलाल हस्तपुरिया ने बताया कि 2018 से मंचन बंद था। गोरखपुर में जब से रामलीला का मंचन शुरू हुआ था, तभी से मुस्लिम धर्म के लोग बढ़ चढ़कर रामायण के अलग अलग पात्रों का अभिनय बाखूबी निभाते हुए सांप्रदायिक सौहादर््र का संदेश देते आ रहे हैं। मंचन स्थानीय कमेटी कराती है।

एकता की मिसाल है रामलीला

गोरखपुर की रामलीला एकता की प्रतीक रही है। पूर्व में केवट के किरदार में मुस्ताक कुरैशी काफी चर्चित थे। उनका अभिनय देखने आसपास के गांवों से लोग आते थे। शेरा भाईजान हनुमान के किरदार को जीवंत पेश कर अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके हैं। कोदू खान सूर्पणखां, जुम्मन खान रामलीला में पात्र बनते थे। श्रीराम बारात के दिन कड्डो भाईजान द्वारा दुलदुल घोड़ी बनकर नृत्य करना आकर्षण का केंद्र बना रहता था। अब कुछ कलाकार उम्रदराज होने से मंचन में शामिल तो नहीं होते, लेकिन वे समाज के अन्य युवाओं को जोड़ने का काम जरूर करते हैं।

दूर-दूर से आते थे लोग

कस्बा की रामलीला को देखने छत्तीसगढ़ के गौरेला, बिलासपुर, रायपुर, शहडोल, जबलपुर, सिवनी, छिंदवाडा जिले से भी लोग आते थे। आसपास के गांवों के लोग तो सूर्यास्त के पहले आकर अपना स्थान जमा लेते और पूरी रात रामलीला देखते थे।

इनका कहना है

रामलीला का मंचन बंद होने से कलाकारों के साथ लोग भी मायूस थे, इस बार सभी ने रामलीला का मंचन शुरू करने का निर्णय लिया। चुनौतियां भी बहुत थीं। पुराने कलाकारों से भी बात की गई। इस बार नए युवक भी मंचन में जुड़े हैं। कस्बा के मुस्लिम धर्म के लोग भी रामलीला के मंचन में कई किरदार निशुल्क निभा रहे हैं। यह कौमी एकता का प्रतीक है।

अनिल तिवारी, रामलीला मंचन समिति पदाधिकारी गोरखपुर

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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