गुना। नवदुनिया प्रतिनिधि

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 10 साल बाद गुना में किसी भी सभा को संबोधित करेंगे। इसकी वजह गुना पहले सिंधिया परिवार का गढ़ रहा था। जिससे किला राघौगढ़ और चांचौड़ा तक सीमित था। वहीं महल की सीमा गुना और बमोरी तक थी, लेकिन सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद अब गुना सहित ग्वालियर चंबल संभाग पर पूर्व मुख्यमंत्री की नजर है, तो पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री अपने बेटे के साथ गुना में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सोमवार दोपहर एक साथ मंच साझा करते नजर आएंगे। नगरीय निकाय चुनाव को लेकर जहां एक ओर भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे को मात देने के लिए स्थानीय और प्रदेश स्तर के मुद्धे वार्डों में जनता को गिना रही है, तो शह और मात देने के लिए चुनाव-प्रचार भी तेज कर दिया है। लेकिन गुना शहर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने वर्ष 2012-2013 में सूखा पड़ने पर मुआवजा को लेकर कलेक्ट्रेट के सामने धरना दिया था, उसके बाद सभा को संबोधित किया था।

नगरीय निकाय का चुनाव प्रचार आज थमेगा

गुना नगरीय निकाय चुनाव प्रचार का सोमवार को अंतिम दिन है। शाम पांच बजते ही चुनाव प्रचार थम जाएगा। उससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने बेटे राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह के साथ लक्ष्‌मीगंज में दोपहर एक बजे मंच को साझा कर कांग्रेस पार्षद प्रत्याशियों के समर्थन में सभा करेंगे। वहीं भाजपा में पंचायत मंत्री महेंद्रसिंह सिसोदिया और सांसद केपी यादव डोर-टू-ड़ोर जाकर अपने प्रत्याशियों के लिए वोट मांगते नजर आएंगे।

मोहल्लों की गलियों और कालोनियों में ढोल तांसों के साथ उतरे उम्मीदवार

भाजपा और कांग्रेस सहित निर्दलीय पार्षद उम्मीदवार मोहल्लों की गलियों और कालोनियों में रविवार की सुबह से लेकर शाम तक ढोल-नगाड़ों के साथ वोट मांगते नजर आए। इस दौरान पार्षद उम्मीदवारों ने फिल्मी गानों का प्रयोग भी मतदाता को रिझाने के लिए किया है। 37 वार्डों में सोमवार की सुबह से लेकर शाम पांच बजे तक हलचल रहेगी। उसके बाद आमसभा और नुक्कड़ सभाएं नहीं हो सकेंगी।

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