गुना(नवदुनिया प्रतिनिधि)। जिला अस्पताल की डायलिसिस युनिट में एक महीने पहले बिजली की केबल में शार्ट सर्किट से करंट फैल गया था। साथ ही डायलिसिस मशीन भी खराब हो गई थी। लेकिन पिछले 30 दिनों से इस युनिट में मरीजों की हीमोडायलिसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस नहीं की गई। ऐसे में आयुष्मान कार्ड धारकों और गरीब मरीजों को हर महीने दूसरे जिलों में 12 से 20 हजार रुपये खर्च कर डायलिसिस करानी पड़ रही है। उधर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अतिवर्षा की वजह से छत से पानी का रिसाव डायलिसिस युनिट में होता है, जिससे करंट फैलने का खतरा बना रहता है। इस वजह से डायलिसिस युनिट की मशीनें चालू नहीं कर सकते हैं। जिला अस्पताल में हर रोज करीब सात मरीजों की एक महीने पहले तक डायलिसिस की जाती थी, लेकिन अतिवर्षा और छत से पानी के रिसाव की वजह से मरीजों की डायलिसिस नहीं की जा रही है। ऐसे में मरीज या तो निजी अस्पतालों में डायलिसिस कराने को मजबूर हैं, तो कई मरीज गुना से 200 किमी से ज्यादा दूर भोपाल और ग्वालियर में डायलिसिस कराने जा रहे हैं। सबसे अहम बात यह कि डायलिसिस युनिट चालू नहीं होने की वजह से जिन मरीजों की किडनी 85 से लेकर 90 फीसद तक काम करना बंद कर गई है, तो वह अपना क्रिएटिनिन और ब्लड यूरिया का टेस्ट कराने के लिए जिला अस्पताल की पैथलाजी में नहीं गए हैं। इसकी पुष्टि खुद जिला अस्पताल की पैथलाजी के कर्मचारियों और लैब टेक्नीशियनों ने की है।

मरीज एक महीने से कर रहे हैं सीएस से शिकायत

जिला अस्पताल में डायलिसिस युनिट बंद होने को लेकर मरीज एक महीने से सिविल सर्जन से शिकायत कर रहे हैं। वहीं सिविल सर्जन कई बार मरीजों से कहते हैं कि डायलिसिस युनिट के ऊपर निर्माण कार्य चल रहा है, जिसकी वजह से पानी यूनिट में आ रहा है, इस वजह से युनिट बंद है। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कोई आगामी कार्रवाई नहीं की है।

किडनी के मरीजों की इसलिए होती है डायलिसिस

मरीजों की किडनी लगभग 85 फीसद तक खराब हो चुकी होती है, तब किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। खून परीक्षण की जांच में रक्त की अधिक मात्रा में बेकार पदार्थों का पता लगे या खून में यूरिया, नाइट्रोजन की मात्रा क्रिएटिनिन मात्रा में बढ़ोतरी दिखाई दे, तब मरीज को डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। साथ ही जब किडनी 80 से 90 फीसद काम करना बंद कर देती है। ऐसे में डायलिसिस करानी पड़ती है।

डायलिसिस से क्या होता है फायदा

- शरीर से विषाक्त पदार्थों, अपशिष्ट, नमक और अतिरिक्त पानी को निकाला जाता है।

- पोटेशियम, सोडियम और बाइकार्बोनेट जैसे कुछ रसायनों के संतुलन को बनाए रखता है।

- रक्तचाप को नियंत्रण में रखता है।

जिला अस्पताल की डायलिसिस युनिट अगर एक महीने से बंद है और मरीजों को दूसरे जिले में डायलिसिस के लिए जाना पड़ रहा है, तो इस संबंध में जिला अस्पताल प्रबंधन से जवाब तलब करेंगे।

- गोपीलाल जाटव, विधायक गुना

अतिवर्षा की वजह से आएदिन डायलिसिस युनिट बंद रहती है। छतों और दीवारों से पानी का रिसाव होता है, जिससे शार्ट-सर्किट होने का खतरा बना रहता है।

- डा. आनंद, आरएमओ, जिला अस्पताल गुना

Posted By: Nai Dunia News Network

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