गुना, नवदुनिया प्रतिनिधि। अंचल में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और अनेक जगहों पर बाढ़ जैसे हालात हैं। बमोरी तहसील के तीन गांवों के 10 लोग लगातार बारिश से बाढ़ में फंस गए थे। मंगलवार को रेस्क्यू टीमों ने उन्‍हें निकालने की कोशिश की, लेकिन बारिश न थमने और बहाव कम न होने से रेस्क्यू नाकाम रहा। इसके बाद जिला प्रशासन ने शासन से हेलीकॉप्टर की मांग की थी, लेकिन शाम ढलने के बाद हेलीकॉप्टर की संभावना खत्म होने से सुबह तक इंतजार किया। इसी क्रम में बुधवार सुबह 10.45 बजे तक सभी लोगों को रेस्क्यू टीम द्वारा ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया।

दरअसल, जिले में पिछले पांच दिनों से बारिश का सिलसिला जारी है। इससे बमोरी की पार्वती, बरसाती, भौंरा, कोहन, झागर आदि नदियां उफान पर हैं, जिससे आवागमन बाधित है, तो लगभग सवा सौ गांवों का तहसील व जिला मुख्यालय से संपर्क कटा हुआ है। इधर, मंगलवार को भौंरा नदी के उफनने से तीन गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। इनमें रामपुर चीम और चक पिपलिया में एक-एक और पथरिया सरदारजी के मौजा में आठ लोग फंस गए। इसके बाद एसडीआरएफ, होमगार्ड की टीमों ने रेस्क्यू शुरू किया, लेकिन लगातार बारिश और तेज बहाव के चलते टीम नहीं पहुंच पाईं। ऐसी स्थिति में कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए. ने शासन से हेलीकॉप्टर की मांग की, लेकिन शाम ढलने से उपलब्ध नहीं हो सका। इधर, सभी लोग बाढ़ में फंसे रहे। कोई घर की छत पर, तो किसी ने खेत की मेढ़ पर रात गुजारी।

सुबह फिर शुरू हुआ रेस्क्यू, सभी को सुरक्षित निकाला

तहसीलदार निर्मल सिंह राठौड़ ने बताया कि रात में बारिश धीमी हो गई थी। इसके साथ ही बुधवार सुबह आठ बजे से ग्रामीणों की मदद से बचाव कार्य शुरू किया गया। 10.45 बजे तक सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इनमें रामपुर चीम के शंकर कुशवाह, चक पिपलिया के कजोड़ मीना के अलावा पथरिया से हरपाल सिंह, हरजीत कौर, सुखजीत सिंह, बलवीर सिंह, बलजीत कौर, पाना बाई, फूल सिंह शामिल हैं।

एक तैरकर निकल गया, दूसरा चौकीदार फंस गया

रामपुर चीम में पुलिया के निर्माण किया जा रहा है। यहां ठेकेदार के दो चौकीदार तैनात थे। सोमवार को भौंरा नदी उफनी, तो एक चौकीदार को तैरना आता था, तो वह तैरकर निकल आया था। जबकि म्याना निवासी शंकर कुशवाह पुलिया पर फंसकर रह गया था, जिसे बुधवार को रेस्क्यू कर निकाला गया।

बाढ़ में फंसे, तो भूख-प्यास भी भूले

पथरिया गांव के सरदार जी का मौजा से सुरक्षित निकले ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ आई, तो कोई घर की छत पर पहुंच गया, तो किसी ने खेत की मेढ़ पर रात गुजारी। इस दौरान भूख-प्यास को मानो भूल ही गए थे। क्योंकि, उस समय मन में सिर्फ किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने का ही ख्याल चल रहा था।

Posted By: Ravindra Soni

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