MP News: अरविंद शर्मा, गुना। गुना जिले को एनीमिया मुक्त बनाने स्वास्थ्य विभाग ने 267 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की स्क्रीनिंग कराई। इस दौरान सामने आया कि 12 हजार बच्चों में हीमोग्लोबिन की कमी है। एनीमिया की वजह से बच्चों की यादाश्त कमजोर हुई है, तो पढ़ने में भी मन नहीं लगता है। उधर, पहली बार जिले के निजी स्कूलों में शनिवार से एनिमिक बच्चों की जांच शुरू की गई है। अहम बात यह कि जिले में 51 फीसद से अधिक महिलाएं और छात्राओं में खून की कमी पाई गई है।

कालेज और स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं में खून की कमी

स्वास्थ्य विभाग ने 70 हजार महिलाओं और छात्राओं की स्क्रीनिंग की, तो करीब 37 हजार में खून की कमी मिली। अब स्कूलों में पढ़ाई से पहले आयरन की गोली खिलाई जाएगी। दिल्ली से पिछले दिनों गुना आई नीति आयोग की टीम ने कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए के साथ बैठक करने के बाद बमोरी और गुना ब्लाक का सर्वे किया था। इस दौरान सामने आया कि कालेज और स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं में भी अत्यधिक खून की कमी पाई जाती है। कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 267 सरकारी मिडिल, हाईस्कूल और हायरसेकंडरी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग कराई। जांच के बाद करीब 12 हजार विद्यार्थियों में खून की कमीं पाई गई। स्वास्थ्य विभाग ने हीमोग्लोबिन की कमीं वाले बच्चों से वन-टू-वन बात कर उनके लक्षणों को जाना।

पढ़ाई में नहीं लगता मन, कमजोर हुई याददाश्त

विद्यार्थियों ने कहा कि उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता है, याददाश्त भी कमजोर हुई है। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्राचार्य और शिक्षकों के हाथों में आयरन की टेबलेट दी। साथ ही कहा कि इन विद्यार्थियों को सप्ताह में एक दिन आयरन की गोली खिलाएं, जिससे हीमोग्लोबिन में तो वृद्धि होगी, लेकिन यादश्त में भी सुधार होगा।

नियमित आयरन की गोली नहीं ले रहे

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पिछले महीनों में बमोरी और गुना ब्लाक की 70 हजार महिलाएं और छात्राओं की स्क्रीनिंग की। इसमें 37 हजार महिलाएं और छात्राओं में हीमोग्लोबिन की कमी मिली। इनकी निगरानी स्वास्थ्य विभाग की आशा कार्यकर्ता कर रही हैं, लेकिन सामने आया कि खून की कमीं से जूझ रही महिलाएं और छात्राएं नियमित आयरन की गोलियां नहीं ले रही है। जिसकी वजह से उनके हीमोग्लोबिन में सुधार नहीं हुआ है। अब हर सप्ताह आशा इन महिलाओं के घर जाकर टेबलेट खिला रही हैं, तो वहीं स्कूलों में शिक्षक 12 हजार विद्यार्थियों को अपने हाथों से कक्षा में आयरन की गोली दे रहे हैं।

विद्यार्थियों ने हरी सब्जी से किया तौबा, जंकफूड पर भरोसा

स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी और निजी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से बात की। खून की कमीं वाले विद्यार्थियों ने कहा कि उनको हरी सब्जी और सोंजना सहित पौष्टिक अहार पसंद नहीं है। वह जंकफूड और बाजार का भोजन अपने परिवार के साथ खाते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 12 हजार विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए कहा कि वह बाजार के जंकफूड न खाएं, वह घर पर बनी हरी सब्जी व सोंजना सहित पोष्टिक अहार का सेवन करें। लेकिन उसके बाद भी विद्यार्थियों ने टीम से कहा कि सप्ताह में दो दिन तो वह जंकफूड खा सकते हैं।

टेलीविजन पर एड देखकर खाते हैं पिज्जा

स्वास्थ्य विभाग की टीम और भारत विकास परिषद ने शहर की भगत सिंह कालोनी के निजी स्कूल में विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। सीएमएचओ डा. राजकुमार ऋषीश्वर सहित डाक्टर उपस्थित थे। 200 विद्यार्थियों की खून की जांच हुई, जिसमें से दो में हीमोग्लोबिन की कमीं मिली। विद्यार्थियों ने इस दौरान कहा कि वह अपने माता पिता के साथ हर सप्ताह पार्टी करते हैं। पिज्जा सहित जंकफूड खाते है। विद्यार्थियों ने कहा कि टेलीविजन पर एड को देखकर भी वह जंकफूड को होमडिलेवरी कराते हैं।

प्रदेश में पहली बार शनिवार को गुना के निजी स्कूलों में एनिमिया मुक्त अभियान चलाया गया है। प्रदेश में कई भी यह अभियान शुरू नहीं हुआ है। उधर जिले के 267 सरकारी स्कूलों में करीब 12 हजार विद्यार्थियों में खून की कमीं मिली है। शिक्षक इन विद्यार्थियों को क्लासरूम में आयरन की गोली खिलाते है। इनकी निगरानी भी की जा रही है। हीमोग्लोबिन की कमीं की वजह से विद्यार्थियों की यादाश्त कमजोर होती है। चिढ़चिढ़ापन की वजह से पढ़ाई में भी मन नहीं लगता है। जिले में करीब 51 फीसद महिलाएं और छात्राएं एनिमिक है। - डा. राजकुमार ऋषीश्वर, सीएमएचओ गुना

Posted By: Nai Dunia News Network

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