ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जेएएच अधीक्षक ने पत्थर वाली इमारत में कोरोना के संदिग्ध मरीजों को रखने के लिए 500 बेड रिजर्व करने का दावा किया था। जबकि हकीकत में यहां केवल 332 बेड ही हैं। यदि गाइड लाइन का पालन किया तो केवल 200 बेड ही इस इमारत में लग सकेंगे। उधर कोरोना संदिग्ध मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर सर्जरी में उपयोग होने वाली पीपीई किट पहनकर वार्ड में काम कर रहे हैं। जिससे डॉक्टरों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है।

दरअसल प्रशासन ने कोरोना संदिग्ध मरीजों के लिए 500 बेड रिजर्व करने के निर्देश जेएएच प्रबंधन को दिए थे। इसके बाद जेएएच की पत्थर वाली इमारत को पूरा खाली करा लिया गया था। प्रबंधन ने दावा किया था कि 500 बेड रिजर्व हो चुके हैं। जबकि इस इमारत में सभी वार्ड खाली कराने के बाद भी कुल 332 बेड ही हो रहे हैं। अभी यह बेड काफी पास-पास में लगे हुए हैं। गाइड लाइन के मुताबिक दो बेड के बीच करीब डेढ़ मीटर की दूरी होना जरूरी है। यदि इस नियम का पालन हुआ तो केवल 200 बेड ही इस इमारत में लग सकेंगे। अब जेएएच अधीक्षक का कहना है कि बर्न यूनिट में करीब 60 बेड सहित अन्य वार्डों को मिलाकर 500 बेड की व्यवस्था हो जाएगी।

पीपीई किट में पायजामा ही नहीं:-कारपोरेशन से अब तक सर्जरी के लिए पीपीई किट आती थी। इसमें ऊपर का कोट तो होता था, लेकिन नीचे पायजामा नहीं होता था। हालांकि पैर में पहनने के लिए जरूर कवर दिया जाता था। कोरोना संदिग्ध मरीजों के उपचार के लिए पूरी कवर्ड पीपीई किट की जरूरत होती है, वर्ना संक्रमण का खतरा होता है। वर्तमान में मेडिकल वार्ड दो में 5 कोरोना संदिग्ध मरीज भर्ती है। यहां पर डॉक्टर केवल ऊपर का कोट एवं पैरों में कवर पहनकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। नीचे पायजामा नहीं होने से होने से डॉक्टरों के भी संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है। हालांकि अब प्रबंधन अलग से पायजामा का आर्डर देने की तैयारी कर रहा है।

कोरोना से लड़ने उपकरण जुटाएः-जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ एसएन अयंगर ने कोरोना से लड़ाई के लिए उपकरण मंगाना शुरू कर दिए हैं। हाल ही में 50 पल्स ऑक्सीमीटर, 20 डिजीटल बीपी उपकरण मंगाकर स्टाफ को दे दिया गया है। वहीं डीन ने 118 इंटर्न को तीन माह के लिए नियुक्ति देने के लिए सीएमएचओ को पत्र लिखा है। सीएमएचओ डॉ एसके वर्मा का कहना है कि पत्र मिलने के बाद हमने कलेक्टर से अनुमोदन कराने के बाद भोपाल भेज दिया है। स्वीकृति मिलते ही इंटर्न को नियुक्ति दे दी जाएगी।

वर्जनः-

पल्स ऑक्सीमीटर, बीपी उपकरण खरीदकर मेडिसिन विभाग को दे दिए गए हैं। इंटर्न को नियुक्ति देने हमने पत्र भी लिख दिया है। जिससे कोरोना मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आए।

डॉ एसएन अयंगर, डीन जीआर मेडिकल कॉलेज

वर्जनः-

हमने फुल पीपीई किट मंगा ली है। डॉक्टरों को यदि नहीं मिली है तो उपलब्ध करा दी जाएगी। जेएएच की पत्थर वाली इमारत में करीब 200 बेड रिजर्व हैं, बाकी बर्न यूनिट में करीब 60 बेड हैं। कोई दिक्कत की बात नहीं है 500 बेड की व्यवस्था हो जाएगी।

डॉ अशोक मिश्रा, अधीक्षक जेएएच

Posted By: Nai Dunia News Network

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