Coronavirus Gwalior News : ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। दूसरे जिले या राज्य से आने वाले लोग व पॉजिटिव मरीज कोरोना वायरस से कम मोहल्ले वालों से ज्यादा घबरा रहे हैं। पड़ोसी उन्हें कोरोना पॉजिटिव समझकर परेशान करना शुरू कर देते हैं। पॉजिटिव मरीज के घरों पर पत्थर फेंके जा रहे हैं। राशन-पानी तक नहीं लेने दिया जा रहा है। जिससे परेशान होकर लोग कह रहे हैं कि यदि उनकी भी रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती तो कम से कम वह अस्पताल में चैन से तो रह सकते थे। इतना ही नहीं कई लोग जो दूसरे राज्य या जिले से आए उनके घरों पर लोगों ने धमकियां भरे फोन करना शुरू कर दिया। जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो लोग इतना घबरा गए कि खुद ही कॉलोनी के बाहर जाकर खड़े हो गए। जिससे कम से कम परिजन तो चैन से जी सकें।

लॉकडाउन में परिवार से दूर रहने के बाद लोग जैसे-तैसे अपने घर पहुंचे तो यहां भी उनको परेशानी झेलना पड़ रही है। कॉलोनी या मोहल्ले वाले दूसरे राज्य या जिलों से आने वाले को संदेह की नजर से देख रहे हैं। प्रशासन ने भले ही होम क्वारंटाइन कर दिया हो, लेकिन लोग अधिकारियों को फोन करके बार-बार व्यक्ति को संस्थागत क्वारंटाइन करने का दबाव बना रहे हैं। वहीं जिस व्यक्ति की पॉजिटिव रिपोर्ट आ जाती है, उसके परिवार के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। नईदुनिया ने जब कुछ पॉजिटिव मरीजों से फोन पर चर्चा की तो पता चला कि प्रशासन तो कॉलोनी या मोहल्ले को सील करके पुलिस जवान तैनात करके चला गया है। जबकि परिवार के सदस्यों को राशन-पानी तक का संकट झेलना पड़ रहा है।

पॉजिटिव मरीजों का दर्द

केस-1 : धनेली निवासी दूधिया दो दिन पहले कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। बंशीपुरा एवं हाथीखाना में रहने वाले परिवार के 19 सदस्य भी संक्रमित पाए गए हैं। अब धनेली गांव में दूधिया की 45 वर्षीय पत्नी अकेली रह गई है। कोरोना पॉजिटिव मरीज ने फोन पर चर्चा में बताया कि गांव के लोगों ने पत्नी का जीना मुश्किल कर दिया है। अभी पत्नी का फोन आया तो उसने कहा कि घर पर लोग पत्थर फेंक रहे हैं। राशन कोई दे नहीं रहा है, कुएं से पानी भी नहीं भरने दे रहे हैं। तीन दिन से घर में भूखी बैठी हैं।

केस-2 : मानव विहार कॉलोनी निवासी 39 वर्षीय युवक की रिपोर्ट बीते रोज पॉजिटिव आई है। युवक ने बताया कि वह 8 दिन पहले सबलगढ़ से लौटा था। तब से कॉलोनी के लोग फोन पर धमकियां दे रहे थे। वह बोला- आप मेरे घर पर एंबुलेंस को आने से रोक दीजिए। आप बताएंगे मैं वहां आ जाऊंगा, आप मुझे अस्पताल पहुंचा देना। क्योंकि यदि एंबुलेंस मेरे घर पर आई तो कॉलोनी के लोग मेरे परिवार का जीना मुश्किल कर देंगे। आप चाहें तो कॉलोनी के बाहर मुख्य सड़क पर आ जाएं, मैं यहीं पर खड़ा हूं। यहां से एंबुलेंस से ले जा सकते हैं।

केस-3 : तारागंज निवासी 40 वर्षीय महिला को मंगलवार शाम 7 बजे जैसे ही रिपोर्ट पॉजिटिव आने की खबर मिली वह एंबुलेंस के इंतजार में सड़क पर आकर बैठ गई। महिला का कहना था कि घर पर यदि एंबुलेंस आई तो लोग परेशान करेंगे। हालांकि कॉलोनी के कुछ समझदार लोगों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन महिला घर जाने को तैयार नहीं हुई। रात 11 बजे जब एंबुलेंस आई तब महिला को अस्पताल पहुंचाया गया।

जिम्मेदार कौन

प्रशासन : मरीज को अस्पताल पहुंचाने के बाद घर पर क्वारंटाइन का पर्चा चस्पा कर दिया जाता है। ऐसे में घर में मौजूद सदस्यों देखभाल की जिम्मेदारी भी प्रशासन की होती है। मगर प्रशासनिक अफसर केवल घर को सील करके पुलिस बैठाकर चले जाते हैं। परिवार के अन्य सदस्यों की परेशानी की सुध तक नहीं ली जाती है।

नगर निगम या पंचायत : कोरोना पॉजिटिव मरीज के परिवार के सदस्य या अन्य लोगों के कॉलोनी के बाहर जाने पर रोक होती है। ऐसे में निगम की जवाबदारी है कि वह लोगों तक राशन पहुंचाए। मगर अनलॉक वन शुरू होने के पहले ही यह व्यवस्था काफी हद तक खत्म हो चुकी है।

पुलिस : चेकिंग में लगाए जवान भी यह देखना जरूरी नहीं समझते कि परिजनों को किस प्रकार की परेशानी हो रही है। वह केवल कॉलोनी से बाहर आने-जाने वालों को रोकने तक ही अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।

यदि ऐसा हो रहा है तो यह बहुत गलत बात है। इंसीडेंट कमांडरों के माध्यम से ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराई जाएगी। कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर ग्वालियर

Posted By: Nai Dunia News Network

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