Rapid Antigen Test : ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिस क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलता है, उसे कंटेनमेंट जोन बना दिया जाता है। कॉटैक्ट हिस्ट्री वाले पड़ोसियों या रिश्तेदारों को 7 दिन तक घरों में कैद (होम क्वारंटाइन) रहना पड़ता है। वहीं कंटेनमेंट जोन में भी इस अवधि में काफी सख्ती रहती है। जिससे पूरे इलाके को परेशानी झेलना पड़ती है। अब जिला प्रशासन की प्लानिंग पॉजिटिव मरीज के संपर्क में शामिल लोगों का रैपिड एंटीजन टेस्ट कराने की है। इससे 30 मिनट में पता चल जाएगा कि वह संक्रमण की चपेट में आए हैं या बच गए। फिर कंटेनमेंट जोन भले ही बना रहे, लेकिन सख्ती कम कर दी जाएगी। इसको लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में डॉक्टरों के साथ कलेक्टर ने बैठक भी की है।

किसी क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद परिजन, पड़ोसी और रिश्तेदारों तक को खासी परेशानी झेलना पड़ती है। क्योंकि जिला प्रशासन इस क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित कर देता है। यहां बैरिकेडिंग कर दी जाती है। यहां किसी के आने एवं जाने पर भी पाबंदी लग जाती है। लोग रोजमर्रा के सामान के लिए भी परेशान हो जाते हैं। वहीं मरीज के संपर्क में आने वालों की हालत इससे भी खराब होती है, क्योंकि पड़ोसी एवं रिश्तेदार भी उनसे दूरी बनाने लगते हैं। 5 दिन बाद लक्षण आने पर टेस्ट होता है, फिर रिपोर्ट का 24 घंटे इंतजार करना पड़ता है। तब तक कॉटैक्ट हिस्ट्री में शामिल लोग घर में कैद होकर रहने को मजबूर हो जाते हैं। जिले में रैपिड एंटीजन टेस्ट की शुरुआत होने के बाद प्रशासन अब लोगों को इस झंझट से मुक्ति दिलाने की प्लानिंग बना रहा है।

क्या है योजना

जिस क्षेत्र में पॉजिटिव मरीज मिलेंगे, वहां कॉटैक्ट लिस्ट तैयार होती है। इस सूची में शामिल लोगों का अगले दो दिन में रैपिड एंटीजन टेस्ट करा दिया जाएगा, जिससे पता चल जाएगा कि संक्रमण कितने लोगों में फैला है। जो पॉजिटिव होंगे उनको कोविड सेंटर पहुंचा दिया जाएगा, जबकि निगेटिव आने वालों को 7 दिन तक घर में कैद होकर नहीं रहना पड़ेगा। इसके बाद कंटेनमेंट जोन में भी सख्ती कम कर दी जाएगी। जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। लोगों को रोजमर्रा के सामान के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। इससे एक तो कॉटैक्ट हिस्ट्री वालों की सैंपलिंग भी जल्दी हो जाएगी, साथ ही कम्युनिटी सर्वे भी हो जाएगा। क्योंकि कंटेनमेंट जोन में यदि कोई अन्य पॉजिटिव मरीज नहीं मिलता है तो यह भी साफ हो जाएगा कि संक्रमण अन्य लोगों में नहीं फैला है।

3 पत्र फिर भी नहीं इंटरनेट कनेक्शन

जिला अस्पताल मुरार के स्टाफ के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट परेशानी का सबब बन गया है। 3 पत्र लिखने के बाद भी अब तक इंटरनेट कनेक्शन नहीं कराया गया है। डॉक्टर, टैक्नीशियन और ऑपरेटर अपने मोबाइल के नेट से आईसीएमआर के पोर्टल पर एन्ट्री कर रहे हैं। इस पोर्टल पर टेस्ट करने के साथ ही एन्ट्री करना होती है। एक एन्ट्री करने में ढाई से पौने तीन मिनट का समय लगता है। यदि इंटरनेट कनेक्शन हो तो यह काम जल्दी हो सकता है। हालांकि अब यहां ऑपरेटर की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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