ग्वालियर। मध्यप्रदेश में लगातार महंगी हो रही बिजली के खर्च को स्थायी रूप से बचाने के लिए शहर के 654 घर अब सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं। इन घरों में सौर ऊर्जा पैनल लगाकर नेट मीटरिंग की गई है, ताकि सूरज की रोशनी से पैदा होने वाली ऊर्जा को बिजली से परिवर्तित किया जा सके। इस तरह से यह घर रोड लगभग 15 हजार यूनिट बिजली का उत्पादन कर न सिर्फ खुद का बिल बचा रहे हैं, बल्कि विद्युत वितरण कंपनी को भी बिजली बेच रहे हैं।

बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनने के लिए बिजली उपभो€क्ता को केवल एक बार निवेश करना होता है और इस उपक्रम से पच्चीस साल बिजली का उत्पादन लोग स्वयं कर सकते हैं। घरेलू व व्यावसायिक के रूप में उपयोग की जाने वाली बिजली की दरें आएदिन बढ़ रही हैं। महंगी होती बिजली के चलते अब शहरवासियों का रुझान प्राकृतिक रुप से पैदा करने वाले सोलर पैनल को लेकर बढ़ता जा रहा है। बिजली कंपनी के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में 854 बिजली उपभोक्ता सोलर पैनल सिस्टम घर की छत पर लगाकर बिजली पैदा कर रहे हैं बल्कि अधिक होने पर बिजली वितरण कंपनी को बेच भी रहे हैं। एक किलोवाट से प्रतिदिन पांच व तीन किलोवाट से 15 से सोलह व पांच किलोवाट से 25 से 26 यूनिट प्रतिदिन बिजली जनरेट की जा सकती है। शहर में निजी रुप से सोलर प्लांट लगाकर बिजली बनाई जाती है। एक किलोवाट की यूनट के लिए सत्तर से अस्सी फीट, तीन किलोवाट के लिए 210 फीट व पांच किलोवाट बिजली पैदा करने के लिए साढ़े तीन सौ फीट जगह की जरुरत पड़ी है। इसमें एक किलोवाट से प्रतिदिन पांच यूनिट, तीन किलोवाट से 15 यूनिट प्रतिदिन बिजली पैदा होती है। जितना ज्यादा बड़ा प्लांट लगता है, उतनी ही ज्यादा बिजली उत्पन्न की जा सकती है।

Posted By: anil tomar

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