ग्वालियर, (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भीषण गर्मी व वर्षा में शहर को अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है। यह कटौती बिजली लाइनों पर उपयाेग किए गए घटिया उपकरणों के कारण हो रही है। ऐसे ही मामले शहर की 33 केवी के फीडरों पर सामने आए हैं। इन लाइनों पर टीआइपीएल कंपनी के इंसुलेटर उपयोग किए गए थे। वर्षा, तेज हवा व बादलों की गर्जना से ही बर्स्ट हो जाते थे। एक इंसुलेटर बर्स्ट होने पर पूरी लाइन से आपूर्ति बंद हो रही थी। इंसुलेटर में हुए फाल्ट से दो से चार घंटे की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा था। बिजली कंपनी ने 33 केवी पर लगे टीआइपीएल कंपनी के 900 इंसुलेटरों को बदल दिया। 33 केवी पर फाल्ट व ट्रिपिंग से राहत मिली है, लेकिन 11 केवी लाइनों पर यह लगे हुए हैं। सितंबर में 11 केवी लाइनों के भी इंसुलेटर बदलने का अभियान चलाया जाएगा। इन लाइनों पर लगे इंसुलेटर को तलाशने की जिम्मेदारी एचटी(हाईटेंशन) मेंटेनेंस संभाग की है।

दो तरह के घटिया इंसुलेटरः

-भारत सरकार ने आइपीडीएस (इंटीग्रेटेड पावर डवलपमेंट स्कीम) लागू की थी। इस योजना के तहत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सिटी सर्किल को 46 करोड़ रुपये का फंड मिला था। इस फंड से मोनो पोल लाइन, 33 केवी, 11 केवी लाइनों का निर्माण किया गया। इस लाइन पर टीआइपीएल कंपनी के इंसुलेटर लगाए थे। इन योजना का काम 2019 में खत्म हुआ था। लाइनों पर टीआइपीएल के इंसुलेटर लगाए गए। मोनो पोल व नई लाइनों में फाल्ट व ट्रिपिंग का प्रतिशत अधिक था।

-आइपीडीएस के तहत सिटी सेंटर (एजी आफिस पुल) सब स्टेशन से स्टेडियम, मेला, थाटीपुर, दर्पण कालोनी, सारिका विहार सब स्टेशन तक नई लाइन का निर्माण किया गया। हाई कोर्ट फीडर की भी नई लाइन थी।

-बिजली कंपनी ने भी अपने स्तर पर इंसुलेटर की खरीद की थी। जिस लाइन का इंसुलेटर खराब होता था, उसकी जगह पर नया लगाने के लिए टीआइपीएल के इंसुलेटर लगा दिए गए, जिसके चलते पुरानी लाइनों में भी लग गए। जब इन्हें लगाया गया, तब भी शिकायतें आई थीं, लेकिन घटिया इंसुलेटर का लाट खत्म कर दिया।

क्या होता है इंसुलेटरः

-इंसुलेटर का उपयोग सब स्टेशन, 33 केवी लाइन, 11 केवी लाइनों पर किया जाता है। पोल पर तार (कंडक्टर) को बांधा जाता है, जिससे पोल में करंट न आए। पुरानी लाइनों में चीनी के इंसुलेटर का उपयोग होता था, आधुनिक तकनीक के लगाए गए। जिससे उस पर पक्षी न बैठ सके।

-इंसुलेटर बर्स्ट हो जाता है तो पोल में करंट आने लगता है, जिससे लाइन चालू नहीं होती है। वह फाल्ट बताती रहती है। जब तक उसमें सुधार नहीं किया जाता है, तब तक लाइन चालू नहीं हो सकती है।

दो बार हो चुकी हैं जांचः जब-जब ग्वालियर में ट्रिपिंग व फाल्ट से हाहाकार मचा है, उसके बाद भोपाल से जांच के लिए टीमें बनाई गई है। दो बार जांच हो चुकी है। कंपनी मुख्यालय से जो कमेटी आई, उस कमेटी ने घटिया सामान के उपयोग को कटौती के लिए जिम्मेदार बताया था। पिछले साल जुलाई 2021 में कमेटी ने जो निरीक्षण किया था। घटिया सामान का उपयोग, सब स्टेशन पर अर्थिंग व कार्य गुणवत्ता खराब बताई थी, जो बिजली जाने के कारण थे।

फैक्ट फाइलः

-33 केवी फीडर-34

-लंबाई-264 किमी

-11 केवी फीडर-221

-लंबाई-623

वर्जन-

जिन इंसुलेटर में शिकायत आ रही थी, उन्हें बदलवा दिया है। फिर से गलत सामान की खरीद न हो सके, उसको लेकर व्यवस्था बनाई जा रही है। लाइन पर पेड़ गिरने या अन्य दुर्घटना से बिजली आपूर्ति बंद रही है, उस पर कुछ नहीं बोला जाएगा। बिना वाजिब कारण के बिजली जाती है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाए। इसके लिए अधिकारियों पर सख्ती की है।

प्रद्युम्न सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री

वर्जन-

33 केवी लाइनों पर टीआइपीएल के 900 इंसुलेटर बदले हैं। इनके बदलने से 33 केवी में वर्षा के दौरान फाल्ट नहीं आए हैं। इन इंसुलेटर की सप्लाई करने वाली कंपनी ब्लैक लिस्टेड हो चुकी है। 11 केवी के इंसुलेटर बदलने के लिए अभियान चलाया जाएगा।

नीतिन मांगलिक, महाप्रबंधक सिटी सर्किल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

Posted By: vikash.pandey

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