Aarogya Setu App : ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बाला बाई का बाजार निवासी मोना 16 जून को कोरोना संक्रमित पाई गईं थीं। इससे पहले सी ही ही उनके पति मयंक के मोबाइल में लोड आरोग्य सेतु ऐप पर लगातार लो रिस्क लिखा आ रहा है। मोना दो दिन पहले अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर पहुंच चुकी हैं। दो कमरे के फ्लेट में एक में मोना और दूसरे कमरे में पति रह रहा है। मयंक का कहना है कि उसके परिवार के 6 लोग कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। लेकिन ऐप पर न तो कभी इस बात की सूचना मिली कि आपके घर या मोहल्ले में कोई संक्रमित है या फिर आप हाइ रिस्क जोन में हैं। इसी तरह इलाज ले रहे कई कोरोना संक्रमितों के मोबाइल पर लोड इस ऐप में सेफ जोन लिखा आ रहा है। लोगों का कहना है कि जिस उद्देश्य से ऐप लोड किया, वह पूरा नहीं हो रहा। उनके पास आसपास कितने संक्रमित हैं तथा वह कंटेनटमेंट जोन में हैं या ग्रीन में, इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही।

डाटा फीडिंग की गड़बड़ी बढ़ा रही है तनाव

शहर में हो रही कोरोना जांच और उसकी रिपोर्ट के डाटा की फीडिंग में गड़बड़ी लोगों में तनाव बढ़ा रही है। इसी कारण लोगों को ऐप के माध्यम से भी सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऑपरेटर द्वारा गलत डेटा फीड करने के कारण ही शनिवार को वीरपुर निवासी एक घर के चार संक्रमितों के मोबाइल पर निगेटिव रिपोर्ट का मैसेज पहुंचा। जबकि वह पॉजिटिव पाए गए थे। यही जानकारी ऑनलाइन मैसेज द्वारा कोरोना की जांच करवाने वाले मरीजों के मोबाइल पर भेजी जाती है।

डीडी नगर के रहने वाले संदीप यादव 17 जून को कोराना संक्रमित पाए गए थे। इनका कहना है कि मोबाइल ऐप उन्हें सेफ जोन में बता रहा था, लेकिन जब वह अस्पताल पहुंचे तो ऐप में अपनी जानकारी अपडेट करने पर संक्रमित होना बताया। ऐप अब भी मेरी बहन व भाई के मोबाइल पर उन्हें सेफ जोन में होना बता रहा है। इसके अलावा जहां पर निवास कर रहे हैं, उसके आसपास कितने संक्रमित हैं इसकी जानकारी भी नहीं मिल पा रही है।

कोरोना संक्रमित : आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज ले रहे रेडिमेड गार्मेंट कारोबारी का कहना है कि अभी तक अस्पताल प्रशासन ने उन्हें ऐप डाउनलोड के लिए नहीं कहा। बार-बार सोमवार को अस्पताल से डिस्चार्ज करने की बात कही जा रही है। जबकि उसे जुकाम अब भी है। बताने के बाद भी न तो उनका दूसरा टेस्ट करवाया जा रहा।

किलागेट निवासी युवक का कहना है कि 17 जून को संक्रमित पाए गए थे। उन्होंने जब आरोग्य सेतु से एक महिला का फोन आया। उसने पूरी डिटेल ली, जिसके बाद ऐप पर उसे संक्रमित बताया जाने लगा।

इंजीनियर : मर्चेंट नेवी व निजी कंपनी का इंजीनियर ईएमआई हॉस्पिटल में कोरोना का इलाज ले रहे हैं। इंजीनियर का कहना है कि उन्होंने ऐप पर जब अपनी संक्रमित होने की जानकारी दी, तब से संक्रमित बताने लगा। जबकि सामने के बेड पर भर्ती निजी कंपनी के इंजीनियर के मोबाइल पर ऐप सेफ जोन में होना बता रहा है।

हो सकता है जिन लोगों को आरोग्य सेतु ऐप से सही जानकारी नहीं मिल पा रही है, उनके मोबाइल की सैटिंग में गड़बड़ी हो। फिर भी में अपनी टीम से दिखवा लेता हूं कहां पर परेशानी आ रही है।- शिवम वर्मा, सीईओ जिला पंचायत

Posted By: Prashant Pandey

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