ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। लॉकडाउन में बिना मास्क लोग दरवाजे के बाहर निकलने से घबराते थे। सैनिटाइज किए बिना किसी को चौखट के अंदर नहीं आने देते थे। जैसे ही अनलॉक की शुरुआत हुई तो लोगों ने कोरोना को मजाक समझ लिया। भीड़ में घूमते हुए भी मास्क लगाना जरूरी नहीं समझा। जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई और अस्पताल में पल-पल सांसें उखड़ने लगीं तो मास्क की अहमियत समझ आई। कोरोना की जंग जीतने वाले अब खुद तो मास्क लगाते ही हैं, अपनों को भी बिना मास्क घर से नहीं निकलने देते हैं। वहीं जिन लोगों ने कोरोना महामारी में अपनों को खो दिया है, वह भी अब मास्क की अहमियत को समझकर इसे अपने जीवन का हिस्सा बना चुके हैं। नईदुनिया ने 'अभी मास्क ही वैक्सीन' अभियान के तहत कोरोना योद्धाओं और ऐसे लोगों से चर्चा की जिनके स्वजन के लिए कोरोना 'काल' बन गया। प्रस्तुत है विशेष रिपोर्ट...

मास्क लगाया होता तो नरक ना भोगना पड़ता

उम्र अधिक होने के कारण मेरा अधिकांश समय घर में ही गुजरता था। सुबह-शाम पड़ोसियों के साथ बैठ लेता था, मेरी गलती यह रही कि मास्क नहीं लगाता था। इस भूल ने मुझे मौत की दहलीज तक पहुंचा दिया। 30 सितंबर को जब मेरी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई तो पैरों तले जमीन खिसक गई। अस्थमा की परेशानी और लंग्स में इंफेक्शन के कारण मुझे ऑक्सीजन पर रखना पड़ा, 6 दिन वेंटिलेटर पर गुजरे। स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। 19 दिन अस्पताल में पल-पल मौत का अहसास मेरे आज भी रोंगटे खड़े कर देता है। मैंने मास्क नहीं लगाने की गलती की थी, लेकिन उम्मीद है कि आप नहीं करेंगे।

महेंद्र सिंह कौरव (उम्र 72), निवासी थाटीपुर

वो छोटी सी भूल भारी पकड़ गई

सुबह टहलना और शाम को मंदिर में दर्शन के लिए जाना मेरा नियम था। मास्क, शारीरिक दूरी पर मैंने ध्यान नहीं दिया। 27 सितंबर को तबीयत बिगड़ी तो जेएएच के आइसोलेशन वार्ड में मुझे भर्ती किया। 29 सितंबर को रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। दो दिन गुजरे तो सांस लेने में दिक्कत होने लगी, लगा कि बस अब समय आ गया। मुझे ऑक्सीजन लगाई गई। दिल की बीमारी और कोरोना संक्रमित होने से स्वजन खासे चिंतित थे। मैं भाग्यशाली था कि मौत के मुंह से बचकर परिवार के साथ हूं। मेरा सभी से निवेदन है कि मास्क जरूर लगाएं और शारीरिक दूरी के नियम का पालन करें।

रमेश दुबे (उम्र 65), निवासी दौलतगंज

मैंने पिता जैसा बड़ा भाई खो दिया

मेरी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई तो बड़े भाई सहित पूरा परिवार चिंतित हो गया। बड़े भाई सुनील चड्ढा (उम्र 65) अस्पताल में मेरी देखभाल कर रहे थे। जब उनका स्वास्थ्य बिगड़ा तो जांच कराने पर उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उम्र अधिक होने के कारण चिंता ज्यादा थी, उनको दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया। उनकी हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी। डॉक्टर से बोला कि कोरोना के साथ अन्य बीमारियां भी हैं। डॉक्टर का जवाब होता कि पहले कोरोना ठीक हो तभी दूसरी बीमारी का इलाज हो सकेगा। 16 दिन बाद रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन शरीर में तब तक खून की कमी आ चुकी थी। वह वीडियो कॉलिंग पर हमसे बात कर रहे थे कि तभी उन्हें मौत ने अपने आगोश में ले लिया। जो संकट हम पर आया, वह आप पर नहीं आए, इसलिए मास्क जरूर लगाएं। कोरोना गंभीर बीमारी है, इससे बचाव ही हमारा इलाज है।

राजीव चड्ढा (उम्र 50), निवासी खेड़ापति कॉलोनी

मास्क बिना घर से बाहर ना निकलें

जैसे आप घर से निकलते समय कपड़े पहनने का ध्यान रखते हैं, इसी प्रकार मास्क पहनने को अपनी आदत बनाएं। मास्क को सही तरीके से उपयोग करना बहुत जरूरी है। सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन करें, किसी वस्तु को छूने पर साबुन से हाथ धोएं या सैनिटाइज करें। भीड़ में जाने से बचें। यह उपाय आपको कोरोना से बचा सकते हैं। मास्क आपका बाहरी संक्रमण से बचाव करता है, इसलिए उसका उपयोग बहुत जरूरी है।

डॉ. अशोक मिश्रा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीएसएम

मास्क आपका रक्षा कवच है

मास्क आपका रक्षा कवच है। शारीरिक दूरी का पालन व हाथों को बार-बार साबुन से धोने से कोरोना से बचाव होता है। आप घर में हो या बाहर निकले मास्क का प्रयोग जरूर करें। मास्क आपको बाहरी संक्रमण से बचाता है। इन नियमों का पालन करके आप 80 प्रतिशत तक संक्रमण से बच सकते हैं।

डॉ. मनीष शर्मा, स्वास्थ्य विभाग ग्वालियर

जान है तो जहान है

64 वर्षीय महेश चंद्र गुप्ता बीपी व शुगर के मरीज थे। 5 दिन पहले अचानक से तबीयत खराब हुई तो कोरोना की जांच में वह पॉजिटिव आए। स्वजन उन्हें लेकर दिल्ली के गंगाराम अस्पताल पहुंचे, जहां 4 दिन इलाज के बाद उनकी मौत हो गई। आज भरा पूरा परिवार गम में डूबा हुआ है। मेरा सभी से कृतज्ञ निवेदन है कि अपने व स्वजन के स्वास्थ्य की चिंता करें। महामारी बच्चा हो या बुजुर्ग किसी को नहीं देखती, इसलिए घर से जाते और आते वक्त मास्क व सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन करें। साबुन से हाथ भी धोएं, क्योंकि उपाय ही आपको बीमारी बचा सकता है, इसलिए ध्यान रखो जान है तो जहान है।

मुन्नालाल गोयल, पूर्व विधायक एवं मृतक के छोटे भाई

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