ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। तहसीलदार ने माधौगंज मैन रोड स्थित महादेव राधाकृष्ण मंदिर को मुक्त करा लिया। मंदिर पर पुजारी ने कब्जा कर लिया था। पुजारी ने तथ्यों को छिपाते हुए अपने वारिसों के नाम वसीयत कर दी। इस मंदिर की संपत्ति का विक्रय कर दिया। जबकि यह मंदिर माफी औफाक का था।

मंदिर के पुजारी के पद पर उमाचरण शर्मा को नियुक्त किया था। शासकीय संपत्ति होने के बावजूद पुजारी ने वसीयत अपने नाती आलोक भार्गव, एकलव्य भार्गव और हरिओम शर्मा के पक्ष में कर दी। आलोक भार्गव लैंड रिकार्ड में थे। तथ्यों को छिपाते हुए ननि में संपत्ति का नामांतरण करा लिया। मंदिर परिसर के बाहर बनी एक दुकान चंदर उर्फ चंदीराम को बेच दी। मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया तो इनके नाम हटाने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां दावा पेश किया। कोर्ट ने शासन के पक्ष में आदेश देते हुए कहा कि शासन द्वारा औफाक मंदिर पर पुजारी नियुक्त किया जाता है। माफी के मंदिर की संपत्ति पर अधिकार नहीं रखता है। न ही उसे वसीयत करने का अधिकार है। उसकी नियुक्ति मंदर में मूर्ति सेवा पूजा के लिए होती है।

ई-आफिस प्रणाली लागू नहीं होगी तो तहसीलदार देंगे स्पष्टीकरण: एक हफ्ते में शेष सभी तहसील कार्यालयों में ई-आफिस प्रणाली लागू कराएं। जिन तहसीलों में ई-आफिस प्रणाली से कामकाज शुरू नहीं हुआ, वहां के तहसीलदारों से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। यह बात संभाग आयुक्त आशीष सक्सेना ने गूगल मीट के जरिए ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी जिला कलेक्टर एवं अन्य संबंधित अधिकारियों से कही। संभाग आयुक्त ने बीते दिनों से जारी वर्षा और बांधों व जलाशयों के बढ़ते जलस्तर को ध्यान में रखकर संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सभी को सावधानी रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी जिला कलेक्टर बाढ़ को लेकर पूरी तरह सतर्क रहकर और बचाव व राहत दल मुस्तैद रखें। संबंधित अधिकारी जल संसाधन विभाग से समन्वय बनाकर बांधों से छोड़े जाने वाले जलस्तर की जानकारी रखें। संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों को समय से सूचित करें। कोटा बैराज से जल्द ही पानी छोड़ा जाएगा। श्योपुर व मुरैना जिले में सतर्कता बरती जाए। इसी तरह संभाग के अन्य बांधों से जुड़े गांवों में भी संबंधित जिला कलेक्टर पूरी सतर्कता बरतें।

Posted By: vikash.pandey

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