Agnipath Protest in Gwalior: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। ग्वालियर और चंबल अंचल के युवकों की पहली पसंद फौज, पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस की नौकरी रहती है, इसी के चलते शहर में जगह-जगह फिजिकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खुल गए हैं। फिजिकल ट्रेनिंग के नाम पर युवकों के साथ धोखा हो रहा है, क्योंकि ग्वालियर में 90 प्रतिशत फिजिकल ट्रेनर जो सेना और पुलिस की तैयारी कराते हैं, उनके पास कोचिंग का डिप्लोमा ही नहीं है। जानकारों का तो दावा है- महज दो से तीन ही ऐसे कोच हैं, जिनके पास एनएसएनआइएस यानी नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला का डिप्लोमा है। बाकी कई तो ऐसे हैं, जो खुद ही फौज की तैयारी करने आए थे, जब इनका चयन नहीं हुआ तो खुद कोच बन गए और खुद ही ट्रेनिंग देना शुरू कर दी। इस फर्जीवाड़े पर किसी की निगाह नहीं है। जब ग्वालियर में सेना भर्ती में अग्निपथ स्कीम के विरोध में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ और शहर झुलस उठा तब प्रशासन को फिजिकल ट्रेनरों का रजिस्ट्रेशन कराने की सुध आई। जानकार कहते हैं, शहर में करीब दस ग्राउंड हैं, जहां 200 से ज्यादा फिजिकल ट्रेनर फिजिकल ट्रेनिंग दे रहे हैं। लेकिन इनमें से एनएसएनआइएस, एलएनआइपीई से कोचिंग डिप्लोमा करने वाले महज दो से तीन ही कोच हैं जो सेना, पुलिस भर्ती के लिए तैयारी करा रहे हैं।

यहां होती है फिजिकल ट्रेनिंग: एसएएफ ग्राउंड, मेला ग्राउंड, फौजी ग्राउंड, मनोरंजनालय मैदान, साइंस कालेज खेल मैदान, कटारे फार्म हाउस के पास मैदान, डीआरपी लाइन। यह मैदान ऐसे हैं, जहां सेना, पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस की तैयारी युवक करते हैं। इन मैदान पर करीब 200 फिजिकल ट्रेनर ट्रेनिंग देते हैं।

शहर नहीं ग्रामीण इलाकों से तैयारी करने आने वाले होते हैं इन ठगों के शिकार: बिना डिप्लोमा, बिना ट्रेनिंग और बिना अनुभव के फिजिकल ट्रेनिंग देने वाले शहर के युवकों की जगह ग्रामीण क्षेत्रों से तैयारी करने आने वालों को चयनित कराने का सपना दिखाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के युवक इनके झांसे में आ जाते हैं और एकमुश्त पैसा तक जमा कर देते हैं। यह लोग एक युवक से 25 से 75 हजार रुपये तक फीस वसूल लेते हैं।

मैदानों पर ऐसे लोग दे रहे ट्रेनिंग:

-शहर के मैदानों पर फिजिकल ट्रेनिंग देने वालों में कई ऐसे लोग हैं, जो खुद सेना और पुलिस के लिए फिजिकल की तैयारी करने आए थे। इनका चयन नहीं हो पाया। इसके बाद इन लोगों ने खुद ही ट्रेनिंग देने की दुकान खोल ली, लेकिन न तो इनके पास कोई डिप्लोमा है न ही कोचिंग का कोई अनुभव।

-शहर में कई रिटायर्ड फौजी भी ट्रेनिंग देने लगे हैं, लेकिन इनके पास भी कोई डिप्लोमा नहीं है, ट्रेनिंग देने का इन्हें कोई अनुभव नहीं है।

क्या नुकसान: सबसे बड़ा नुकसान है, इन्हें बीएमआइ के हिसाब से ट्रेनिंग देने का अनुभव ही नहीं होता। जबकि ट्रेंड कोच बाडी मास इंडेक्स और अभ्यर्थी की शारीरिक क्षमता के हिसाब से उसकी दौड़ और अन्य शारीरिक गतिविधियों का शेड्यूल तय करेगा। ट्रेंड कोच डाइट तक निर्धारित करते हैं, लेकिन बिना डिप्लोमा के ट्रेनिंग देने वालों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं होती। अनट्रेंड कोच से ट्रेनिंग लेने से कई बार शरीर, मसल्स तक को बहुत नुकसान पहुंचता है।

ऐसे भी कोच: शहर के एसएएफ मैदान पर सालों से तैयारी करा रहे एक कोच महज 100 रुपये प्रति माह लेते हैं, यह एनएसएनआइएस से डिप्लोमा किए हुए हैं। पहली बार रजिस्ट्रेशन के 10 हजार इसके बाद 100 रुपये प्रति माह लेते हैं।

वर्जन:

शहर में कई कोच ऐसे हैं, जो बिना डिप्लोमा और बिना अनुभव के फिजिकल ट्रेनिंग दे रहे हैं। यह गलत है। ट्रेनिंग देने से पहले किसी भी संस्थान से कोचिंग का डिप्लोमा या कोई कोर्स जरूर करना चाहिए, इसके बाद ही युवकों को ट्रेनिंग कराई जा सकती है।

डा.केशव सिंह गुर्जर, एचओडी, एसओएस जीवाजी यूनिवर्सिटी

Posted By: vikash.pandey

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