amul milk price hiked: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सरकार भले ही महंगाई दर घटने के तमाम दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि बच्चों के मुख से दूध और आमजन की चाय की चुस्की भी अब और महंगी हो गई है। बीते एक साल में अमूल कंपनी ने दूध के दाम तीसरी बार दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाएं हैं, जबकि सांची ने भी दूसरी बार दाम बढ़ाने की तैयारी कर ली है। दूध महंगा होने से दही, लस्सी, पनीर व अन्य दुग्ध उत्पादों के दाम भी और बढ़ जाएंगे। दूध के दामों में बढ़ोतरी तब हुई, जब केंद्र सरकार पहले ही पैक्ड फूड और दुग्ध उत्पादों पर पांच फीसद जीएसटी लागू कर चुकी है। महंगाई ने बच्चों के दूध और लोगों के निवाले का बोझ और बढ़ा दिया है।

जिले में दूध की खपत प्रतिवर्ष बढ़ रही है, लेकिन उसके मुकाबले उत्पादन नहीं बढ़ा। दूध की बढ़ती मांग के चलते अमूल ने बुधवार से दूध के दाम में दो रुपये प्रति लीटर वृद्घि कर दी है। वहीं डेयरी पर बिकने वाले खुले दूध की कीमत में भले ही वृद्घि ना हो, लेकिन इसकी गुणवत्ता में कमी आई है। अब अमूल के गोल्ड, ताजा व शक्ति किस्म के पैक्ड दूध के दामों में वृद्घि कर दी है। खुले दूध में दो रुपये प्रति लीटर की वृद्घि ने पैक्ड दूध के दाम में चार प्रतिशत वृद्घि कर दी है। कंपनी ने कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे परिचालन लागत और दूध की उत्पादन लागत में वृद्घि को कारण बताया है।

एक साल में आठ फीसद बढ़े दाम: अमूल ने पिछले एक साल में तीसरी बार दूध के दाम दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाए हैं। इससे पहले जुलाई 2021 में, फिर मार्च 2022 और अब दो रुपये की और वृद्घि की है। वहीं सांची ने नवंबर 2021 में दूध के दाम दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाए थे। इसके अनुसार एक साल में दूध के दाम में आठ फीसद की वृद्घि हो चुकी है।

प्रतिदिन साढ़े चार लाख लीटर खपत: शहर में प्रतिदिन करीब साढ़े चार लाख लीटर दूध की खपत होती है। इसमें 36 हजार लीटर दूध की सप्लाई अकेले सांची करता है और इसके आसपास ही अमूल दूध की खपत है। बाकी दूध डेयरी या फिर दूधिया घर-घर जाकर बेचते हैं। वहीं दुग्ध उत्पादों में प्रतिदिन करीब आठ लाख लीटर दूध की खपत है।

जिस मौसम में दूध के दाम घटते थे, उसमें अब बढ़ रहे

माना जाता है बारिश के मौसम में दूध की उपलब्धता बढ़ जाती है। इसकी वजह बारिश के दिनों में खेतों में घास की पैदावार बढ़ जाती है। इससे जानवरों को भरपूर मात्रा में हरा चारा खाने को मिलता है, जिससे उनकी दूध देने की क्षमता बढ़ जाती है। मानसून सीजन में जानवर प्रजनन करते हैं। जो जानवर गर्मी के मौसम में दूध देना बंद कर देते हैं, वह इस मौसम में दूध देने लगते हैं। हालांकि जिस गति से जलवायु परिवर्तन हो रहा है, उससे गर्मी का सीजन बढ़ रहा है। गर्मी अधिक समय तक पड़ने से घास की उत्पादकता घटी है। इससे भूसा भी महंगा हो गया है, आमजन जन भी कम ही जानवरों को पाल रहे हैं। गोवंश का खानपान महंगा हुआ है, जिस कारण दूध की कीमतों पर भी फर्क पड़ रहा है और बारिश के मौसम में दाम बढ़ने लगे हैं।

कंपनियों ने दूध का दाम बढ़ा दिया है। लेकिन डेयरी संचालक दाम में कोई वृद्घि नहीं कर रहे हैं। असल में कंपनियां दाम बढ़ा व घटा लेती है पर डेयरी संचालक एक बार दाम बढ़ाने के बाद घटाते नहीं है। डेयरी पर अप्रैल महीने में दूध के दाम बढ़ाए जा सकते हैं।

नरेन्द्र मांडिल, अध्यक्ष दुग्ध व्यापारी संघ

बारिश के मौसम में भी दूध का उत्पादन नहीं बढ़ा है। जबकि मांग बढ़ती जा रही है। इधर दूध का ट्रांसपोर्टेशन और जानवरों के अहार की दर बढ़ती जा रही है। इन सभी कारणों को देखते हुए दूध का दाम दो रुपये प्रतिलीटर बढ़ाने का निर्णय लिया है, इसके लिए प्रस्ताव बनाकर दुग्ध संघ को भेज दिया है जल्द ही दाम बढ़ा दिए जाएंगे।

अनुराग सेंगर, सीईओ सांची ग्वालियर

Posted By: anil tomar

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