Anant Chaturdashi: ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। अनंत चतुर्दशी पर्व रविवार को मनाया गया। चतुर्दशी पर भक्तों ने व्रत कर श्रृद्धाभाव से पूजा अर्चना की। अनंत रूपों वाले भगवान विष्णु की पूजा कर अनंत रक्षा सूत्र पुरूष और महिलाओं ने हाथ पर बांधे। चौदह गांठ के धागे को बांधने से स्वास्थ्य लाभ और व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में उन्नति भी मिलती है। साथ ही कई बाधाओं से मुक्ति भी मिलती है। इसके साथ ही गणेश जी का विर्सजन भी किया गया। भक्तों ने 10 दिन के लिए गणेश स्थापित किए थे उनका विसर्जन शहर के जलाशयों और नदियों में किया गया। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी का व्रत किया गया। इस सूत्र की पहले पूजा की गई, जिसके बाद भक्त ने इसको धारण किया।

घर में गमले में विसर्जन किया-

भक्तों द्वारा विधि विधान और पूजा पाठ कर घर-घर में श्रीजी विराजे गए थे। जिनका विसर्जन जलाशय तक जाए बगैर लोगों ने घर में पूजा कर शुद्ध बर्तन और पानी में विसर्जन किया गया। इस वर्ष ऐसे गणेश की मूर्ति शिल्पकारों ने ईको फ्रेंडली मूर्ति तैयार की गई थी। जिसके विसर्जन के बाद पौधे के रूप में आर्शीवाद देते रहेंगे।

14 गांठों का रहस्य-

ज्योतिषाचार्य पं.सतीश सोनी के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने के बाद अनंत सूत्र को हाथ में बांधा गया। इस अनंत सूत्र में 14 गांठें लगाई जाती हैं। 14 गांठें इसलिए लगाई जाती हैं क्योंकि 14 गांठ को 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भौतिक जगत में 14 लोक बनाए जिनमें भूर्लोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक, ब्रह्मलोक, अतल, वितल, सतल, रसातल, तलातलए, महातल और पाताल लोक शामिल हैं। बता दें कि अनंत सूत्र में लगने वाली हर एक गांठ एक लोक का प्रतिनिधित्व करती है। अनंत सूत्र को हाथ में बांधा जाता है।

Posted By: anil.tomar

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