ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दुनिया में जो भी घटित हो रहा है, उसमें ग्रहों की चाल का बहुत अधिक महत्व रहता है। वर्तमान में भारत और चीन सहित चीन व अमेरिका और अन्य देशों की जो तनातनी चल रही है। उन सबके पीछे भी ग्रहों की वर्तमान दशा ही है। आने वाले दिनों में कई घटनाक्रम होने वाले हैं। इसमें गुरु, शनि, सूर्य, राहु, केतु, अपना-अपना रंग दिखाएंगे ।

ज्योतिषाचार्यों का दावा है कि 15 जुलाई से चीन के साथ भारत सहित विभिन्न् देशों के तनाव बढ़ना प्रारंभ हो जाएंगे। इसके बाद 16 अगस्त से अमेरिका और अन्य देश चीन के खिलाफ शंखनाद कर देंगे। जिसके चलते चीन की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बहुत खराब हो जाएगी। साथ ही भारत का पूरी दुनिया में नाम होगा। भारत पूर्व समय में भी चीन द्वारा कब्जाई जमीन को वापस पा लेगा। वहीं पाकिस्तान की हालत बहुत ही बद्हाल हो जाएगी।

ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी के अनुसार शनि भारत का प्रतिनिधित्व करता है और वह बलवान ग्रह है। साथ ही अभी वक्री है, लेकिन शनि मार्गी होकर पांच सालों तक अपनी राशियों का संचार करेगा। इससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में भारत का मान सम्मान और शक्ति बढ़ने वाली है। वहीं गुरु चीन का प्रतिनिधित्व करता है। गुरु भी बलवान ग्रह है और अभी वक्री है। लेकिन जब वह मार्गी होगा तो निर्बल हो जाएगा। क्योंकि मार्गी होते ही वह नीच राशि की ओर अग्रसर हो जाएगा। ऐसा दो वर्षाे के लिए होगा।

ऐसे में चीन के लिए आने वाला समय बहुत ही खराब है। 15 सितंबर तक गुरु वक्री रहेंगे फिर मार्गी हो जाएंगे। 15 सितम्बर के बाद चीन की हालत खराब होने लगेगी। लेकिन 15 सितम्बर से पहले चीन अपनी शक्ति का भरपूर प्रदर्शन कर सकता है।

गुरु की एक खासियत है कि वह जिस ग्रह के साथ युति करता है उसे प्रबल बना देता है। गुरु मार्गी होकर जब मकर राशि में प्रवेश करेगा तब वह शनि के साथ युति बनाएंगे। अर्थात अपना बल शनि को दे देंगे। इस युति से अर्थ निकलता है कि आने वाले समय में भारत की जीत पक्की है जबकि चीन की हार निश्चित है। सितम्बर से लेकर दिसम्बर के बीच चीन की स्थिति दयनीय हो जाएगी उसे भारत के कहे अनुसार इलाके खाली करने होंगे और भारत अपने मनचाहे इलाकों पर काबिज हो जाएगा।

अमेरिका और चीन में हो सकता है टकराव

16 अगस्त को मंगल मेष राशि में प्रवेश कर जाएगा। मंगल एक क्षत्रिय ग्रह और विध्वंस का कारक है । इसी दिन सूर्य भी सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे। सूर्य बड़े होने का कारक है, जो कि इस बात का संकेत देता है कि आने वाले दिनों में विश्व के बड़े देश एकजुट होकर बड़े निर्णय लेंगे। इसी दौरान वक्री गुरु चीन को प्रबल बना देगा जिसके कारण टकराव और मतभेद निश्चित हो जाएंगे।

22 जुलाई से राहु केतु भी प्रबल हो रहे हैं, जो कि अप्रत्याशित घटनाओं की पृष्ठभूमि तैयार करेंगे। मंगल आने वाले छह माह तक मेष राशि में संचार करता रहेगा। मंगल अमेरिका और यूरोपियन देशों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके चलते आने वाले छह माह तक चीन और अमेरिका के बीच टकराव रहेगा। वहीं दिसम्बर तक चीन हार मान लेगा क्योंकि इस समय तक गुरु शनि के साथ युति बनाकर शनि को अपना बल प्रदान कर देगा।

जापान और पाकिस्तान की यह होगी स्थिति

जापान पूर्व दिशा का कारक होने के कारण अमेरिका और यूरोपियन देशों के साथ रहेगा। इससे चीन के साथ टकराव के बाद जो सुखद परिणाम निकलेगा उसमें उसका हिस्सा पक्का रहेगा। वहीं भारत अपने इलाकाई हितों की रक्षा से संतुष्ट हो जाएगा और इसके उसे दूरगामी लाभ मिलेंगे। वहीं जब भी मंगल बलवान होता है तब-तब बुध निर्बल हो जाता है। बुध शक्ति संचालन के दौरान निस्तेज हो जाता है यहीं हाल पाकिस्तान का होगा। इस टकराव के बाद उसकी हालत अनाथ जैसी हो जाएगी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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