डॉ.अमरनाथ गोस्वामी, ग्वालियर। एट्रोसिटी एक्ट से अंचल में आए उबाल ने कांग्रेस-भाजपा दोनों को हिलाकर रख दिया है। हकीकत ये है कि इन दोनों दलों को बड़ा वोट बैंक खिसकता नजर आ रहा है। एक्ट पर संसद में बिल चूंकि भाजपा ही लेकर आई थी, इस कारण सवर्ण आक्रोश का पहला हमला भी इसी दल के नेताओं को झेलना पड़ रहा है। शुरुआती दौर में भाजपाई दिग्गजों ने इसे तात्कालिक प्रतिक्रिया बताकर पल्ला झाड़ लिया था। पिछले कुछ दिनों में उनकी चिंताए बढ़ने लगी हैं, लगने लगा है कि कहीं इस मामले को हल्के में लेना उन्हें भारी न पड़ जाए।

भाजपाई सियासतदाओं के हाथ-पांव केवल इस कारण नहीं फूल रहे हैं कि सवर्ण उनसे नाराज हैं, वरन चिंता इस बात की है कि कहीं उनका वोट बैंक डीजल-पेट्रोल की आड़ में कोई और न लूट ले जाए। यही कारण है कि विरोध का गढ़ बने ग्वालियर-चंबल में भाजपा नेताओं की भाषा बदलने लगी है।

इनके नेता जुबानी मरहम, बिना ये सोच लगा रहे हैं कि इस मर्ज का इलाज तो सूबे के सदर के भी वश में नहीं है। उधर मौन साधे कांग्रेस की स्थिति ठीक वैसी है जैसी छीका टूटने की आस में नीचे बैठी बिल्ली की होती है। कांग्रेसी दिग्गजों को लग रहा है कि सवर्ण उनका राजनीतिक वनवास भी खत्म करा सकते हैं।

बदलने लगे स्वर

मुरैना सांसद अनूप मिश्रा को जब ग्वालियर में दूसरी बार 19 सितंबर को राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय में घेरा गया तो उन्होंने कह दिया 'मैं आपके साथ हूं, आपके आक्रोश को समझ रहा हूं। 20 सितंबर को दतिया के वृंदावनधाम में आयोजित एक कार्यक्रम में मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि 'सपाक्स के सब अपने हैं, सिर झुकाकर मनाएंगे।

20 सितंबर को शिवपुरी के पूर्व विधायक व प्रदेश कार्यसमिति में सदस्य वीरेंद्र रघुवंशी एक कदम और आगे बढ़ गए। ग्राम रामपुर चक में एक कार्यक्रम में अपनी ही सरकार के बिल में संशोधन को गलत करार दे दिया। 17 सितंबर को प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने जब दो पूर्व व मौजूदा जिलाध्यक्षों से फीडबैक लिया तो तीन में से दो ने साफ कर दिया कि सवर्णों की नाराजगी परेशानी का कारण बन सकती है।

कांग्रेस करेगी नए बदलाव

ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले गुना संसदीय क्षेत्र की 8 में पांच सीटों पर कांग्रेस काबिज है। यह संख्या बढ़ाकर 7 करने के इरादे से कांग्रेस कुछ सीटों पर प्रत्याशियों में बदलाव करने की मंशा में है। इसके साथ ही करैरा में कब्जा बरकरार रखने मौजूदा विधायक शकुंतला खटीक का टिकट भी काट सकती है। दतिया में भांडेर सीट पर कब्जा करने के लिए कांग्रेस इस बार बड़ा दांव लगाने की सोच रही है। वह यहां डबरा से विधायक इमरती देवी को मैदान में उतार सकती है।

ग्वालियर में ग्वालियर पूर्व की सीट पर दो बार हार चुके मुन्नालाल पर ही कांग्रेस दांव लगाने के इरादे में है। दरअसल दोनों बार मुन्नालाल मतदान के अंतिम चरणों में विवाद के बाद हारे घोषित किए गए। कांग्रेसियों के मन में यह बात समाई हुई है कि कहीं न कहीं कुछ गड़बडी से ही मुन्नालाल हारे। ग्रामीण सीट पर कुशवाह समाज के वाहुल्य के कारण यहां कुशवाह समाज के प्रत्याशी को ही लाने की रणनीति बन रही है। वहीं भाजपा में टिकटों में बदलाव पर कुंहासा ज्यादा ही घना है। भाजपा ऐन वक्त पर ही यहां किसी एक सीट पर ही बदलाव करेगी।

भाजपा में पार्टी, कांग्रेस में प्रत्याशी अपने बलबूते

तैयारी के मामले में कांग्रेस, भाजपा के पासंग बराबर भी नहीं है। भाजपा ने हर मतदान केन्द्र पर 30-30 मतदाताओं पर एक-एक कार्यकर्ता (पन्ना प्रमुख) फॉलो करने लगा दिया है। हर वार्ड में पालक-संयोजक इनके कामकाज की निगरानी में जुट गए हैं। कांग्रेस में पार्टी स्तर पर मामला अब तक बीएलए (बूथ लेबल एजेंट) पर ही टिका हुआ है। बीएलए की कार्यप्रणाली मतदाता सूची में घटे-बढ़े नामों को देखने तक सीमित है। अलवत्ता संभावित प्रत्याशी निजी स्तर पर तैयारी में जरूर जुट गए हैं।