ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने दस फलदार या छायादार पौधे रोपने की शर्त पर जमातन दी है। जेल से रिहा होने की तीस दिन के भीतर पौधे रोपने होंगे। पौधों की लंबाई आठ से दस फीट होना चाहिए। उनकी सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगाने होंगे। जबतक केस की ट्रायल चलेगी, तबतक उनकी देखभाल करनी होगी। ट्रायल कोर्ट में पौधों के फोटो भी पेश करने होंगे। पौधे लगाने की पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट हाई कोर्ट के एप पर दर्ज करनी होगी, ताकि सेटेलाइट से उनकी निगरानी की जा सके।

दीपांशु गुर्जर पर दतिया के कोतवाली थाने में मारपीट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज है। पुलिस ने 9 जुलाई 2007 को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। दो महीने से अधिक जेल बंद हुए बीत गए। उसने जिला कोर्ट में जमानत आवेदन पेश किया, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की। उसकी ओर से तर्क दिया गया कि न्यायिक हिरासत को लंबा समय हो गया है। अब पुलिस को पूछताछ भी नहीं करनी है। उनकी जरूरत है। चालान भी पेश हो गया। ट्रायल खत्म होने में समय लगेगा, ऐसी स्थिति में लंबे समय तक जेल में मौलिक अधिकारों का हननन है। पुलिस की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया। आरोपित साक्ष्य व ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जमानत आवेदन खारिज किया जाए। आरोपित ने कोर्ट में जनसेवा की भावना भी जताई थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पौधे लगाने की शर्त पर जमानत दी है। जेल से रिहाई के बाद दस पौधे लगाने होंगे। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में पर्यावरण की अनदेखी नहीं की जा सकती है। इसके चलते पौधे लगाना जरूरी है। इससे आरोपित के मन का भाव भी बदलेगा।

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