- कचरे से बनी खाद का किसान नहीं कर रहे उपयोग

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। केदारपुर कचरा निस्तारण केंद्र पर करीब तीन लाख टन कचरे का ढेर लगा हुआ है। यह वह कचरा है, जिसमें बैक्टीरिया डालकर खाद बनाया जा चुका है, लेकिन इसका उपयोग नहीं होने के कारण अब इससे बरा की बंद हो चुकी खदानों को भरा जाएगा। खदानों में खाद बन चुके कचरे को डालने से पर्यावरण का नुकसान नहीं होगा। केदारपुर कचरा निरस्तारण केंद्र की भी बहुत सारी जगह खाली हो जाएगी।

निगमायुक्त किशोर कान्याल ने बताया कि केदारपुर में निगम ने कचरा निस्तारण केंद्र बनाया है। यहां पूरे शहर से आने वाले कचरे को अलग-अलग कर उसका उपयोग किया जाता है। इसमें जो रिसाइकिल होने वाला कचरा है उसे कबाड़ी बीनकर ले जाते हैं। जबकि दूसरे कचरे को खाद में परिवर्तित कर दिया जाता है। केदारपुर कचरा निस्तारण केंद्र में करीब 10 साल से सड़ रहे कचरे में बैक्टीरिया डालकर उसे लगभग मिट्टी में परिवर्तित किया जा चुका है, लेकिन इस कचरे से बनी खाद व मिट्टी का निगम के पास दूसरा विकल्प नहीं है, क्योंकि इसे किसान अपने खेतों में डालने के लिए नहीं ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कई सालों से इस कचरे के कारण केदारपुर कचरा निस्तारण केंद्र में काफी जगह घिरी हुई है। इसके कारण शहर से आने वाले नये कचरे को डालने के लिए जगह भी कम ही बची है।

हानिकारक कचरा नहीं डाल सकते खदानों में: एनजीटी के नियमों के अनुसार शहर से निकले हानिकारक कचरे को खदानों में डंप करने के लिए नहीं डाला जा सकता है। कचरे को खदानों में डालने से पहले उसका निस्तारण करना जरूरी है। इसके चलते निगम उसी कचरे को बरा की खदानों में डालेगी जिसका पहले निस्तारण किया जा चुका है।़किचरा भी अलग प्रकार का: ग्वालियर में निकलने वाले कचरे से पहले ऊर्जा बनाई जाने का प्रस्ताव था। इसके लिए नगर निगम ने कई बार टेंडर भी कॉल किए थे। साथ ही कई लोगों से संपर्क भी किया था, लेकिन इनमें से एक भी संस्था ने इस प्रोजेक्ट को हाथ में नहीं लिया।

पेवर्स व सड़क निर्माण में भी नहीं हो पा रहा उपयोग: कचरे से निकलने वाले प्लास्टिक सहित अन्य उत्पादों से नगर निगम ने पहले पेवर्स बनाने की योजना बनाई थी। साथ ही कचरे के उपयोग से सड़क का निर्माण कार्य भी किया जाना था, लेकिन यह योजना भी अभी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। कचरे से बनी खाद का उपयोग किसान भी अपने खेतों में नहीं कर रहे हैं। इसके कारण खाद व मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं। ऐसे में वहां पर नये कचरे के लिए भी ज्यादा स्थान नहीं बचा है। जबकि शहर से प्रतिदिन 400 टन कचरा वहां पर पहुंच रहा है।

Posted By: anil.tomar

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