- गांव के रिहायशी इलाके में क्रैश होकर गिरता मिग-21 तो कई की जाती जान

- पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

बुधवार सुबह हवा में उड़ान भरते मिग-21 ट्रेनर में खराब आने और धुंआ उठने के बाद कन्ट्रोल सिस्टम से संपर्क भी टूट गया। ऐसे में ग्वालियर-भिंड जिलों की सीमा पर करीब एक दर्जन गांव के ऊपर धुंआ उठता मंडरा रहा फाइटर प्लेन गिरता तो कई लोगों की जान जा सकती थी। विपरित परिस्थितियों में भी पायलट ने खुद की जान की परवाह न करते हुए जलते हुए मिग-21 को रिहायशी इलाके से खाली खेतों की तरफ ले गए। सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद खुद को इजेप्ट कर सुरक्षित किया। जिसके बाद हवा में गुलाटें खाता हुआ मिग-21 तेज धमाके के साथ भिंड के आलौरी चौधरी का पुरा के खाली खेत में जा गिरा।

कीचड़ में फंसा वायुसेना का रेस्क्यू हेलिकॉप्टर

विमान दुर्घटना के करीब 20 मिनट में महाराजपुरा वायुसेना बेस से डॉक्टरों का दल लेकर स्पेशल हेलिकॉप्टर चौधरी का पुरा पहुंचा। खेत और आसपास इलाकों में तीन दिन से हो रही बारिश पानी भरा था। वायुसेना किसी भी स्थिति में अपने ग्रुप कैप्टन वायएस नेगी और स्क्वाड्रन लीडर शिवानंद रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाना चाहती थी। ऐसे में हेलिकॉप्टर को खेत की कीचड़ में ही लैंड कराया गया। डॉक्टर ने प्राइमरी ट्रीटमेंट के बाद ग्रामीणों की मदद से हैलिकॉप्टर तक पहुंचाया।े हेलिकॉप्टर उड़ाना मुश्किल हुआ। ग्रामीणों की मदद से कीचड़ से हेलिकॉप्टर को निकाला गया तब उड़ान भरी।

2 किमी कीचड़ में नंगे पैर चलकर पहुंचे एसपीः

आलोरी में चौधरी का पुरा गांव में विमान दुर्घटना के बाद वायुसेना की ओर से सूचना मिलते ही गोहद थाना टीआई तिमेश छारी मय बल के स्पॉट पर पहुंच गए थे। जिस खेत में मिग-21 विमान गिरा, उसमें और आसपास सभी खेतों-रास्तों में पानी भरा हुआ था। हादसे ग्वालियर जिले के बॉर्डर पर हुआ था तो मुरार एसडीएम पुष्पा पुशम भी कीचड़ में नंगे पैर स्पॉट पर पहुंची। दोपहर में एसपी रूडोल्फ अल्वारेस भी करीब 2 किमी नंगे पैर कीचड़ और नदी के पानी के बीच से होते हुए स्पॉट पर आए। एसपी ने महाराजपुरा वायुसेना स्टेशन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ग्रुप कैप्टन जीएस सिंधु और राजन भाटिया से बातचीत की।

दुर्घटनाग्रस्त विमान वायुसेना पुलिस की कस्टडी में:

हादसे के बाद मौके पर पहुंचे महाराजपुरा वायुसेना स्टेशन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ग्रुप कैप्टन जीएस सिंधु और राजन भाटिया ने एक दर्जन से ज्यादा वायुसेना अफसरों के साथ विमान के मलबे में पड़ताल की। आवश्यक वस्तुएं जुटाई गईं। आसपास के खेतों में पड़े विमान के टुकड़ों को एकत्रित कराया है। दिल्ली से दल आने तक विमान को वायुसेना पुलिस की कस्टडी में रहेगा। सहयोग के लिए गोहद पुलिस की टीम भी लगाई गई है।

ब्लैक बॉक्स खोलेगा विमान हादसे के राजः

चौधरी के पुरा में क्रैश हुए मिग-21 प्रशिक्षण विमान के हादसे के पूरे राज ब्लैक बॉक्स खोलेगा। यह विमान के पिछले हिस्से में होता है। विमान की समय सभी तरह की गतिविधियां इसमें रिकॉर्ड होती हैं। विमान कितनी ऊंचाई पर उड़ रहा था। ईंधन कितना था। स्पीड कितनी थी। हलचल कैसी थी। विमान की केबिन का तापमान कितना था। इन जानकारियों समेत 88 तरह के आंकड़े रिकॉर्ड होते हैं। यह टाइटेनियम की धातु से बना होता है। इससे काफी ऊंचाई से गिरने या समुद्री पानी में गिरने से भी इसको कम से कम नुकसान पहुंचता है। जब यह बॉक्स किसी जगह पर गिरता है तो 30 दिनों तक विशेष बीप की आवाज निकालता है। इससे खोजी दल इसे खोज लेता है। हादसे के बाद ब्लैक बॉक्स वायुसेना को मिल गया है।

जलता हुआ जहाज गिरा, लगा कोई नहीं बचेगा

मैं धान की फसल की मेड़ पर भैंसे चरा रहा था। एक दम तेज आवाज सुनाई दी। देखा तो गांव के ऊपर जलता हुआ जहाज नजर आओ। तेज आवाज हो रही थी। मुझे लगा कि गांव पर गिरा तो कोई नहीं बचेगा। अचानक विमान तेज आवाज करता हुआ खेत में आकर गिरा। जहाज के जलते टुकड़े दूर तक खेतों में गिरे। बड़ी छतरी जैसी चीज (पैराशूट) से दो पायलट गिरे। एक के चोट ज्यादा थी, वो उठ नहीं पाए। दूसरे बैठ गए। उन्होंने फोन लगा दिया। जहाज गिरता देखकर गांव के लोग भी खेत की ओर आए। जहाज गिरने के 20 मिनट में हेलिकॉप्टर से वायुसेना के अफसर आए। घायल पायलट को हेलिकॉप्टर से इलाज के लिए लेकर गए।

(जैसा मिग-21 क्रैश के सबसे पहले प्रत्यक्षदर्शी रामनिवास गुर्जर ने नईदुनिया को बताया)

9 महीने में तीसरा मिग-21

अभी हाल ही में एक रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2016 के बाद बीते 3 साल में 27 एयरक्राफ्ट दुघर्टना का शिकार होकर क्रैश हुए हैं। जिनमें 15 फाइटर प्लेन है। जबकि वर्ष 2019 में 9 महीने में मिग-21 के साथ यह तीसरा हादसा है। मार्च 2019 में राजस्थान के बीकानेर में मिग-21 फाइटर प्लेट ट्रेनर इसी तरह क्रैश होकर गिरा था। इसके बाद अभी पीओके में एयर स्ट्राइक में विंग कमांडर अभिनंदन भ्ी मिग-21 फाइटर प्लेन में ही थे। जो पाकिस्तान के एफ-16 को सीमा से बाहर करते समय दुघर्टनाग्रस्त हुआ था। यह तीसरा हादसा है। इससे पहले 2012 में ग्वालियर के जंगल में मिराज भी इसी तरह दुघर्टना का शिकार होकर क्रैश हो चुका है। तब भी दोनों पायलट सुरक्षित रहे थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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