ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जानलेवा डॉक्टरी का भूत सिर चढकर बोल रहा है। आरएमपी की छाप लेकर घूमने वाले गलियों और मोहल्लों में

डॉक्टरी कर रहे हैं। यह तो कुछ नहीं अब तो मलेरिया विभाग के कारिंदे भी डॉक्टरी में लग गए हैं। खुद विभाग के एमपीडब्ल्यू (बहुउद्देश्य कार्यकर्ता जो क्षेत्र में जाकर डेंगू, मलेरिया के लार्वा की जांच व साफ सफाई करवाने के साथ दवा छिड़कने का काम करते हैं)आईपी आर्य जो एमबीबीएस का बोर्ड लगाकर धड़ल्ले से इलाज कर पैसा कमाने में जुटे हैं। ऐसे एमबीबीएस का दावा करने वाले एक नहीं बल्कि शहरभर में कतार लगी है। मंगलवार को नईदुनिया टीम ने बिना डिग्री के डॉक्टरी का शौक रख मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों की पड़ताल की तो ग्राउंड लेवल पर चौंकाने वाले हालात मिले। खास बात यह है कि स्वास्थ्य महकमा झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाई तो नहीं कर सका पर अब उनके ही कर्मचारी खुद झोलाछाप के काम में उतर गए हैं। नदीपार टाल में मलेरिया विभाग के सर्विलांस वर्कर इन्द्रप्रसाद आर्य शिव क्लीनिक के नाम से क्लीनिक खोलकर मरीजों को इलाज दे रहे हैं। उनके आसपास करीब एक दर्जन आरपीएम डॉक्टरों का जमावड़ा लगा है।

तीन वार्ड में डेंगू-मलेरिया की जांच का जिम्मा बैठ गए क्लीनिक खोलकर-

बहुउद्देश्य कार्यकर्ता इन्द्रप्रसाद आर्य को मलेरिया विभाग द्वारा मुरार में वार्ड क्रमांक-22,23,24 में डेंगू लार्वा व मलेरिया की जांच तथा दवा के छिड़काव का जिम्मा दिया है। लेकिन इन्द्रप्रसाद मलेरिया विभाग द्वारा सौंपा गया काम छोड़ क्लीनिक खोलकर मरीजों को इलाज देने बैठ गए। शहर में डेंगू मलेरिया के लार्वा की जांच किस तरह से की जा रही है इस पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है। हाल ही में तीन डेंगू मरीज शहर में पाए गए। इसके बाद भी यह हालात देखने को मिल रहे हैं।

बड़ा सवालःये जान ले लेंगे तब जागोगेक्या जिला सरकार?

दो दिन पहले जिला प्रशासन ने एमएस रोड पर एक झोला छाप डॉक्टर पर कार्यवाई कर अपनी पीठ थपथपा ली थी। लेकिन नदीपार्ट टाल में करीब आधा सैंकड़ा से अधिक झोला छाप डॉक्टर क्लीनिक खोलकर इलाज के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और स्वास्थ्य महकमे को दिखाई तक नहीं दे रहा। जिला प्रशासन की भी आंखे इनकी ओर से बंद है। बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि जब यह झोलाछाप लोगों की जान ले लेंगे तब जिला प्रशासन जागेगा।

झोला छाप-

-डॉ पीके विश्ववास, कलकत्ता क्लीनिक, 30 साल से नदीपार्ट टाल में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इन्होंने डिग्री के नाम पर बीआईए एसएम लिख रखा है।

-डॉ केसी दीवान ने क्लीनिक पर कोई बोर्ड नहीं लगा रखा। 40 साल से नदीपार टाल में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। डॉ दीवान ने डिग्री आरएमपी बताई गई।

-डॉ जीपी मिश्रा,डिग्री आरएमपी, गायत्री क्लीनिक के नाम से पिछले 40 साल से नदीपार टाल में संचालित कर रहे हैं।

-डॉ एलएस भार्गव, डिग्री आरपीएम, भार्गव क्लीनिक के नाम से लंबे समय से नदीपार टाल में मरीजों को इलाज दे रहे हैं।

सीधी बात-

डॉ आईपी आर्य(एमबीबीएस), मलेरिया विभाग में सर्विलांस वर्कर

प्रश्नः डॉक्टर साहब इस समय किस बीमारी के अधिक मरीज आ रहे।

उत्तरः वायरल फीवर है, डेंगू मलेरिया कम है , अभी तीन मरीज ही हाल में डेंगू के मिले थे।

प्रश्नःआपके पास कौन सी डिग्री है?

उत्तरः मैं आरएमपी डॉक्टर हूं।

प्रश्नः आपने क्लीनिक के बोर्ड पर तो एमबीबीएस लिख रखा।

उत्तरः मैंने 1991 में पत्राचार से एमबीबीएस कर रखी है।

प्रश्नः आप मलेरिया विभाग में भी नौकरी करते?

उत्तरः आपको किसने बताया, हां मैं मलेरिया विभाग में हूं, दिन में वहां और सुबह शाम क्लीनिक पर मरीज देख लेता हूं।

मलेरिया अधिकारी मनोज पाटीदार से सीधी बात-

प्रश्नः आपके यहां पर इन्द्रप्रसाद आर्य क्या हैं?

उत्तरः हमारे यहां कुल 28 सर्विलांस वर्कर है, इन्द्रप्रसाद भी वही हैं,इनके पास वार्ड 22, 23,24 में डेंगू मलेरिया के लार्वा जांच का जिम्मा है।

प्रश्नः इन्द्रप्रसाद या अन्य किसी सर्विलांस वर्कर के पास एमबीबीएस की डिग्री है?

उत्तरः नहीं सर्विलांस वर्कर 10 वीं पास भी बन जाता है लेकिन हमारे पास एमएससी भी हैं पर एमबीबीएस कोई नहीं और नहीं एमबीबीएस पत्रचार से होती यह कभी सुना।

प्रश्नः इन्द्रप्रसाद क्लीनिक चलाकर मरीज देख रहे, क्या वह ऐसा कर सकते?

उत्तरः नहीं कर सकते, यदि उनके खिलाफ ऐसा कोई सबूत मिलता तो मैं सख्त कार्यवाई करुंगा।

मैं सख्त कार्यवाई करुंगा-

बिना डिग्री के क्लीनिक कोई नहीं चला सकता। मैं कल ही इसकी जांच करता हूं और यदि क्लीनिक मिलती है तथा उस पर एमबीबीएस लिखा है तो मैं जांच के बाद सख्त कार्यवाई करुंगा।

डॉ मृदुल सक्सेना, सीएमएचओ

Posted By: Nai Dunia News Network