लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में 10 दिवसीय सत्संग का आयोजन

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ग्वालियर । नईदुनिया प्रतिनिधि

जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार मन को स्वस्थ्य रखने के लिए भजन की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार का आप भोजन करोगे आपका शरीर भी वैसा ही होगा। अपौष्टिक भोजन शरीर को कमजोर और कुपोषित बनाता है। इसी प्रकार सद्गुरु और राम नाम का भजन करने से मन साफ एवं प्रसन्नचित रहता है। यह बात बड़ोदा गुजरात से रामद्वारे में पधारे रामस्नेही संप्रदाय के संत रामप्रसाद महाराज ने कही।

लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में रामचरण महाराज के त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव के तहत 10 दिवसीय सत्संग का आयोजन किया जा रहा है। सत्संग में महाराज रामप्रसाद महाराज ने कहा कि भजन रूपी मन का भोजन हमें सद्गुरु की शरण में मिलता है। हमें ईश्वर से पहले गुरु को प्रणाम करना चाहिए। क्योंकि बिना गुरु की कृपा के शिष्य को कभी गोविंद नहीं मिल सकते हैं। गुरु की कृपा से ही शिष्य को रामनाम रूपी मंत्र मिलता है। इसे आपसे कोई नहीं छीन सकता है। संसार में मिली भौतिक संपदा को छीना जा सकता है उसे बांटा भी जा सकता है। लेकिन गुरु से मिली मंत्र रूपी संपदा को कोई नहीं छीन सकता है। हां लेकिन इसे जितना बांटोगे यह उतनी ही बढ़ती जाएगी। जिस प्रकार बैंक में खाता खोलने के लिए आधार कार्ड जरूरी है वैसे ही ईश्वर के यहां पर खाता खोलने के लिए सद्गुरु का आशीर्वाद जरूरी है। सद्गुरु द्वारा बताए मार्ग पर चलने के लिए जरूरी नहीं है कि गुरु के पास बैठे रहो। गुरु से भौतिक शरीर से नहीं बल्कि मानसिक रूप से जुड़ा जाता है। गुरु का आश्रय नहीं होने से मनुष्य का जीवन दुष्कर्य हो जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network