ग्वालियर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना वायरस की वजह से देश में हुए 21 दिन के लॉकडाउन से न्यायालयों का काम भी प्रभावित हुआ है। जिससे आने वाले समय में केसों का बोझ बढ़ने वाला है। क्योंकि लॉकडाउन में न कोई नया केस फाइल हो सका है न ही किसी पुराने केस का डिस्पोजल हुआ है। हाई कोर्ट में वर्किंग डे में रोज औसतन 150 से अधिक केसों का निराकरण होता है और जिला कोर्ट में निराकरण का आंकड़ा 250 के ऊपर रहता है। इस बार छुट्यिां कम हो सकती हैं।

हाई कोर्ट में 240 दिन वर्किंग डे रहते हैं। हाईकोर्ट का एक-एक घंटा कीमती है, लेकिन कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए केन्द्र शासन ने देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी। इसके चलते हाई कोर्ट व जिला कोर्ट में भी सुनवाई बंद हो गई। इन 21 दिनों में हाई कोर्ट के 10 वर्किंग डे बेकार हुए हैं। 11 दिन की शासकीय छुट्टी रही है। 10 दिनों में हाई कोर्ट में करीब डेढ़ हजार केसों का निराकरण हो सकता था, लेकिन डेढ़ हजार इन केसों का बोझ बढ़ गया। इतने ही नए केस आने वाले हैं। लॉकडाउन से औसतन तीन हजार केसों का बोझ कोर्ट के ऊपर आने वाला है।

सबसे ज्यादा जमानतों के केसों का निराकरण

हाई कोर्ट की ग्वालियर पीठ में जमानत के केसों के निराकरण की संख्या अधिक है। जनवरी 2019 से दिसंबर 2019 के बीच जमानत के 15 हजार 318 केसों का निराकरण किया गया।

- 5 हजार 487 रिट पिटीशनों का निरकरण किया गया। उसके बाद अवमानना याचिकाएं 1 हजार 300 से अधिक निराकृत की गई हैं।

- एक साल में 29 हजार 278 केसों का निराकरण होता है। इसमें सभी तरह की याचिकाएं हैं।

- हाई कोर्ट में रोजाना 120 याचिकाएं नई फाइल होती हैं।

जिला कोर्ट के 14 दिन हुए प्रभावित

- जिला कोर्ट के 14 दिन प्रभावित हुए हैं। पुराने केसों पर सुनवाई रुकी हुई है। छोटे व बड़े करीब 250 केसों का निराकरण होता था। जैसे ही कोर्ट खुलेंगे, वैसे ही छोटे केस न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां आएंगे।

- पुलिस अपने चालान पेश कर रही है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से चालानों पर भी कोई सुनवाई नहीं है। इन चालानों को भी सुनना होगा।

- शराब, जुआ, सट्टा पर्ची, ट्रैफिक के केस जिस दिन पेश होते थे, उसी दिन निराकरण हो जाता था। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद इन केसों का भी बोझ आएगा।

इनका कहना है

- कोर्ट में नए केसों की संख्या बढ़ेगी, यह स्वभाविक है। वैसे आर्डर में ही छुट्टियां कम करने का जिक्र है। जितने दिनों का नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कैसे होगी, उसका फैसला कोर्ट खुलने के बाद ही हो सकेगा।

राजेन्द्र कुमार, रजिस्ट्रार जनरल मप्र हाईकोर्ट

- न्यायाधीश व वकीलों के समन्वय से भरपाई की जा सकती है। जितने वर्किंग दिनों का नुकसान हुआ है, उनकी पूर्ति छुट्टियां कम करके की जा सकती है। इसमें वकीलों को सहयोग करना चाहिए।

जेपी मिश्रा, सदस्य स्टेट बार काउंसिल

Posted By: Nai Dunia News Network

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