कप्तान के डर से वर्दी में आया बैक ऑफिस

महकमे में कप्तान के नए फरमान से कर्मचारी परेशान हो गए हैं। क्या है कि दो दिन पहले कप्तान ने जब देखा तो उनके ऑफिस का स्टाफ मतलब बैक ऑफिस सिविल ड्रेस में घूमते नजर आए। फिर क्या था कप्तान ने तत्काल फरमान निकाल दिया कि अब से जो बिना वर्दी के दिखा उस पर एक्शन लिया जाएगा। कप्तान का आदेश था और धमकी भी थी कि वह हर शाखा में आकर चेक भी करेंगे। फिर क्या था अगले दिन पूरा स्टाफ खाकी में लिपटा नजर आ रहा था। ऐसे-ऐसे लोग खाकी में दिखे जिनकी पूरी नौकरी 15 अगस्त, 26 जनवरी को छोड़कर घर के कपड़ों में निकल गई। लेकिन यह क्या धमकी देकर कप्तान साहब अगले दिन दफ्तर ही नहीं आए। जबकि धुली प्रेस करी वर्दी पहनकर स्टाफ कप्तान साहब के निरीक्षण का इंतजार कर रहा था। सबका सोचना था कि एक बार साहब निरीक्षण कर जाएं तो बला कटे।

रेत से आय वाले पुलिस जवान, अफसर परेशान

सुना है भैया आजकल अपने हाइवे से जुड़े थाने जिनमें गिरवाई, सिरोल, झांसी रोड, गोला का मंदिर, महाराजपुरा, कंपू आदि अन्य देहात के थाने में पदस्थ कुछ जवान व अफसर बड़े परेशान हैं। काहे नहीं होंगे परेशान इन थानों में सीट ही उन्होंने रेत की दम पर लेई थी अच्छी खासी कीमत पर उनका चुनाव हुआ पर अब पिछले 20 दिन से रेत को काम बहुत ही ज्यादा ठंडो पड़ो है। जवान हाइवे पर पहले की तरह जा तो रहे हैं, लेकिन अबे ट्रॉलियों से सुविधा शुल्क लेवे नहीं बल्कि पलायन कर आ रहे लोगों को पीछे दौड़-दौड़कर पूड़ी सब्जी खिलाने। क्या है कि जब से कोरोना को-रोना आयो है पुलिस की तो कार्यशैली ही बदल गई है। ऊपर से कप्तान साहब का आदेश है कि कहीं कोई दुखी भूखा दिख जाए तो अपना कर्तव्य निभाएं। बस बेचारे यह जवान अफसर हाथ में खुजली के बाद भी मन उदास होकर सेवा में लगे हैं।

किलागेट में शराब तस्कर की खाकी पर हैकड़ी

क्यों भाई यह क्या सुनाई पड़ रहा है अभी हाल ही में किलागेट के खाकी वालों पर दो पिता-पुत्र शराब तस्कर बहुत भारी पड़ गए। सही सुना है भैया ऐसा वैसा नहीं जहां खाकी वाले रौब दिखाकर पहुंचे थे वहीं उनका पूरा रौब उतार दओ। क्या है कि जिनको अभी तक पुलिस पाल पोषकर बढ़ा रही थी अब वह ही कान काट वे पर आ गए हैं। क्या है कि लॉकडाउन में शराब बेचने की सूचना पर किलागेट से दो खाकी वाले वहां पहुंच गए। तस्कर ने उनको सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। लेकिन इस पूरे मामले में एक बात मन को खाए जा रही है कि जवान पिटे मुंह में टांके भी आए। लेकिन किलागेट के कोतवाल साहब की भूमिका समझ नहीं आ रही सिर्फ आबकारी एक्ट का मामला दर्ज हुआ। मामले को छुपाने के लिए ऐसा किया गया कि कहानी कुछ और है।

कोरोना ड्यूटी घरवाली वर्दी धो-धोकर परेशान

जब से कोरोना का रोना शुरू हुआ है पुलिस जवान व थाना प्रभारियों की घरवालियां बहुत परेशान हैं। साहब लोग दिन-रात सेवा कर रहे हैं। ऐसे लग रहो है कि कोरोना से लड़ाई की पूरी जिम्मेदारी इनके कंधों पर है। ऊपर से अफसरों का आदेश है कि रोज वर्दी धुलवाकर ही पहनी जाए, जिससे संक्रमण से बचा जा सके। अब हो यह रहा है कि जवान जब घर पहुंचते हैं तो खाकी उतारकर धोने के लिए टांग देते हैं। फिर मुसीबत शुरू होती है घर की देवियों की। रोज उन्हें एक बार वर्दी धोनी पड़ रही है। अब कप्तान का आदेश है और पत्नियों का गुस्सा इन जवानों को झेलना पड़ रहा है। लेकिन क्या करें मजबूरी है पुलिस को कोरोना से जो लड़ना है और लॉकडाउन का पालन जो करवाना है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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