नईदुनिया कार्यालय में एडीजीपी ने श्रीमद्भगवत गीता का वितरण किया

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ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिस व्यक्ति के अंदर सतोगुण जाग्रत हो जाता है, उसके अंदर हमेशा शांति रहती है। साथ ही वह कभी भी गलत कार्यों में नहीं पड़ता है। जबकि तमस गुणों वाला व्यक्ति अपराध करता है। सतोगुण को अपने अंदर जाग्रत करने के लिए श्रीमद् भगवतगीता का अध्ययन जरूरी है। इससे समाज के अंदर हो रहे अपराधों में कमी आएगी। यह बात एडीजीपी व आईजी ग्वालियर रेंज राजाबाबू ने नईदुनिया में श्रीमद् भगवतगीता के वितरण अवसर पर कही।

समाज में अपराधों को कम करने और धर्म का प्रवाह पुनः समाज में बढ़ाने के लिए आईजी राजाबाबू समाज के बीच जाकर श्रीमद् भगवत गीता का वितरण कर रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को आईजी राजाबाबू ने नईदुनिया कार्यालय में पहुंचकर नईदुनिया टीम को श्रीमद्भगवत गीता का वितरण किया। उन्होंने कहा कि अपराधों पर रोकथाम तभी लगाई जा सकती है जब समाज के अंदर संस्कार होंगे। संस्कार मनुष्य के अंदर धर्म से आते हैं। धर्म की वृद्घि मनुष्य के अंदर श्रीमद्भगवत गीता के नियमित अध्ययन से आती है। उन्होंने कहा कि सतोगुण के प्रभाव में रहकर जो अपना कार्य करेगा वह समाज को बेहतर परिणाम दे पाएगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में भी सतोगुण का प्रभाव होना चाहिए। कई बार समाज के लोगों की छोटी-छोटी गलतियों को बहुत बड़ी-बड़ी कर छापते हैं इससे समाज में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पर्यावरण और धर्म बचाना जरूरी

आईजी राजाबाबू ने कहा कि पर्यावरण दिवस से उन्होंने 3 से 4 फीट के पौधों का रोपण प्रारंभ किया है। क्योंकि हमने जंगल काट दिए, हालत यह है कि दिल्ली में ऑक्सीजन के सिलेंडर बिक रहे हैं। इसके बाद उन्होंने धर्म और संस्कारों के लिए श्रीमद्भगवत गीता को बांटना और उस पर समाज के बीच जाकर बोलना प्रारंभ किया है।

Posted By: Nai Dunia News Network