ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मैं मेरी पत्नी राजाबेटी, बेटयिां रेशमा और पूनम। हमारे साथ चचिया सास राजाबेटी पत्नी स्व. राजाराज और मेरे चाचा निरपाल उर्फ पप्पू भी थे। कोरोना काल के बाद रिश्तेदारी में अब शादी आई तो हम सभी शामिल होने गए थे। हम मुरैना के डोंगरपुर गांव के रहने वाले हैं। बिजौली के सिरोली गांव में आए थे, यहां मेरे साले की शादी है। बुधवार को लगुन फलदान था और 31 मई को शादी है, लगुन फलदान में शामिल हुए। मैं खेती करता हूं, सोचा- गांव में दो दिन कुछ काम कर लेंगे, इसके बाद लौट आएंगे, इसलिए हम गुरुवार को घर वापस जाने के लिए गांव से निकल पड़े। सिरोली गांव से बाहर सड़क पर आए और चितौरा रोड पर भवानी वेयर हाउस के ठीक सामने हम बस का इंतजार करने लगे। दोपहर के करीब 12:30 बज रहे थे। धूप तेज थी,इसलिए पत्नी दोनों बेटियां, चचिया सास और चाचा सड़क किनारे कच्चे में ही बैठ गए। यहीं पर बस आकर रुकती है। मैं करीब पांच फीट दूर बैठा था, यहां गड्ढा जैसा था। बहुत तेज रफ्तार में बोलेरो मौत बनकर आई। सड़क पर गाड़ी ऐसे लहरा रही थी, मानो गाड़ी का ड्राइवर सड़क पर चल रहे लोगों को कुचलने ही निकला है। मैं अपने स्वजन को आवाज लगाकर पीछे आने के लिए बोलने ही वाला था कि तब तक तो बोलेरो नजदीक आ गई। मैं और मेरे परिवार वाले कुछ समझ पाते, तब तक तो उसने पांचों को रौंद डाला। टक्कर लगने से बेटी टायर के नीचे दब गई, बाकी लोग उछलकर सड़क किनारे खंती में गिरे। मैं सन्ना रह गया, आंखों के सामने अंधेरा छा गया। दिल दहल गया था- चारों तरफ मेरे अपनों की लाश थी, चंद सेकंड में पूरा परिवार ही खत्म हो गया। समझ नहीं आ रहा था, किसे बचाऊं, किसे उठाऊं। मुझे बेहोशी छा गई, आसपास के लोग मदद के लिए आगे आए, लेकिन वो बोलेरो वाला नहीं रुका। उसे ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे ऐसे लोगों को सबक मिले। उसकी वजह से मेरा पूरा परिवार दुनिया छोड़ गया।

(जैसा कि महेंद्र जाटव ने नईदुनिया को बताया, इनकी पत्नी और दो बेटियां इस हादसे में मृत हुईं है।)

पांच मौत, अब सिर्फ यादों में रह गईं ये कहानियां...

1- मन्नात मांगी, सालों के इंतजार से हुईं बेटियां: महेंद्र ने बताया उसकी शादी करीब 20 साल पहले राजाबेटी से हुई थी। शादी के पांच साल तक जब बच्चा नहीं हुआ तो वह पत्नी के साथ कई मंदिरों में मन्नात मांगने गए। सालों के इंतजार के बाद बेटी हुई, इसके बाद दो और बेटियां हुईं, लेकिन इस हादसे ने परिवार के तीन लोगों की जान ले ली। राजाबेटी महेंद्र से कहती थी- बेटियां घर के काम नहीं करेंगी, वह पढ़ेंगी। महेंद्र किसानी करता है, लेकिन बेटियों की परवरिश में कमी नहीं रखता था।

2- बच्चियां बोली थीं- कहीं घूमे नहीं, सोचा शादी में जाएंगे तो उन्हें अच्छा लगेगा: महेंद्र ने बताया कोरोना काल में वह लोग कहीं नहीं गए। बच्चियां कहीं घूमने भी नहीं गईं, इसलिए शादी में जाने की जिद कर रही थीं, इसलिए सभी साथ में शादी में शामिल होने गए थे।

3- बच्ची का चेहरा तक पहचान नहीं आ रहा था: जब लाशें पोस्टमार्टम हाउस पहुंची तब महेंद्र अंदर पहुंचे। यहां छोटी बेटी को देखकर बिलख पड़े, छोटी बेटी को प्यार से गुड़िया बोलते थे- सबसे ज्यादा उसी को चाहते थे। उसका चेहरा हादसे में बुरी तरह कुचल गया था, उसका चेहरा तक पहचान में नहीं आ रहा था।

3- शादी में जाने से रोका था: निरपाल उर्फ पप्पू के एक बेटे की शादी हो चुकी है। महेंद्र ने बताया चाचा निरपाल के दो और बच्चे हैं। बेटा इतनी गर्मी में शादी में जाने से रोक रहा था, फिर भी वह नहीं माने और लौटते समय यह हादसा हो गया।

4- बड़ी बेटी को पता ही नहीं था, उसकी बहनें और मां दुनियां छोड़ गईं: महेंद्र और राजाबेटी की सबसे बड़ी बेटी रिश्तेदार के यहां सिरोली में ही रह गई थी, क्योंकि माता-पिता दो दिन बाद फिर शादी में आने वाले थे। जब हादसा हुआ तो शाम तक उसे पता ही नहीं था, उसकी छोटी बहनें और मां दुनियां छोड़ गईं।

Posted By: anil.tomar

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