ग्वालियर। टेंपो के धुएं और जाम से राहत के लिए शहर की जनता सालों से सिटी बस का सपना देख रही है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण सिटी बस सेवा के नाम पर पैसा भी बर्बाद हो रहा है और जनता को लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। स्मार्ट सिटी योजना में ग्वालियर के शामिल होने के बाद स्मार्ट बसें चलाने के प्रयास हुए, लेकिन अब तक बस स्टैंड और बस स्टॉपेज के मामले ही नहीं निपट सके हैं।

बस स्टैंड को लेकर स्मार्ट सिटी के ऑपरेटर परेशान हैं और शहर में बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) पर बनाए गए बस स्टॉपेज उपयोग से पहले ही दयनीय स्थिति में पहुंचने लगे हैं। स्मार्ट बस सेवा नगर निगम और स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन के बीच उलझकर रह गई है। महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर जिला प्रशासन भी गंभीर नजर नहीं आ रहा। राजनीतिज्ञ भी चुप्पी साधे हैं।

अंतरराज्यीय बस अड्डे का दिखाया था सपना

स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के प्रमुख चार रूटों ट्रिपल आईटीएम चौराहा, शर्मा फार्म से कलेक्ट्रेट, ट्रिपल आईटीएम से नदीगेट तक, महाराजपुरा से गुढ़ा गुढ़ी का नाका तथा दीनदयाल नगर से इंदरगंज तक कुल 16 मिडी सिटी बसें चलाना थीं। इसके अलावा ग्वालियर से इंदौर, भोपाल, भिंड, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर तथा अशोकनगर के लिए एसी बसों के क्लस्टर बनाकर टेंडर जारी किए थे।

इन रूटों पर भी 16 एसी बसें चलना हैं। स्मार्ट सिटी की इंटर सिटी और इंट्रा सिटी बसों के लिए शहर में ट्रिपल आईटीएम चौराहा मल्लगढ़ा के पास अन्तराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) बनाने का सपना दिखाया। आईएसबीटी के लिए मप्र की साधिकार समिति से स्वीकृति भी मिली। यह प्रोजेक्ट 25 करोड़ का था। बाद में यह कागजों तक ही सिमटकर रह गया।

बस अड्डे को लेकर विवाद

स्मार्ट सिटी डवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड ने इंटर सिटी व इंट्रा सिटी बसों के संचालन का जिम्मा नीरज ट्रेवल्स को सौंप दिया। लेकिन बस अड्डे के लिए जगह न मिलने पर कई दिनों तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी थी। बाद में स्टेशन बजरिया के पास नगर निगम की देखरेख वाले बस अड्डे से ही स्मार्ट सिटी की बसें चलाना का फैसला हुआ। इस पर लोकल बस ऑपरेटरों ने विरोध किया। लोकल और स्मार्ट बसें चलने पर दोनों ऑपरेटरों में विवाद होने लगे। बाद में नगर निगम और जिला प्रशासन ने बस अड्डे के आधे हिस्से को लोकल तथा आधे हिस्से को स्मार्ट सिटी के लिए दे दिया। इससे स्मार्ट सिटी बस सेवा का वेंडर सहमत नहीं है इसलिए अन्य रूटों पर बस चलाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे।

4 बस टर्मिनल की हुई थी प्लानिंग

17 सितंबर 2017 को ग्वालियर कलेक्टोरेट में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, मप्र की तत्कालीन नगरीय विकास मंत्री माया सिंह, तत्कालीन महापौर विवेक शेजवलकर व अन्य जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई थी। जिसमें तय किया गया था कि ग्वालियर के अंदर से बसों का दबाव कम करने के लिए 4 बस टर्मिनल बनाए जाएं। आईएसबीटी शर्मा फार्म रोड स्थित ट्रिपल आईटीएम के सामने, लोकल बस ऑपरेटरों के लिए भिंड रोड पर नरेश्वर के पास, एबी रोड पर शंकरपुर के पास तथा शिवपुरी लिंक रोड पर नीम चंदोआ के बस अड्डा बनाने पर सहमति बनी। लेकिन इनमें से एक भी बस अड्डा नहीं बन सका।

विज्ञापन का जरिया बने बस स्टापेज

स्मार्ट सिटी की बसें स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन की मॉनीटरिंग में चलना हैं जबकि शहर में बस स्टॉपेज नगर निगम बनवा रहा था। निगम ने बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) पर 130 बस स्टॉपेज बनाने का टेंडर जारी किया। फर्म ने आठ माह पहले तक 40 स्टॉपेज बना दिए। इन स्टॉपेज पर बसें तो रूकी नहीं बल्कि वे फर्म के लिए कमाई का जरिया जरूर बन गए। फर्म उन पर विज्ञापन लगाकर कमाई कर रही है। नगर निगम और स्मार्ट सिटी के बीच फंसने से फर्म ने अन्य स्थानों पर स्टापेज नहीं बनाए। जो बने हैं वे देखरेख के अभाव में टूट-फूट रहे हैं।

मवेशियों की आरामगाह बने बस स्टापेज

सिटी बस चलाने के नाम पर नगर निगम ने 2008 में भी लाखों रुपए खर्च कर शहर में करीब 30 स्थानों पर बस स्टॉपेज बनाए थे। वे भी देखरेख व उपयोग के अभाव में टूट-फूट गए, बसें भी बंद हो गईं। सुविधाएं देने से पहले ही अधिकारी अब इलैक्ट्रिक बस का सपना दिखा रहे हैं।

इनका कहना है

स्मार्ट सिटी बसों के लिए बस स्टैंड तैयार है, उसे और बेहतर किया जाएगा। बस स्टॉपेज नगर निगम ने बनवाए थे। इलैक्ट्रिक बसों के संचालन की बेहतर प्लानिंग की जाएगी। इसका लाभ शहरवासियों को मिलेगा।

-महीप तेजस्वी, सीईओ स्मार्ट सिटी

Posted By: Nai Dunia News Network

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