- पुलिस की भूमिका पर कोर्ट ने उठाए सवाल

Case of death in custody:ग्वालियर (नप्र)। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने बेलगढ़ा थाना में हुई मौत के मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी है। पुलिस हिरासत में हुई मौत के बदले में पीड़ित को 20 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है, यह राशि शासन जमा कराएगा। इस राशि को लापरवाही करने वाले छह पुलिस कर्मियों से वसूला जाएगा। सीबीआइ को एक महीने में जांच शुरू करनी होगी। इस याचिका की सुनवाई 24 नवंबर को न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने की, जिसके बाद सोमवार को फैसला सुनाया गया।

ग्वालियर के थाना बेलगढ़ा के अंतर्गत ग्राम बाजना में 10 अगस्त 2019 को सुरेश सिंह रावत और खेमू शाक्य के बीच विवाद हो गया था। खेमू बेलगढ़ा थाना में केस दर्ज कराने पहुंच गया। पुलिस खेमू की शिकायत पर एफआइआर दर्ज कर ली। उसके पीछे सुरेश भी केस दर्ज कराने पहुंच गए। पुलिस ने सुरेश को पकड़ लिया और उनके भाई से 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। जब उन्होंने पैसे नहीं दिए तो पुलिस ने सुरेश की मारपीट की। इसके बाद उनसे अचेत अवस्था में पुलिस कर्मी उसे भितरवार अस्पताल लेकर आए। यहां डाक्टरों ने जब उसे मृत घोषित कर दिया तो पुलिस कर्मी शव को छोड़कर भाग गए। इसके बाद पुलिस कर्मियों पर हत्या का केस दर्ज हुआ। इसके बाद केस बेलगढ़ा थाने से भितरवार थाने स्थानांतरित कर दिया गया।

एसे हाई कोर्ट पहुंचा मामला: मृतक सुरेश रावत के पुत्र मुकेश रावत ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि पुलिस ने हत्या के मामले को ढाई साल से लटकाए हुए है। इस पर कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित केस डायरी तलब की। इस मामले की जांच करैरा के एसडीओपी आत्माराम शर्मा कर रहे थे। जब से केस करैरा स्थानांतरित हुआ, तब से तीन एसडीओपी ने जांच की। पहले एसडीओपी आत्माराम शर्मा ने संदिग्धों की गिरफ्तारी के प्रयास नहीं किए। आत्माराम के बाद जांच जीडी शर्मा के पास पहुंची, उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया। अब जांच संजय चतुर्वेदी के पास है। उन्होंने अपनी गलती छिपाने की कोशिश की। कोर्ट ने चतुर्वेदी पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी अधिवक्ता निर्मल शर्मा ने की।

एसएसपी के आचरण की जांच कराएं डीजीपी

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस ने अपनी साख बचाने व लोगों में भरोसा पैदा करने के लिए जांच शिवपुरी जिले के करैरा सब डिवीजनल पुलिस आफिसर को सौंप दी थी, लेकिन केस के जांच अधिकारी एसडीओपी ने ढाई साल में कोई जांच नहीं की। अब सीबीआइ केस के जांच अधिकारियों की भूमिका भी जांचेगी। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक मप्र को आदेश दिया कि ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आचरण की भी जांच कराएं कि उन्होंने इस केस को क्राइम मीटिंग में रखा या नहीं।

पुलिस कर्मियों की बहाली पर कोर्ट ने खड़े किए सवाल

- संदिग्ध पुलिस कर्मियों को छह माह निलंबित रखा, इसके बाद सभी को कैसे बहाल कर दिया। ़निएएसआइ विजय सिंह राजपूत को सेवानिवृत्त कर फायदा भी दिया। उसकी विभागीय जांच क्यों नहीं की।़निढाई साल तक केस क्यों लंबित रखा।

- आरोपित पुलिस कर्मियों के ड्यूज को तत्काल रोका जाए।

पुलिस कर्मियों से ऐसे होगी वसूली

एएसआइ विजय बहादुर सिंह से 10 लाख, निप्रधान आरक्षक अरुण मिश्रा से पांच लाख, हवलदार नीरज प्रजापति से दो लाख, आरक्षक धर्मेंद्र, विजय कुशवाह व होमगार्ड एहशान खान से एक-एक लाख रुपये

यह राशि मृतक के स्वजन को दी जाएगी।)

एक माह में पालन रिपोर्ट पेश करें

कोर्ट ने सोमवार को एसएसपी अमित सांघी को केस डायरी, सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी। यह रिपोर्ट को एसएसपी सीबीआइ को देंगे। एक माह में पालन रिपोर्ट हाई कोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के यहां पेश करनी होगी।

Posted By: anil tomar

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